व्यापारी का GST खाता हैक कर 8.09 करोड़ के 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड, 1.46 करोड़ की टैक्स चोरी की कोशिश में EOW ने दर्ज की FIR

व्यापारी का GST खाता हैक कर 8.09 करोड़ के 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड, 1.46 करोड़ की टैक्स चोरी की कोशिश में EOW ने दर्ज की FIR

प्रेषित समय :18:30:51 PM / Tue, Oct 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल. साइबर अपराधियों ने अब कारोबारियों की पहचान और जीएसटी खातों को निशाना बनाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का नया तरीका अपनाया है. भोपाल के एक व्यापारी के जीएसटी खाते में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश कर 8 करोड़ 9 लाख 81 हजार 305 रुपये के 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड किए गए. इन बिलों के माध्यम से करीब 1.46 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मामले की जांच के बाद 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली निवासी बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर और अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है.

जांच में सामने आया कि व्यापारी के जीएसटी खाते का पासवर्ड उनकी जानकारी के बिना बदल दिया गया. इसके बाद खाते में दो अन्य ई-मेल आईडी और एक नया मोबाइल नंबर जोड़ा गया. इन्हीं बदलावों के माध्यम से फरवरी 2026 का GSTR-1 रिटर्न व्यापारी के नाम से दाखिल कर दिया गया. व्यापारी का दावा है कि उन्होंने संबंधित फर्मों के लिए न तो कोई माल बेचा था और न ही ऐसे इनवॉइस जारी किए थे.

पासवर्ड बदला तो अपने ही खाते से कट गया संपर्क

EOW की प्रेस ब्रीफ के अनुसार, शिकायतकर्ता भोपाल में प्रोपराइटरशिप फर्म संचालित करते हैं, जिसका जीएसटी पंजीकरण 19 जून 2025 को हुआ था. फरवरी 2026 में उन्हें पता चला कि उनके जीएसटी खाते का पासवर्ड बदल दिया गया है. परिणामस्वरूप वे अपने ही खाते में लॉगिन नहीं कर पा रहे थे.

जांच में सामने आया कि 21 फरवरी 2026 को व्यापारी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर जीएसटी पोर्टल से पासवर्ड बदलने और रिटर्न दाखिल किए जाने से संबंधित चार एसएमएस प्राप्त हुए थे. व्यापारी ने न तो उस दिन पासवर्ड बदला था और न ही कोई रिटर्न दाखिल किया था. इसके बावजूद खाते में बदलाव हो चुके थे.

24 फरवरी को जब उन्होंने दोबारा लॉगिन करने का प्रयास किया, तो पोर्टल पर ‘Invalid Username or Password’ का संदेश दिखाई दिया. वह अपने ई-वे बिल पोर्टल खाते तक भी पहुंच नहीं सके. इस घटनाक्रम ने उनके खाते के अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका को और मजबूत किया.

शिकायत के बाद खुला करोड़ों के फर्जी बिलों का मामला

व्यापारी ने 27 फरवरी 2026 को जीएसटी शिकायत पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद उन्होंने भोपाल स्थित जीएसटी कार्यालय पहुंचकर अपनी आईडी और पासवर्ड दोबारा अपडेट कराया. खाता खुलने पर उन्हें पता चला कि फरवरी 2026 का GSTR-1 रिटर्न पहले ही दाखिल किया जा चुका है.

इस रिटर्न में कुल 989 इनवॉइस अपलोड थे, जिनका संयुक्त मूल्य 8,09,81,305 रुपये था. व्यापारी ने इन बिलों से किसी भी तरह का कारोबारी संबंध होने से इनकार किया. जांच में पाया गया कि इनवॉइस राजगढ़ जिले और भोपाल की सात फर्मों के नाम पर दर्शाए गए थे. शिकायतकर्ता की फर्म ने ये बिल जारी नहीं किए थे और संबंधित फर्मों के साथ उसका कोई वास्तविक कारोबार भी सामने नहीं आया.

इस तरह व्यापारी के जीएसटी पहचान नंबर यानी GSTIN का इस्तेमाल कथित तौर पर ऐसे लेन-देन दिखाने के लिए किया गया, जिनसे उसका वास्तविक संबंध नहीं था. मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया कि किसी कारोबारी की डिजिटल पहचान का दुरुपयोग किस तरह उसे कर संबंधी परेशानी और संभावित देनदारी के जोखिम में डाल सकता है.

ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर बने जांच की अहम कड़ी

मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW ने केंद्रीय जीएसटी, राज्य कर विभाग और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) से जानकारी एवं दस्तावेज जुटाए. जिन फर्मों के नाम पर इनवॉइस बनाए गए थे, उन्हें भी पत्र भेजे गए. इसके अलावा ई-मेल आईडी के संबंध में गूगल इंडिया से जानकारी ली गई और मोबाइल कंपनियों से कनेक्शन के ग्राहक आवेदन प्रपत्र यानी CAF तथा संबंधित विवरण प्राप्त किए गए. शिकायतकर्ता के अलावा दो अन्य व्यापारियों के बयान भी दर्ज किए गए.

जांच के दौरान सामने आया कि व्यापारी के जीएसटी खाते में उनकी जानकारी और अनुमति के बिना दो अन्य ई-मेल आईडी तथा एक अतिरिक्त मोबाइल नंबर जोड़ा गया था. जीएसटी पंजीकरण के समय व्यापारी ने अपना निजी मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज कराई थी. बाद में जोड़े गए संपर्क विवरणों से उनका कोई संबंध नहीं मिला.

EOW के अनुसार, गूगल इंडिया से मिली जानकारी में एक ई-मेल आईडी से दो मोबाइल नंबर जुड़े पाए गए. मोबाइल कंपनियों के रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से एक नंबर आरोपी बसंत कुमार श्रीवास्तव के नाम पर जारी था. दूसरा नंबर बिहार के एक अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज था, लेकिन जांच में उसका इस्तेमाल भी आरोपी द्वारा किए जाने की बात सामने आई.

आरोपी की फर्म के जीएसटी पंजीकरण में भी मिली वही ई-मेल

जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी तब सामने आई, जब कथित रूप से इस्तेमाल की गई ई-मेल आईडी आरोपी की अपनी फर्म सिद्धि एंटरप्राइजेस के जीएसटी पंजीकरण में भी दर्ज पाई गई. EOW की जांच के अनुसार, इसी ई-मेल के माध्यम से भोपाल के व्यापारी के जीएसटी खाते में अनधिकृत लॉगिन कर फर्जी इनवॉइस अपलोड किए गए थे.

एक ही ई-मेल आईडी का दोनों जीएसटी खातों में दर्ज होना जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण तथ्य बना. हालांकि, इस मामले में आरोपी और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष विवेचना पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

दूसरे कारोबारियों के खातों में भी फर्जी क्रेडिट नोट का आरोप

EOW की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पर दिल्ली से बैठकर अन्य फर्मों के जीएसटी खातों में फर्जी क्रेडिट नोट अपलोड करने और उनके आधार पर अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाने से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

प्रेस ब्रीफ के मुताबिक, राजगढ़ जिले के पचोर की एक फर्म के संचालक ने अपने बयान में बताया कि उनकी फर्म में भी सिद्धि एंटरप्राइजेस के नाम से इसी प्रकार क्रेडिट नोट अपलोड किए गए थे. इस जानकारी के बाद जांच का दायरा केवल भोपाल के व्यापारी के खाते तक सीमित नहीं रहा. अब अन्य फर्मों के जीएसटी खातों में हुए संभावित अनधिकृत लेन-देन और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी.

फर्जी इनवॉइस से सरकारी खजाने और कारोबारियों दोनों को खतरा

फर्जी इनवॉइस का प्रभाव केवल कागजी लेन-देन तक सीमित नहीं रहता. ऐसे बिलों के आधार पर कोई फर्म इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकती है, जबकि वास्तविकता में न माल की आपूर्ति हुई हो और न ही उसके अनुरूप कर जमा किया गया हो. इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है.

दूसरी ओर, जिस कारोबारी के GSTIN का दुरुपयोग किया जाता है, उसे भी अनावश्यक कर संबंधी विवाद, नोटिस और संभावित देनदारी का सामना करना पड़ सकता है. यही कारण है कि जीएसटी खातों की सुरक्षा, पंजीकृत संपर्क विवरणों की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

BNS और IT एक्ट की धाराओं में FIR, विवेचना शुरू

EOW ने उपलब्ध जांच तथ्यों के आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर एवं अन्य के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 62 और 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C और 66-D के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया है.

अब जांच एजेंसी उन फर्मों की भूमिका भी देखेगी, जिन्हें इनवॉइस से लाभ मिलने की आशंका है. इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा जीएसटी खातों तक अनधिकृत पहुंच बनाकर वित्तीय लाभ लेने की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित की गई.

मामले में फिलहाल विवेचना जारी है. प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है; आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-