मुंबई। फिल्मी दुनिया में आलीशान घरों और लग्जरी लाइफस्टाइल की चर्चा अक्सर होती रहती है, लेकिन अभिनेता पंकज त्रिपाठी का घर अपनी सादगी और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए अलग पहचान रखता है। मुंबई के मड आइलैंड में स्थित उनका घर ‘रूप कथा’ आधुनिक शहर के बीच गांव जैसे शांत वातावरण का एहसास कराता है। यहां पेड़-पौधों की हरियाली, पारंपरिक रहन-सहन और प्रकृति से जुड़ी चीजें घर को खास बनाती हैं।
पंकज त्रिपाठी की पहचान पर्दे पर अपने सहज अभिनय के लिए है। उनके घर से जुड़ी ये खास बातें भी उनकी सादगी और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की छवि को सामने लाती हैं।
गांव की यादों से जुड़ा है ‘रूप कथा’
बिहार के गोपालगंज जिले में पले-बढ़े पंकज त्रिपाठी का बचपन ग्रामीण माहौल में बीता। गांव की जिंदगी, वहां का खानपान और प्रकृति के बीच बिताए गए पल उनकी यादों का अहम हिस्सा रहे हैं। मुंबई जैसे व्यस्त महानगर में उनका घर इस ग्रामीण परिवेश की झलक पेश करता है।
‘रूप कथा’ की खासियत इसकी भव्यता से ज्यादा इसका सुकून भरा माहौल है। खुली जगहों और प्राकृतिक वातावरण के कारण यहां शहर की हलचल से दूर समय बिताने का एहसास मिलता है।
चारों तरफ हरियाली, पेड़-पौधों से सजा परिसर
<text color="secondary" size="sm">प्रकृति के करीब रहने का अंदाज</text>
घर के आसपास मौजूद पेड़-पौधे और खुला लॉन इसके आकर्षण को बढ़ाते हैं। आम और कटहल जैसे पेड़ों का जिक्र इस घर को गांव के पारंपरिक परिवेश से जोड़ता है।
हरियाली से घिरी जगह में बैठकर समय बिताना, पक्षियों की आवाज सुनना और बगीचे के शांत वातावरण का आनंद लेना शहरी जीवन की भागदौड़ से अलग अनुभव देता है। घर की यही प्राकृतिक खूबसूरती इसे सामान्य सेलिब्रिटी आवासों से अलग बनाती है।
मिट्टी का चूल्हा और लिट्टी-चोखा का देसी स्वाद
पंकज त्रिपाठी के घर से जुड़ी सबसे दिलचस्प बातों में पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे का जिक्र भी शामिल है। आधुनिक रसोई के उपकरणों के बीच मिट्टी का चूल्हा पुराने भारतीय ग्रामीण जीवन की याद दिलाता है।
बिहार के मशहूर व्यंजन लिट्टी-चोखा का स्वाद भी इसी देसी अंदाज से जुड़ा है। पारंपरिक तरीके से खाना बनाने की यह शैली सिर्फ भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और खानपान की विरासत को संजोने का भी प्रतीक है।
बगीचे की ओर खुलती है रसोई की खिड़की
घर की रसोई में भी सादगी और खुलेपन का खास ध्यान दिखाई देता है। बगीचे की तरफ खुलने वाली खिड़की रसोई को बाहर के प्राकृतिक वातावरण से जोड़ती है।
ऐसी बनावट से घर के भीतर रोशनी और खुलापन महसूस होता है। साथ ही, रसोई और बगीचे के बीच एक सहज जुड़ाव बनता है, जहां परिवार के साथ चाय-नाश्ते के दौरान समय बिताने का अलग ही आनंद मिल सकता है।
फ्रिज के ठंडे पानी की जगह मटके का पानी
भारतीय घरों में मिट्टी के घड़े में पानी रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। पंकज त्रिपाठी के घर से जुड़ी इस आदत का उल्लेख भी उनकी देसी पसंद को रेखांकित करता है।
मटके में रखा पानी प्राकृतिक रूप से अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। यह पारंपरिक तरीका आज भी कई लोगों को पसंद आता है, खासकर उन लोगों को जो रोजमर्रा की जिंदगी में पुरानी घरेलू परंपराओं को बनाए रखना चाहते हैं।
सादगी ही बनाती है इस घर को खास
पंकज त्रिपाठी का ‘रूप कथा’ सिर्फ एक आलीशान घर की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा और सादगी के मेल की झलक भी पेश करता है। मिट्टी का चूल्हा, मटके का पानी, हरे-भरे पेड़ और खुली जगहें इस घर को एक अलग पहचान देते हैं।
जहां बड़े शहरों में लग्जरी का मतलब अक्सर महंगी सजावट और आधुनिक सुविधाओं से लगाया जाता है, वहीं इस घर से जुड़ी तस्वीर एक अलग विचार सामने रखती है—सुकून पाने के लिए हमेशा भव्यता जरूरी नहीं होती, कभी-कभी प्रकृति के करीब रहना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही सबसे बड़ी खूबसूरती होती है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

