CBI के 6 अधिकारियों पर होगी आपराधिक कार्रवाई, दिल्ली हाईकोर्ट ने झूठे बयान के आरोप में दिया निर्देश

CBI के 6 अधिकारियों पर होगी आपराधिक कार्रवाई, दिल्ली हाईकोर्ट ने झूठे बयान के आरोप में दिया निर्देश

प्रेषित समय :16:20:29 PM / Thu, Oct 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है. मामला आय से अधिक संपत्ति के एक केस से जुड़ा है, जिसमें अदालत के सामने प्रशासनिक मंत्रालय के साथ कथित पत्राचार को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया था.

यह आदेश न्यायमूर्ति मधु जैन की एकल पीठ ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान दिया.

छह अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश को CBI अधिकारियों सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ शिकायत दर्ज करने को कहा है.

अदालत के निर्देश के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ IPC की धारा 191, 193 और 209 के तहत कथित अपराधों को लेकर शिकायत तैयार की जाएगी. आदेश मिलने के चार सप्ताह के भीतर शिकायत को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजने के लिए कहा गया है.

विवाद किस मामले से जुड़ा है?
यह पूरा मामला अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले से संबंधित है. उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई 26 नवंबर 2002 को जारी स्वीकृति आदेश के आधार पर शुरू हुई थी.

बाद में जनवरी 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस स्वीकृति को अमान्य करार दिया. इसके बाद मार्च 2016 में विशेष अदालत ने अग्रवाल को मामले में बरी कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट जाने पर भी हुआ था विचार
विशेष अदालत के फैसले के बाद CBI ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना पर विचार किया था. हालांकि, 8 जून 2016 को कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से दी गई राय में मामले को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आगे ले जाने का पर्याप्त आधार नहीं माना गया.

यह राय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के माध्यम से 1 जुलाई 2016 को CBI तक पहुंचाई गई थी.

दस्तावेजों को लेकर शुरू हुआ विवाद
इसके बाद अशोक कुमार अग्रवाल ने जांच के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज वापस करने की मांग की. CBI ने 2 अगस्त 2016 को अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कुछ दस्तावेज जारी करने का विरोध किया.

CBI के जवाब में कहा गया था कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है. इसके बाद विशेष न्यायाधीश ने जांच एजेंसी से स्पष्ट रूप से बताने को कहा कि क्या इस मामले में कोई अपील या पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है अथवा लंबित है.

अदालत के सामने बयान पर उठे सवाल
अग्रवाल ने 8 अगस्त 2016 को CrPC की धारा 340 के तहत आवेदन दाखिल किया. उनका आरोप था कि CBI की ओर से अदालत में दिया गया पत्राचार संबंधी बयान तथ्यात्मक रूप से सही नहीं था. उनका कहना था कि उस समय प्रशासनिक मंत्रालय के साथ ऐसा कोई वास्तविक पत्राचार नहीं चल रहा था और CBI को पहले ही कानून एवं न्याय मंत्रालय की राय मिल चुकी थी.

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की पड़ताल में पाया कि CBI ने 8 अगस्त को ही DoPT को मामले पर दोबारा विचार करने और आगे कानूनी राय लेने का प्रस्ताव भेजा था.

अगले दिन CBI ने क्या कहा?
9 अगस्त को दाखिल अतिरिक्त जवाब में CBI ने कहा कि उसने जनवरी 2016 के फैसले को चुनौती देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया था और इस संबंध में प्रस्ताव 8 अगस्त को संबंधित विभाग को भेजा गया था.

इसी घटनाक्रम और अदालत के समक्ष दिए गए बयानों को लेकर हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है. मामले में आगे की कार्रवाई अब संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत भेजे जाने के बाद आगे बढ़ेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-