Navratri Vrat Recipes 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ बड़ी संख्या में लोग उपवास भी रखते हैं। ऐसे में हर दिन फलाहार में क्या बनाया जाए, यह एक आम सवाल होता है। रोजाना फल, दूध या एक जैसी डिश खाने के बजाय कुछ नई रेसिपीज आजमाई जा सकती हैं। साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा और समा के चावल जैसी सामग्री से कई स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। यहां जानिए 10 ऐसी फलाहारी रेसिपीज, जिन्हें आप अपनी पसंद और व्रत के नियमों के अनुसार घर पर बना सकते हैं।
1. साबूदाना खिचड़ी
साबूदाना खिचड़ी व्रत के दौरान नाश्ते या दोपहर के भोजन के लिए पसंद की जाने वाली डिश है। मूंगफली और आलू के साथ तैयार होने वाली यह खिचड़ी स्वादिष्ट होने के साथ ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट भी प्रदान करती है।
सामग्री
- साबूदाना – 1 कप
- उबला या कटा आलू – 1 मध्यम आकार का
- भुनी हुई मूंगफली – आधा कप
- घी – 1 से 2 बड़े चम्मच
- जीरा – आधा छोटा चम्मच
- हरी मिर्च – 1 से 2
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- काली मिर्च – आधा छोटा चम्मच
- नींबू का रस और हरा धनिया – आवश्यकतानुसार
विधि
- साबूदाने को धोकर पर्याप्त समय तक भिगोएं। पानी निकालने के बाद इसे कुछ देर अलग रखें, ताकि दाने अच्छी तरह नरम हो जाएं।
- मूंगफली को भूनकर दरदरा पीस लें। आलू को छोटे टुकड़ों में काट लें।
- कड़ाही में घी गर्म करके जीरा और हरी मिर्च डालें। इसके बाद आलू डालकर पकाएं।
- अब साबूदाना, मूंगफली, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं।
- धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं। साबूदाने के दाने पारदर्शी होने लगें तो गैस बंद कर दें।
- ऊपर से नींबू का रस और हरा धनिया डालकर गर्मागर्म परोसें।
2. साबूदाने की खीर
व्रत में मीठा खाने की इच्छा हो तो साबूदाने की खीर अच्छा विकल्प हो सकती है। दूध, इलायची और मेवों से बनने वाली यह मिठाई त्योहार के मेन्यू में शामिल की जा सकती है।
सामग्री
- साबूदाना – आधा कप
- दूध – 1 लीटर
- चीनी – स्वादानुसार
- काजू, बादाम और पिस्ता – 2 से 3 बड़े चम्मच
- इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
- केसर – कुछ धागे, वैकल्पिक
विधि
- साबूदाने को धोकर लगभग 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगो दें। बड़े दानों के लिए अधिक समय लग सकता है।
- एक भारी तले वाले बर्तन में दूध गर्म करें और उबाल आने दें।
- इसमें भीगा हुआ साबूदाना डालकर धीमी आंच पर पकाएं। बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि खीर बर्तन में चिपके नहीं।
- जब साबूदाना नरम हो जाए और खीर गाढ़ी होने लगे, तब चीनी मिलाएं।
- इलायची पाउडर, केसर और कटे हुए मेवे डालकर कुछ मिनट और पकाएं।
- खीर तैयार होने पर गर्म या ठंडी, अपनी पसंद के अनुसार परोसें।
3. समा के चावल का ढोकला
व्रत में रोजाना तली हुई चीजें खाने के बजाय भाप में पका व्यंजन भी मेन्यू में शामिल किया जा सकता है। समा के चावल और राजगिरा आटे से तैयार ढोकला नाश्ते के लिए एक अलग विकल्प है।
सामग्री
- समा के चावल – 1 कप
- राजगिरा आटा – आधा कप
- सिंघाड़े का आटा – आधा कप
- दही – आधा कप
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- ईनो या खाने वाला सोडा – उपयुक्त मात्रा में, वैकल्पिक
- जीरा – आधा छोटा चम्मच
- घी – 1 छोटा चम्मच
- हरा धनिया – सजावट के लिए
विधि
- समा के चावल को साफ करके लगभग 2 घंटे पानी में भिगो दें।
- पानी निकालकर चावल को दरदरा या बारीक पीस लें।
- एक बर्तन में पिसे चावल, राजगिरा आटा, सिंघाड़े का आटा और फेंटा हुआ दही मिलाएं।
- जरूरत के अनुसार पानी डालकर गाढ़ा घोल बनाएं। सेंधा नमक और पकाने से ठीक पहले सोडा या ईनो मिलाएं।
- मिश्रण को चिकनाई लगे बर्तन में डालकर स्टीमर में पकाएं। चाकू डालकर जांचें कि ढोकला अंदर तक पक गया है या नहीं।
- ठंडा होने पर टुकड़े काटें। घी में जीरा तड़काकर ऊपर डालें और हरे धनिए से सजाएं।
4. लौकी के पकौड़े
लौकी से तैयार पकौड़े व्रत के दौरान शाम के नाश्ते के लिए बनाए जा सकते हैं। लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए घोल बनाते समय अतिरिक्त पानी डालने की जरूरत आमतौर पर नहीं पड़ती।
सामग्री
- लौकी – 250 ग्राम
- सिंघाड़े का आटा – लगभग 1 कप
- अदरक का पेस्ट – 1 छोटा चम्मच
- हरी मिर्च – 1 से 2
- जीरा – आधा छोटा चम्मच
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- हरा धनिया – थोड़ा सा
- तलने के लिए घी या तेल – आवश्यकतानुसार
विधि
- लौकी को धोकर छीलें और कद्दूकस कर लें।
- इसमें सिंघाड़े का आटा, अदरक, हरी मिर्च, जीरा, नमक और कटा हरा धनिया मिलाएं।
- मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर गाढ़ा रखें। यदि लौकी बहुत पानी छोड़ती है, तो जरूरत के अनुसार आटा बढ़ाएं।
- कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और मिश्रण के छोटे-छोटे हिस्से डालें।
- मध्यम आंच पर पकौड़ों को सुनहरा और अच्छी तरह पकने तक तलें।
- इन्हें दही या व्रत में स्वीकार्य चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।
5. राजगिरा और साबूदाने का फलाहारी डोसा
डोसा पसंद करने वालों के लिए यह रेसिपी पारंपरिक चावल-दाल वाले डोसे से अलग है। इसमें राजगिरा आटा और साबूदाना इस्तेमाल किया जाता है, जबकि भरावन के लिए आलू लिए जा सकते हैं।
सामग्री
- साबूदाना – 1 कप
- राजगिरा आटा – आधा कप
- दही – 2 बड़े चम्मच
- उबले आलू – 3 से 4 मध्यम आकार के
- जीरा – आधा छोटा चम्मच
- हरी मिर्च – 1
- सेंधा नमक और काली मिर्च – स्वादानुसार
- नींबू का रस और हरा धनिया – आवश्यकतानुसार
- घी – सेंकने के लिए
विधि
- साबूदाने को धोकर कुछ घंटों के लिए भिगो दें। पानी निकालकर इसे मिक्सर में पीस लें।
- पिसे साबूदाने में राजगिरा आटा, दही और सेंधा नमक मिलाएं। जरूरत के अनुसार पानी डालकर फैलाने योग्य घोल तैयार करें।
- आलू को मैश करें। एक कड़ाही में थोड़ा घी गर्म करके जीरा और हरी मिर्च डालें।
- इसमें आलू, नमक और काली मिर्च मिलाकर कुछ मिनट पकाएं। अंत में नींबू का रस और हरा धनिया डालें।
- गर्म तवे पर थोड़ा घी लगाकर घोल फैलाएं। मध्यम आंच पर दोनों तरफ से अच्छी तरह सेंकें।
- तैयार डोसे में आलू का मिश्रण भरकर मोड़ें और गर्मागर्म परोसें।
6. नारियल की ग्रेवी में आलू-पनीर कोफ्ते
व्रत के खास भोजन में आलू और पनीर से बने कोफ्ते शामिल किए जा सकते हैं। नारियल और दूध की ग्रेवी इस डिश को मलाईदार स्वाद देती है।
सामग्री
कोफ्तों के लिए:
- उबले आलू – 3 से 4 मध्यम आकार के
- पनीर – 100 ग्राम
- सिंघाड़े का आटा – 3 से 4 बड़े चम्मच
- हरी मिर्च – 1
- हरा धनिया – थोड़ा सा
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- राजगिरा आटा – कोफ्तों पर लगाने के लिए
- तलने या सेंकने के लिए घी – आवश्यकतानुसार
ग्रेवी के लिए:
- टमाटर – 3 से 4
- कद्दूकस किया नारियल – आधा कप
- दूध – आधा कप
- जीरा – आधा छोटा चम्मच
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- चीनी – वैकल्पिक
- घी – 1 से 2 बड़े चम्मच
विधि
- उबले आलू को मैश करें और उसमें कद्दूकस किया पनीर, सिंघाड़े का आटा, हरी मिर्च, धनिया और सेंधा नमक मिलाएं।
- मिश्रण से छोटे गोले बनाकर उन पर राजगिरा आटा लगाएं।
- कोफ्तों को गर्म घी में सुनहरा होने तक तलें या कम तेल में अच्छी तरह सेंक लें।
- टमाटर की प्यूरी तैयार करें। कड़ाही में घी गर्म करके जीरा डालें और फिर टमाटर की प्यूरी को अच्छी तरह पकाएं।
- इसमें नारियल और दूध डालकर धीमी आंच पर ग्रेवी तैयार करें। जरूरत के अनुसार नमक मिलाएं।
- परोसने से ठीक पहले कोफ्ते ग्रेवी में डालें, ताकि उनका आकार बना रहे। हरे धनिए से सजाकर परोसें।
7. राजगिरा-सिंघाड़े की नमकीन पूरी
अगर व्रत में पारंपरिक पूरी जैसा स्वाद चाहिए, तो राजगिरा और सिंघाड़े के आटे से नमकीन पूरी तैयार की जा सकती है। मूंगफली मिलाने से इसमें अतिरिक्त स्वाद और कुरकुरापन आता है।
सामग्री
- राजगिरा आटा – 2 कप
- सिंघाड़े का आटा – आधा कप
- भुनी मूंगफली – आधा कप
- हरी मिर्च – 2
- जीरा या दरदरी पिसी सौंफ – आधा छोटा चम्मच
- हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- घी या तेल – आटा गूंथने और तलने के लिए
विधि
- मूंगफली को भूनकर दरदरा पीस लें।
- राजगिरा और सिंघाड़े के आटे को एक बर्तन में मिलाएं। इसमें मूंगफली, हरी मिर्च, जीरा या सौंफ, धनिया और सेंधा नमक डालें।
- थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटा गूंथें। आटा बहुत सूखा लगे तो थोड़ी चिकनाई मिलाएं।
- आटे की छोटी लोइयां बनाएं। आटा टूटता हो तो उसे दो खाद्य-ग्रेड प्लास्टिक शीट या बटर पेपर के बीच रखकर सावधानी से फैलाएं।
- कड़ाही में घी या तेल गर्म करें और पूरियों को मध्यम आंच पर अच्छी तरह पकाएं।
- दही या फलाहारी चटनी के साथ परोसें।
8. कच्चे केले के फलाहारी बड़े
कच्चे केले से बनने वाले बड़े व्रत के नाश्ते में कुछ नया जोड़ सकते हैं। इनमें आलू और मूंगफली की भरावन इस्तेमाल की जाती है और बाहर से कुट्टू के आटे की परत लगाई जाती है।
सामग्री
- कच्चे केले – 3
- उबले आलू – 2 मध्यम आकार के
- कुट्टू का आटा – 1 कप
- भुनी मूंगफली – आधा कप
- हरी मिर्च – 1 से 2
- हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- पानी – आवश्यकतानुसार
- तलने के लिए घी या तेल – आवश्यकतानुसार
विधि
- कच्चे केले को अच्छी तरह धोकर उबालें। ठंडा होने पर छीलकर मैश कर लें।
- एक अलग बर्तन में उबले आलू मैश करें। इसमें दरदरी पिसी मूंगफली, हरी मिर्च, हरा धनिया और सेंधा नमक मिलाएं।
- आलू के मिश्रण से छोटे गोले बना लें।
- कुट्टू के आटे में थोड़ा नमक और पानी मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें।
- आलू के गोलों को मैश किए केले में लपेटकर या केले के मिश्रण के साथ आकार देकर कुट्टू के घोल की परत लगाएं।
- गर्म तेल में मध्यम आंच पर सुनहरा और अच्छी तरह पकने तक तलें। फलाहारी चटनी के साथ परोसें।
9. समा के चावल की भरवां कचौरी
व्रत के दौरान चटपटा खाने का मन हो, तो समा के चावल और आलू की भरावन से कचौरी बनाई जा सकती है। बाहर की परत के लिए राजगिरा और सिंघाड़े के आटे का उपयोग किया जा सकता है।
सामग्री
भरावन के लिए:
- समा के चावल – 1 कप
- उबले आलू – 2 से 3
- जीरा – आधा छोटा चम्मच
- हरी मिर्च – 1 से 2
- अदरक – 1 छोटा चम्मच, वैकल्पिक
- काली मिर्च – स्वादानुसार
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- हरा धनिया – थोड़ा सा
बाहरी परत के लिए:
- राजगिरा आटा – 1 कप
- सिंघाड़े का आटा – आधा कप
- घी – 1 छोटा चम्मच
- पानी और सेंधा नमक – आवश्यकतानुसार
- तलने के लिए घी या तेल – आवश्यकतानुसार
विधि
- समा के चावल को धोकर 2 घंटे भिगोएं। पानी निकालकर दरदरा पीस लें।
- कड़ाही में थोड़ा घी गर्म करें और जीरा व हरी मिर्च डालें।
- पिसे समा के चावल को डालकर धीमी आंच पर पकाएं। इसमें मैश किए आलू, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाएं।
- मिश्रण सूखने और एक साथ आने लगे तो गैस बंद कर दें। हरा धनिया मिलाकर भरावन को ठंडा करें।
- राजगिरा और सिंघाड़े के आटे में थोड़ा घी, नमक और पानी मिलाकर गूंथें। ध्यान रखें कि इन आटों से पूरी बेलना कठिन हो सकता है, इसलिए छोटी लोइयों को दो शीट के बीच सावधानी से फैलाएं।
- बीच में भरावन रखकर किनारों को बंद करें और कचौरी का आकार दें।
- गर्म तेल में मध्यम से धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाएं। दही या व्रत में स्वीकार्य चटनी के साथ परोसें।
10. अरबी की फलाहारी कढ़ी
व्रत के भोजन में बदलाव लाने के लिए अरबी की कढ़ी बनाई जा सकती है। दही और मसालों से तैयार इसकी ग्रेवी को अरबी के साथ पकाया जाता है। इसे फलाहारी रोटी या पराठे के साथ परोसा जा सकता है, बशर्ते उनकी सामग्री व्रत के अनुकूल हो।
सामग्री
- अरबी – 200 से 250 ग्राम
- दही – आधा कप
- पानी – 1 से 2 कप
- घी – 1 से 2 बड़े चम्मच
- अजवाइन – आधा छोटा चम्मच
- कद्दूकस किया अदरक – 1 छोटा चम्मच
- काली मिर्च – स्वादानुसार
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- हरा धनिया – सजावट के लिए
विधि
- अरबी को धोकर उबालें। ठंडा होने पर छीलकर टुकड़ों में काट लें।
- दही को अच्छी तरह फेंटकर अलग रखें, ताकि पकाते समय उसमें गांठें न बनें।
- कड़ाही में घी गर्म करें और अजवाइन डालें। खुशबू आने पर अदरक मिलाएं।
- आंच धीमी करके फेंटा हुआ दही डालें और लगातार चलाते रहें।
- अब अरबी, सेंधा नमक और काली मिर्च डालें। जरूरत के अनुसार पानी मिलाएं।
- धीमी से मध्यम आंच पर लगभग 10 से 15 मिनट पकाएं, जब तक ग्रेवी अच्छी तरह तैयार न हो जाए।
- हरे धनिए से सजाकर गर्मागर्म परोसें।
नवरात्रि व्रत में खानपान को कैसे रखें संतुलित?
नवरात्रि में व्रत रखते समय भोजन में विविधता के साथ संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। साबूदाना, आलू और अन्य स्टार्चयुक्त सामग्री के साथ दूध, दही, पनीर और मेवे जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। तली हुई चीजों को रोजाना खाने के बजाय भाप में पके, उबले या कम तेल में तैयार व्यंजन भी चुनें।
दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें। उपवास के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए सामग्री चुनते समय उनका ध्यान रखें। यदि आपको मधुमेह, किडनी संबंधी समस्या या कोई अन्य स्वास्थ्य स्थिति है, तो उपवास और खानपान के बारे में चिकित्सकीय सलाह लेना उचित होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य खानपान संबंधी जानकारी के लिए है। सभी रेसिपीज में सामग्री और मसाले अपने व्रत के नियमों के अनुसार चुनें।
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