नई दिल्ली. नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट की. आयोग के सूत्रों ने कहा कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उनके अनुसार, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी घोषणा Form 6 का संशोधित हिस्सा नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त दस्तावेज था.
सोमवार को सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है. सीजेआई ने कहा कि जब संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने आएंगे, तब वह देखना चाहेगी कि फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया. सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग और चुनाव आयोग के कथित तौर पर अन्य दो आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लेने से जुड़ी याचिकाओं पर हो रही थी.
आयोग ने कहा- फॉर्म में संशोधन नहीं हुआ
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था. एसआईआर के दौरान इस्तेमाल की गई घोषणा को अतिरिक्त दस्तावेज के तौर पर जोड़ा गया था. आयोग का कहना है कि यह घोषणा एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित थी और इसे Form 6 में औपचारिक संशोधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
बिहार एसआईआर के फैसले का दिया हवाला
आयोग ने बिहार में हुए एसआईआर का भी हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को सर्वसम्मति से बिहार एसआईआर को बरकरार रखा था. अदालत ने माना था कि सामान्य मतदाता सूची संशोधन से अलग प्रक्रिया अपनाने मात्र से एसआईआर असंवैधानिक नहीं हो जाता. 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने भी कहा था कि फॉर्म 6 से जुड़ी एसआईआर घोषणा को बिहार एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बरकरार रखा गया था.
एसआईआर घोषणा में क्या जानकारी मांगी गई
अतिरिक्त घोषणा के तहत नए आवेदकों से ऐसी जानकारी मांगी जाती थी, जिससे उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पहले की गहन मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंध स्थापित किया जा सके. यह व्यवस्था स्ढ्ढक्र प्रक्रिया के तहत लागू की गई थी.
एसआईआर पूरी होने वाले राज्यों में घोषणा हटाई गई
30 सितंबर को चुनाव आयोग ने घोषणा की कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्ढ्ढक्र पूरा हो चुका है, वहां ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त एसआईआर घोषणा हटा दी गई है. इन जगहों पर अब नए मतदाताओं को Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित मूल फॉॅर्म 6 ही भरना होगा. वहीं, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर अभी जारी है, वहां ईसीआईनेट पोर्टल पर यह अतिरिक्त घोषणा उपलब्ध रहेगी.
26 सितंबर की बैठक में लिया गया फैसला
अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला 26 सितंबर को हुई पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक के बाद सामने आया. इस बैठक में ष्टश्वष्ट ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल थे. आयोग ने कहा था कि यह घोषणा एसआईआर के लिए थी और गैर-एसआईआर अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 0 के तहत लागू फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे.
दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में अतिरिक्त SIR घोषणा जोडऩे को लेकर आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि वैधानिक फॉर्म 6 में बदलाव करने के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने यह भी चिंता जताई कि ऑनलाइन फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा शामिल होने से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम पुरानी मतदाता सूचियों में नहीं थे.
विवाद का केंद्र अब रिकॉर्ड
चुनाव आयोग मूल फॉर्म 6 में किसी संशोधन से इनकार कर रहा है, जबकि याचिकाओं में अतिरिक्त घोषणा को फॉर्म 6 में बदलाव के तौर पर चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट अब संबंधित रिकॉर्ड और आयोग के जवाब के आधार पर यह देखेगा कि यह व्यवस्था किस प्रक्रिया के तहत लागू की गई और इसके पीछे वैधानिक आधार क्या था.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

