छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच बनाने की मांग, जबलपुर जाने को मजबूर कर्मचारी, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच बनाने की मांग, जबलपुर जाने को मजबूर कर्मचारी, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

प्रेषित समय :19:02:05 PM / Fri, Oct 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की स्थायी बेंच बनाने की मांग पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी का शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है.

इसके अलावा कोर्ट ने स्थायी बेंच बनाने के लिए उठाए गए कदमों और मौजूदा स्थिति की जानकारी भी मांगी है. दरअसल, याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच नहीं होने से सरकारी कर्मचारियों और दूसरे पक्षकारों को परेशानी होती है. बिलासपुर में इसकी सर्किट बेंच सीमित समय के लिए चलती है. इस वजह से आवेदन जमा करने, दस्तावेजों की गलतियां सुधारने और दूसरी प्रक्रियाओं के लिए पक्षकारों को जबलपुर जाना पड़ता है. इससे उनका समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं.

साल में 5 बार ही बिलासपुर आती है सर्किट बेंच

याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की ओर से अधिवक्ता बीपी राव, विकास बाजपेयी, अरविंद सिन्हा और पूजा सिन्हा ने पक्ष रखा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित कैट की मुख्य बेंच की सर्किट बेंच साल में 5 बार बिलासपुर आती है. हर बार यह एक सप्ताह तक काम करती है. सीमित समय तक सुनवाई होने के कारण पक्षकारों को कई प्रक्रियाओं के लिए जबलपुर जाना पड़ता है. इसके बाद मामलों की ऑनलाइन सुनवाई होती है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस व्यवस्था से छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और उनके वकीलों को परेशानी होती है.

कैट भवन के लिए जमीन आवंटित, फिर भी छोटे कमरे में चल रही बेंच

याचिका में बताया गया कि बिलासपुर में कैट भवन के लिए जमीन आवंटित की जा चुकी है. इसके बावजूद सर्किट बेंच जिला उपभोक्ता फोरम के पहले तल पर स्थित एक छोटे कमरे में चल रही है. फोरम की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच बनने से पक्षकारों को बार-बार जबलपुर नहीं जाना पड़ेगा. इससे न्यायिक प्रक्रिया आसान होगी और प्रशासनिक मामलों की सुनवाई के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-