जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर में सहकारिता विभाग की वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक हेमलता डोंगर (हिडाऊ) के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की गई और बाद में पदोन्नति का लाभ भी लिया गया. मामले की शिकायत मुख्य सचिव और सहकारिता आयुक्त से किए जाने के बाद जांच शुरू हो गई है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रकरण की जांच भोपाल स्तर पर छानबीन समिति कर रही है. अब इस मामले में संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी लेने का आरोप
शिकायत के अनुसार, हेमलता डोंगर (हिडाऊ) ने अनुसूचित जनजाति वर्ग का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सहकारिता विभाग में नियुक्ति प्राप्त की थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें पदोन्नति का लाभ भी मिला. मामले में शिकायत किए जाने के बाद संबंधित दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर जांच शुरू की गई है.
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही सामने आएगा.
पिता के जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी सवाल
शिकायत में हेमलता डोंगर के पिता नेमाजी हिडाऊ के जाति प्रमाण पत्र का भी उल्लेख किया गया है. आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1960 में हल्बा अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) में नौकरी हासिल की थी.
वहीं, शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि छिंदवाड़ा कलेक्टर की जांच में उनकी जाति कोष्टी, अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में सामने आई थी. इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने हेमलता डोंगर के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए हैं. इन दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर होना बाकी है.
छिंदवाड़ा और जबलपुर के दस्तावेजों पर विवाद
इस मामले में दो जिलों के दस्तावेज चर्चा का विषय बने हुए हैं. शिकायतकर्ता के मुताबिक, सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी में छिंदवाड़ा और जबलपुर के संबंधित कार्यालयों में हेमलता डोंगर के नाम से जाति प्रमाण पत्र जारी होने की प्रविष्टि नहीं मिलने का दावा किया गया है.
शिकायत में वर्ष 1989 में छिंदवाड़ा से प्रमाण पत्र जारी होने और वर्ष 1998 में जबलपुर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय से नया प्रमाण पत्र बनवाए जाने संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं. अब जांच में इन दस्तावेजों की वास्तविकता, जारी होने की प्रक्रिया और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भोपाल स्तर पर चल रही जांच
जबलपुर सहकारिता विभाग के अधिकारी राकेश पांडे के अनुसार, संबंधित कर्मचारी के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी और पदोन्नति प्राप्त करने की शिकायत सामने आई है. मामले की जांच भोपाल स्तर पर छानबीन समिति कर रही है.
विभागीय स्तर पर यह भी कहा गया है कि शिकायत की जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल किसी अंतिम कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगा आगे का कदम
हेमलता डोंगर ने भी कहा है कि शिकायत की जांच छानबीन समिति कर रही है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. ऐसे में अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है.
यदि जांच में प्रमाण पत्र संबंधी अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार कार्रवाई पर निर्णय ले सकते हैं. फिलहाल मामला आरोपों और जांच के स्तर पर है. जाति प्रमाण पत्र की वैधता, दोनों जिलों के रिकॉर्ड और नियुक्ति-पदोन्नति से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

