UPI पर MDR की नई व्यवस्था पर संशय, जनवरी 2027 तक टल सकता है फैसला

UPI पर MDR की नई व्यवस्था पर संशय, जनवरी 2027 तक टल सकता है फैसला

प्रेषित समय :14:45:44 PM / Thu, Oct 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली.UPI से होने वाले कुछ बड़े भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रस्तावित व्यवस्था फिलहाल आगे खिसक सकती है. सूत्रों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली व्यवस्था को जनवरी 2027 तक टालने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है.

नई व्यवस्था लागू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे में व्यापारी संगठनों और डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े पक्षों ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से अतिरिक्त समय देने की मांग की है. इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा जारी बताई जा रही है. NPCI जल्द ही इस पर अपना रुख स्पष्ट कर सकता है.

इंडस्ट्री को तैयारी के लिए और समय चाहिए
पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों का कहना है कि MDR व्यवस्था को लागू करने के लिए जरूरी तकनीकी और परिचालन तैयारियां अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. खासकर अलग-अलग प्रकार के UPI भुगतान के लिए अलग शुल्क दरों को लेकर कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों के बीच कई सवाल बने हुए हैं.

इंडस्ट्री की चिंता ऐसे समय में और बढ़ गई है जब देश में त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू होने वाला है. दिवाली के आसपास डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना रहती है. ऐसे में नई फीस व्यवस्था लागू होने पर व्यापारियों की लागत में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है.

त्योहारों के बीच कारोबारियों पर पड़ सकता है असर
सरकार के स्तर पर भी इस बात को लेकर चिंता बताई जा रही है कि त्योहारी सीजन के दौरान अतिरिक्त भुगतान लागत कारोबारियों के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है. यदि व्यापारियों का खर्च बढ़ता है तो उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है.

इसी वजह से उद्योग के कुछ हिस्से का मानना है कि त्योहारी बिक्री समाप्त होने तक नई व्यवस्था को रोकना व्यावहारिक विकल्प हो सकता है.

2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR
MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले व्यापारी पक्ष से पेमेंट सिस्टम में शामिल संस्थाओं को दिया जाता है.

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत, यानी 40 बेसिस पॉइंट की दर तय की गई है. उदाहरण के तौर पर 2,000 रुपये के भुगतान पर शुल्क 8 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये तक हो सकता है.

हालांकि, वास्तविक शुल्क लेन-देन की श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करेगा.

अलग-अलग भुगतान श्रेणियां बनीं चुनौती
UPI की व्यापक पहुंच के कारण अब इसका इस्तेमाल केवल दुकानों पर खरीदारी के लिए ही नहीं, बल्कि बिल भुगतान, कर्ज की किस्त, निवेश और कई अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए भी किया जाता है.

इंडस्ट्री की एक प्रमुख चिंता यही है कि इन सभी प्रकार के भुगतानों को एक समान तरीके से वर्गीकृत करना आसान नहीं है. अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग MDR व्यवस्था लागू होने पर पेमेंट कंपनियों और कारोबारियों को लेन-देन की सही श्रेणी पहचानने के लिए अतिरिक्त तकनीकी व्यवस्था करनी पड़ सकती है.

ब्रोकिंग कंपनियों ने भी जताई आपत्ति
पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियां भी प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख चुकी हैं. ब्रोकिंग इंडस्ट्री का तर्क है कि जब निवेशक UPI के जरिए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा जमा करता है, तो यह मुख्य रूप से फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया है. ऐसे लेन-देन से ब्रोकर को सीधे तौर पर अतिरिक्त राजस्व नहीं मिलता.

इसी आधार पर उद्योग के कुछ प्रतिनिधियों का मानना है कि ऐसे भुगतान पर MDR लगाना उचित नहीं होगा.

लोन EMI भुगतान में भी तकनीकी पेच
कर्ज की किस्तों के भुगतान को लेकर भी व्यवस्था में एक अलग चुनौती सामने आई है. ऑटोपे मैंडेट के जरिए होने वाले कुछ लोन भुगतान के लिए 5 रुपये का निश्चित शुल्क निर्धारित किया गया है.

समस्या तब पैदा हो सकती है जब ग्राहक के खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण ऑटो-डेबिट फेल हो जाए और वह बाद में खुद UPI के जरिए EMI का भुगतान करे. ऐसी स्थिति में सिस्टम के लिए यह पहचानना जरूरी होगा कि भुगतान सामान्य वित्तीय लेन-देन है या कर्ज की किस्त.

इंडस्ट्री का कहना है कि इस अंतर को तकनीकी रूप से सही तरीके से पहचानने के लिए अभी और तैयारी की जरूरत है.

अब NPCI के फैसले पर नजर
MDR की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर उद्योग की चिंताओं के बीच अब सबसे ज्यादा नजर NPCI के अगले कदम पर है. यदि समयसीमा बढ़ाने का फैसला होता है तो इसे जनवरी 2027 तक आगे किया जा सकता है.

फिलहाल 15 अक्टूबर 2026 की प्रस्तावित तारीख को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है. ऐसे में आने वाले दिनों में NPCI और सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-