मुंबई.भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव अचानक तेज हो गया. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की. महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों ने बाजार का माहौल बिगाड़ दिया.
दोपहर करीब 1:32 बजे सेंसेक्स 1,042.86 अंक गिरकर 71,595.84 पर पहुंच गया. इसी दौरान निफ्टी 50 भी 360.65 अंक की कमजोरी के साथ 22,242.40 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी मिडकैप 100 में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि बैंक निफ्टी भी दबाव में रहा.
बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट
शेयर बाजार में आई तेज बिकवाली का सीधा असर कंपनियों के कुल बाजार मूल्य पर पड़ा. कारोबार के दौरान BSE में सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान लगाया गया.
पेटीएम और मोबिक्विक में तेज गिरावट
फिनटेक शेयरों में भी गुरुवार को बिकवाली का असर साफ नजर आया. पेटीएम और मोबिक्विक के शेयरों में करीब 7 फीसदी तक की गिरावट देखी गई. वहीं पाइन लैब्स का शेयर भी लगभग 3.1 फीसदी नीचे आ गया.
डिजिटल पेमेंट से जुड़ी मर्चेंट फीस को लेकर सामने आई खबरों के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी और इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला.
ITC में भी बिकवाली तेज
ITC के शेयर में करीब 3 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई. कंपनी के शेयर में कई बड़े ब्लॉक सौदों की खबर के बाद स्टॉक में कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ती दिखाई दी.
अडानी समूह के शेयरों में भी गिरावट
व्यापक बाजार कमजोरी से अडानी समूह की कंपनियां भी अछूती नहीं रहीं. अडानी एंटरप्राइजेज में करीब 8 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई. अडानी पोर्ट्स में 4 फीसदी से ज्यादा कमजोरी रही, जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी लगभग 9 फीसदी तक नीचे आ गया.
अडानी पावर, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी टोटल गैस के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए.
मेटल और एनर्जी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे अधिक प्रभावित हुआ और इसमें 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. इसके अलावा निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में भी करीब 2 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली.
क्यों गिरा बाजार? ये हैं बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं ने तेल की कीमतों को बढ़ावा दिया है.
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर महंगाई, व्यापार घाटे और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है.
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. विदेशी पूंजी की निकासी से बाजार में खरीदारी का संतुलन बिगड़ रहा है और प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बढ़ रहा है.
3. ब्याज दरों को लेकर चिंता
ब्याज दरों के मोर्चे पर भी निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है. यदि ऊंची दरें लंबे समय तक जारी रहती हैं तो कंपनियों की फंडिंग लागत और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से निवेशक जोखिम वाले एसेट्स में सतर्कता बरत रहे हैं.
4. दुनिया भर के बाजारों से कमजोर संकेत
भारतीय बाजार को वैश्विक बाजारों से भी मजबूत समर्थन नहीं मिला. एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों की धारणा प्रभावित की.
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में मजबूती के बीच निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ बढ़ रहा है.
आगे बाजार की दिशा पर रहेगी नजर
जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और भारत से जुड़े आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
फिलहाल बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है. ऐसे में निवेशकों के लिए कंपनियों के मजबूत फंडामेंटल और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

