नई दिल्ली. पंजाब की सियासत में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साढ़ू अमरदीप सिंह ग्रेवाल को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हिरासत में ले लिया. ग्रेवाल को मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित 5 करोड़ रुपये के रिश्वत और केस रफा-दफा कराने के मामले में पूछताछ के लिए पकड़ा गया है.
उनके खिलाफ पहले से जारी लुकआउट सर्कुलर के आधार पर एयरपोर्ट सुरक्षा और केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया, जिसके बाद उन्हें सीधे ईडी मुख्यालय ले जाया गया. अमरदीप ग्रेवाल पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं और उनका संबंध ईस्ट सनशाइन प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड से बताया जा रहा है. हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
मोहाली में दर्ज रेप केस को दबाने के लिए 5 करोड़ मांगने का आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ मोहाली के सोहाना थाने में 1 मई को दर्ज हुई एक गंभीर एफआईआर से जुड़ी है. एक 26 वर्षीय महिला की शिकायत पर गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल के खिलाफ बलात्कार, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने जैसी संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया था. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब आरोप लगे कि दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने और पूरे केस को रफा-दफा करने के लिए 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी जा रही थी. इस कथित सौदेबाजी में अमरदीप सिंह ग्रेवाल की संलिप्तता का नाम उभरकर सामने आया.
याचिकाओं में बिचौलिए की भूमिका और राजनीतिक प्रभाव के आरोप
अमरदीप सिंह ग्रेवाल का नाम तब सार्वजनिक रूप से चर्चा में आया जब पीडि़ता के पिता और आरोपी गुरी चहल के करीबी दोस्त सिमरनजीत सिंह हुंदल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि ग्रेवाल के मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर से करीबी पारिवारिक ताल्लुकात हैं और वह राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर रेप केस को खत्म कराने के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध मांग कर रहे थे. याचिकाओं के अनुसार, ग्रेवाल कथित तौर पर आरोपी पक्ष और सत्ता के शीर्ष रसूख के बीच बिचौलिए की भूमिका निभा रहे थे.
हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस से छीनी थी जांच, स्पेशल ष्ठत्रक्क को सौंपी निगरानी
पीडि़ता के पिता ने अदालत में गुहार लगाई थी कि स्थानीय पुलिस पर राजनीतिक दबाव है, इसलिए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 जुलाई को अहम फैसला सुनाते हुए केस की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर स्पेशल डीजीपी की सीधी निगरानी में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया था. अदालत ने अपने आदेश में 5 करोड़ रुपये की कथित मांग और मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े संदर्भों का उल्लेख किया था, हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि आरोपों की अंतिम सत्यता जांच के निष्कर्षों पर ही निर्भर करेगी.
रिटायर्ड जज के खुलासे और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद सियासत गरमाई
यह मामला उस समय और गरमा गया जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रणजीत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं और 5 करोड़ की कथित रिश्वतखोरी के आरोपों का जिक्र किया. इसके तुरंत बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा सहित अन्य दलों ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर को सीधे घेरे में ले लिया. दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी और डॉ. गुरप्रीत कौर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सरकार की छवि धूमिल करने की सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

