चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा में पेड़ों की कटाई और घटते हरित क्षेत्र पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर वन क्षेत्र बढ़ाने की ठोस नीति तैयार करने का निर्देश दिया.
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मुख्य सचिवों से 28 अक्टूबर तक शपथपत्र दाखिल करने को कहा है. अदालत ने कहा कि पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के गंभीर परिणाम आम जनता को भुगतने पड़ रहे हैं. भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में वन एवं वृक्ष आवरण कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3.67 प्रतिशत और हरियाणा में 3.65 प्रतिशत है. राष्ट्रीय औसत 25.17 प्रतिशत है. राष्ट्रीय वन नीति, 1988 में कुल भौगोलिक क्षेत्र के 33 प्रतिशत हिस्से पर वन एवं वृक्ष आवरण का लक्ष्य रखा गया है.
हाईकोर्ट ने कहा कि नीति में पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण और जीवित रहने की व्यवस्था भी होनी चाहिए. इसमें पौधारोपण के लिए अतिरिक्त भूमि की पहचान करने और ग्राम पंचायतों तथा अन्य सार्वजनिक संस्थाओं के पास उपलब्ध जमीन का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसी भूमि का एक निश्चित हिस्सा पौधारोपण के लिए आरक्षित करने पर भी विचार करने को कहा गया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल भी नीति का हिस्सा होनी चाहिए.
यह मामला वर्ष 2025 से हाईकोर्ट में लंबित है. पेड़ों की लगातार कटाई पर चिंता जताते हुए अदालत ने हरियाणा और पंजाब में विभिन्न परियोजनाओं के लिए पेड़ काटने पर रोक लगाई थी. इसके बाद पेड़ काटने की अनुमति के लिए सरकारी और निजी एजेंसियों के कई आवेदन अदालत में आए हैं.
रक्षा परियोजनाओं के लिए 8000 पेड़ काटने की मंजूरी
हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा में 15 रक्षा स्थलों पर बुनियादी ढांचे के विस्तार और निर्माण के लिए 8000 पेड़ काटने की अनुमति दी है. यह मंजूरी रक्षा अधिकारियों के शपथपत्रों और आश्वासनों का कड़ाई से पालन करने की शर्त पर दी गई है. अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ के बदले उसी परिसर में कम से कम पांच गुना पौधे लगाए जाएंगे. संबंधित इकाई कम से कम दस वर्ष तक उनका संरक्षण और रखरखाव करेगी. नियमित पानी देने, बाड़ और ट्री गार्ड लगाने तथा सूखने वाले पौधों की जगह नए पौधे लगाने की व्यवस्था भी करनी होगी. आश्वासनों का उल्लंघन होने पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है. नए प्रभारी अधिकारी को भी अदालत में दिए गए आश्वासनों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

