हिनौती माइंस ओवरफ्लो धान के खेतों में पहुंच रहा पानी, फसल बर्बाद होने की आशंका से किसानों में चिंता

हिनौती माइंस ओवरफ्लो धान के खेतों में पहुंच रहा पानी, फसल बर्बाद होने की आशंका से किसानों में चिंता

प्रेषित समय :15:54:26 PM / Sun, Oct 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मैहर. मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत हिनौती में माइंस में लगातार बढ़ रहे जलभराव ने आसपास के किसानों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि बिहरागंज माइंस का पानी लगातार हिनौती माइंस में डाले जाने के कारण अब माइंस ओवरफ्लो की स्थिति में पहुंच रही है. पानी माइंस की मेड़ से रिसकर नीचे स्थित खेतों तक पहुंच रहा है, जहां इस समय धान की फसल खड़ी है.

किसानों का कहना है कि यदि पानी का रिसाव इसी तरह जारी रहा और जलस्तर बढ़ता गया तो माइंस की मेड़ पर दबाव बढ़ सकता है. मेड़ कमजोर होकर टूटने की स्थिति में बड़ी मात्रा में पानी खेतों में पहुंचने की आशंका है. इससे न केवल वर्तमान धान की फसल को नुकसान हो सकता है, बल्कि खेतों की मिट्टी और कृषि भूमि भी प्रभावित होने का खतरा है.

ग्रामीणों ने मामले में प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. किसानों का कहना है कि किसी बड़े नुकसान के बाद कार्रवाई करने के बजाय अभी माइंस में पानी के भराव और मेड़ की स्थिति की जांच कराकर जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए.

माइंस की मेड़ से रिस रहा पानी
ग्रामीणों के अनुसार हिनौती में जिस माइंस में पानी का भराव हो रहा है, वह गुप्ता परिवार की जमीन पर बनी है. आरोप है कि बिहरागंज माइंस का पानी लगातार यहां पहुंचाया जा रहा है. पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही माइंस की मेड़ से रिसाव शुरू हो गया है.

मौके से सामने आए वीडियो में माइंस के नीचे खेतों में खड़ी धान की फसल दिखाई दे रही है. इसी क्षेत्र में माइंस की मेड़ के पास से पानी रिसता हुआ नजर आने की बात कही गई है. किसानों का कहना है कि फिलहाल खेतों में फसल खड़ी है और पानी का लगातार पहुंचना फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.

किसानों के मुताबिक खेतों में पानी की स्थिति के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है. समय पर खाद डालने सहित दूसरी जरूरी गतिविधियां नहीं हो पा रही हैं. इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

धान की फसल पर मंडरा रहा नुकसान का खतरा
हिनौती और आसपास के खेतों में इस समय धान की फसल खड़ी है. किसानों के लिए यह समय फसल की देखभाल और अंतिम चरण की तैयारी का है. ऐसे में खेतों में लगातार पानी पहुंचना उनकी चिंता का बड़ा कारण बन गया है.

किसानों का कहना है कि धान की फसल को लंबे समय तक अनियंत्रित पानी में रहने से नुकसान हो सकता है. यदि माइंस की मेड़ टूटती है और एक साथ बड़ी मात्रा में पानी खेतों में पहुंचता है तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता है.

ग्रामीणों की चिंता केवल फसल तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि पानी के तेज बहाव से खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी बह सकती है. इससे अगले कृषि चक्र में भी जमीन की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका रहेगी.

हालांकि फिलहाल कितने क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है और वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना है, इसका कोई आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है. किसानों की ओर से फिलहाल संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई जा रही है.

मेड़ टूटने की आशंका ने बढ़ाई परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता माइंस की मेड़ को लेकर है. उनका कहना है कि पानी लगातार भरने से मेड़ पर दबाव बढ़ सकता है. यदि किसी स्थान पर मेड़ कमजोर है तो वहां से रिसाव बढ़ने या अचानक टूटने की स्थिति पैदा हो सकती है.

किसानों का कहना है कि माइंस में पानी की मात्रा और मेड़ की मजबूती का तकनीकी निरीक्षण जरूरी है. उनका मानना है कि केवल मौके पर स्थिति देखकर समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को माइंस की संरचना, जलस्तर और पानी की निकासी व्यवस्था की जांच करनी चाहिए.

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते पानी का दबाव कम नहीं किया गया तो अचानक पानी खेतों में पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में किसानों को अपनी फसल बचाने का मौका भी नहीं मिलेगा.

किसानों का आरोप जवाब नहीं मिला
मामले को लेकर किसानों ने संबंधित कंपनी के अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया. किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी चिंता और खेतों में पहुंच रहे पानी की जानकारी संबंधित पक्षों तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

किसानों के मुताबिक उन्होंने अल्ट्राटेक कंपनी के अधिकारियों से भी संपर्क करने की कोशिश की. वहीं डीएस माइंस के शिशिर ताम्रकार से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ.

इसके चलते इस मामले में संबंधित कंपनी या प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ सका है. कंपनी का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना जरूरी होगा, ताकि पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके.

पानी डालने की प्रक्रिया रोकने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक हिनौती माइंस में पानी के भराव और मेड़ की सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक बिहरागंज माइंस से यहां पानी डाले जाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए.

किसानों का कहना है कि यदि पानी का लगातार प्रवाह जारी रहा तो माइंस की क्षमता और मेड़ की स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए पहले जलभराव को नियंत्रित करना और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की टीम मौके पर भेजकर माइंस का निरीक्षण कराए. निरीक्षण के दौरान जलस्तर, मेड़ की मजबूती, रिसाव की स्थिति और आसपास के खेतों पर पड़ रहे प्रभाव का तकनीकी आकलन किया जाए.

प्रशासन से मौके पर निरीक्षण की मांग
किसानों का कहना है कि यह मामला केवल एक खेत या एक किसान तक सीमित नहीं है. माइंस के नीचे कई किसानों की कृषि भूमि होने के कारण यदि मेड़ टूटती है तो एक साथ कई खेत प्रभावित हो सकते हैं.

इसी वजह से ग्रामीण प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि राजस्व, खनिज और संबंधित तकनीकी विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करना चाहिए.

यदि जांच में माइंस की मेड़ कमजोर पाई जाती है या पानी का भराव निर्धारित सुरक्षा सीमा से अधिक मिलता है, तो तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए. किसानों के अनुसार पानी की सुरक्षित निकासी और मेड़ को मजबूत करने की व्यवस्था से संभावित नुकसान को रोका जा सकता है.

फसल खराब होने के बाद कार्रवाई का इंतजार क्यों
किसानों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े नुकसान का इंतजार नहीं करना चाहिए. उनका तर्क है कि यदि अभी पानी का रिसाव दिखाई दे रहा है तो स्थिति की जांच इसी समय की जानी चाहिए.

ग्रामीणों के अनुसार धान की फसल तैयार होने के महत्वपूर्ण चरण में है और इसमें किसानों की महीनों की मेहनत तथा लागत लगी हुई है. यदि अचानक पानी खेतों में भर जाता है तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया जाए और आवश्यक होने पर पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जाएं.

अधिकारियों की जांच से साफ होगी स्थिति
फिलहाल हिनौती माइंस में जलभराव की वास्तविक स्थिति, माइंस की कुल जल क्षमता, पानी पहुंचने की मात्रा और मेड़ की तकनीकी मजबूती को लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है. इसलिए किसानों द्वारा जताई गई आशंकाओं की पुष्टि प्रशासनिक और तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी.

ग्रामीणों की शिकायत और मौके से सामने आए वीडियो को देखते हुए अब प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि माइंस में पानी का भराव किस स्तर तक पहुंच चुका है और क्या इससे आसपास के खेतों को तत्काल खतरा है.

यदि समय रहते निरीक्षण कर पानी की निकासी और मेड़ की सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं तो संभावित फसल नुकसान को रोका जा सकता है. फिलहाल किसान प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं और उनकी मांग है कि हिनौती माइंस की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-