नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, कार्डियक अरेस्ट से गई जान

नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, कार्डियक अरेस्ट से गई जान

प्रेषित समय :10:22:47 AM / Thu, Oct 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया. हालत बिगड़ने के बाद उन्हें करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.

मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, नाना पाटेकर ने सुबह करीब 5:20 बजे अंतिम सांस ली. अभिनेता के निधन के बाद मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है. उनके निधन की परिस्थितियों को देखते हुए पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया भी कराई जाएगी.

नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है. करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने फिल्मों के अलावा थिएटर में भी अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने की क्षमता उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी.

100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया. हिंदी के साथ उन्होंने मराठी सिनेमा में भी उल्लेखनीय काम किया. वे कभी गंभीर और संवेदनशील किरदारों में नजर आए तो कभी खलनायक और हास्य भूमिकाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया.

1989 में रिलीज हुई फिल्म 'परिंदा' उनके करियर की चर्चित फिल्मों में शामिल रही. फिल्म में उन्होंने अन्ना नाम के खतरनाक किरदार को निभाया था. इस भूमिका के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला.

इसके बाद 1994 में आई 'क्रांतिवीर' में नाना पाटेकर ने मुख्य भूमिका निभाई. फिल्म में उनके दमदार अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला.

1996 में रिलीज हुई 'अग्निसाक्षी' में उनके अभिनय को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला. इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया. इस तरह नाना पाटेकर के नाम तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड दर्ज हुए.

चार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीते

नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उनके खाते में चार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी रहे. गंभीर, नकारात्मक और भावनात्मक किरदारों में उनकी पकड़ के साथ-साथ कॉमेडी में उनकी टाइमिंग को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया.

उनके अभिनय की खासियत यह रही कि वे छोटे से छोटे किरदार को भी अपनी प्रभावशाली संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस से यादगार बना देते थे. यही वजह है कि कई फिल्मों में उनकी भूमिका मुख्य कलाकारों के बराबर चर्चा में रही.

पद्मश्री से हुए सम्मानित

भारतीय सिनेमा में उनके लंबे और महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था. फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए भी पहचाने जाते रहे.

उनकी सार्वजनिक छवि एक ऐसे कलाकार की रही, जो सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते थे. वे किसानों और ग्रामीण परिवारों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे. इसके अलावा उन्होंने सेना के जवानों के प्रति भी कई मौकों पर अपना समर्थन और सम्मान जाहिर किया.

कारगिल युद्ध के दौरान सेना के साथ रहे

नाना पाटेकर का भारतीय सेना से जुड़ाव भी काफी चर्चा में रहा है. कारगिल युद्ध के दौरान वे जवानों के बीच पहुंचे और उनके साथ समय बिताया था. सेना के प्रति उनका सम्मान और सैनिकों के साथ खड़े होने का उनका अंदाज उनके प्रशंसकों के बीच लंबे समय तक याद किया गया.

नाना पाटेकर के निधन से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया, जिसने अपने अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई. उनके निभाए कई किरदार और संवाद लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बने रहेंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-