नई दिल्ली. देश के व्यापार जगत और टैक्स व्यवस्था से जुड़ी इस वक्त की अहम खबर सामने आ रही है. 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक को एक बार फिर टाल दिया गया है और अब यह बैठक आगामी 8 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी. जीएसटी काउंसिल सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, कुछ बेहद जरूरी और अपरिहार्य कारणों के चलते इस बैठक की तारीख को 7 अक्टूबर से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली यह उच्च स्तरीय बैठक नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम के समिट रूम में आयोजित होगी. इस बैठक में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह दूसरा मौका है जब इस बैठक को रिशेड्यूल किया गया है. इससे पहले यह बैठक 12 सितंबर को होनी थी, लेकिन दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की वजह से इसे टालकर 7 अक्टूबर किया गया था और अब इसे 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से शुरू करने का अंतिम फैसला लिया गया है.
इस बैठक के मुख्य एजेंडे और संभावित बड़े फैसले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही यह साफ संकेत दे दिए हैं कि जीएसटी सुधारों के अगले चरण यानी जीएसटी 2.0 प्रतिशत का मुख्य उद्देश्य टैक्स नियमों को बेहद सरल और पारदर्शी बनाना है. इस बैठक में टैक्स दरों में बदलाव के बजाय पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
कारोबारियों और ई-कॉमर्स को बड़ी राहत: इस बैठक में छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों के साथ-साथ ई-कॉमर्स सप्लायर्स के लिए व्यापार करना आसान बनाने पर मुहर लग सकती है. इसके तहत जीएसटी रजिस्ट्रेशन, टैक्स रिटर्न फाइलिंग और रिफंड की प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और तेज किया जाएगा. इससे कंप्लायंस में लगने वाला समय और लागत दोनों कम होंगे, जिससे देश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
गिरफ्तारी और पेनल्टी के कड़े नियमों में ढील: काउंसिल की लॉ कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एक बहुत बड़ा फैसला आ सकता है. अब तक सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 और 132 के तहत अधिकारियों को टैक्स चोरी के मामलों में सीधे गिरफ्तारी का अधिकार था. अब सरकार जानबूझकर की गई बड़ी टैक्स चोरी और अनजाने में हुई तकनीकी चूक के बीच एक स्पष्ट अंतर तय करने जा रही है. नए प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी अधिकारियों से बिना न्यायिक मंजूरी के सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लिया जा सकता है.
मुकदमेबाजी की सीमा में 5 गुना बढ़ोतरी: छोटे व्यापारियों को अदालती चक्करों से बचाने के लिए सरकार आपराधिक मुकदमा शुरू करने की मौद्रिक सीमा को मौजूदा 1 करोड़ रुपये से सीधे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर सकती है. यानी 5 करोड़ से कम की गड़बड़ी पर सीधे क्रिमिनल केस दर्ज नहीं होगा.
इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में सुधार: अक्सर देखा गया है कि सप्लायर की गलती के कारण वास्तविक खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) फंस जाता है. इस बैठक में खरीदारों के हितों की रक्षा करने, इंट्रा-ग्रुप आईटीसी ट्रांसफर को मंजूरी देने और कर्मचारियों के बीमा प्रीमियम पर आईटीसी क्लेम करने की अनुमति देने जैसे नियमों पर भी अंतिम सहमति बनने की पूरी उम्मीद है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

