बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को देश के अधिकांश हिस्सों में दशहरा का मुख्य पर्व बीत चुका होगा, लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी से जुड़े आयोजन जारी रहेंगे. बंगाल में विजयादशमी, मैसूर में दशहरा उत्सव की परंपराएं और काशी में भरत मिलाप जैसे आयोजन इस दिन के धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व को खास बनाते हैं. वहीं, पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि दोपहर तक रहेगी और इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी.
एकादशी तिथि आरंभ होने के बावजूद पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और आत्मसंयम से जुड़ा है. ऐसे में 21 अक्टूबर का दिन एक ओर विजयादशमी की क्षेत्रीय परंपराओं का साक्षी बनेगा, तो दूसरी ओर एकादशी व्रत की तैयारी के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा.
बुधवार का धार्मिक महत्व
बुधवार को परंपरागत रूप से भगवान गणेश और बुध ग्रह से जोड़कर देखा जाता है. भगवान गणेश की पूजा को विघ्नों के निवारण और शुभ कार्यों की शुरुआत से संबंधित माना जाता है. कई श्रद्धालु इस दिन गणेश पूजन, मंत्र-जप और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य करते हैं.
इस दिन का एक प्रमुख पक्ष दशहरा के बाद की धार्मिक परंपराएं हैं. अलग-अलग राज्यों में विजयादशमी का उत्सव स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है. इसलिए देशभर में पर्व की तारीख और अनुष्ठानों को समझते समय क्षेत्रीय परंपरा को ध्यान में रखना जरूरी है.
पापांकुशा एकादशी की तैयारी का दिन
आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है. इस वर्ष एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:11 से 2:12 बजे के आसपास शुरू होकर 22 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:47 बजे तक रहेगी. उदया तिथि की परंपरा के अनुसार व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. श्रद्धालु व्रत, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान और भगवान के नाम का स्मरण करते हैं.
एकादशी की तैयारी के लिए प्रमुख बातें
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व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार पूजा और भोजन की तैयारी करें.
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पूजा के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र तथा आवश्यक पूजन सामग्री व्यवस्थित रखें.
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व्रत के नियम परिवार और संप्रदाय की परंपरा के अनुसार अपनाएं.
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स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लें.
बंगाल में विजयादशमी और देश में क्षेत्रीय परंपराएं
उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई गई, जबकि बंगाल की परंपरा में 21 अक्टूबर को विजयादशमी से जुड़े अनुष्ठान होंगे. इस अवसर पर मां दुर्गा को विदाई देने, प्रतिमा विसर्जन और परिवार-समाज में शुभकामनाएं देने की परंपराएं निभाई जाती हैं.
मैसूर में दशहरा उत्सव की सांस्कृतिक परंपरा और काशी में भरत मिलाप जैसे आयोजन भी इस दिन के क्षेत्रीय महत्व को रेखांकित करते हैं. इन आयोजनों का स्वरूप स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.
आज का पंचांग 21 अक्टूबर 2026
दिन: बुधवार
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: दशमी दोपहर लगभग 2:12 बजे तक, इसके बाद एकादशी
नक्षत्र: धनिष्ठा शाम लगभग 7:47 बजे तक, इसके बाद शतभिषा
योग: गण्ड योग
करण: गरज दोपहर लगभग 2:12 बजे तक, इसके बाद वणिज
विक्रम संवत: 2083
ऋतु: शरद
चंद्र राशि: मकर राशि से आगे कुंभ राशि में प्रवेश का समय स्थान-आधारित गणना के अनुसार अलग हो सकता है.
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
जबलपुर की पंचांग गणना के अनुसार:
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:09 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 5:39 बजे
चंद्रोदय: दोपहर लगभग 2:32 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन मध्यरात्रि के बाद लगभग 1:23 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
जबलपुर के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:30 से 5:20 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह लगभग 11:31 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:15 से 6:03 बजे तक
प्रदोष काल: शाम लगभग 5:39 से 7:09 बजे तक
शुभ मुहूर्तों का उपयोग पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय परंपरा के अनुसार किया जा सकता है. किसी विशेष अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा.
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
जबलपुर के लिए उपलब्ध गणना के अनुसार:
राहुकाल: सुबह 11:54 बजे से दोपहर 1:21 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 7:35 से 9:02 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:28 से 11:54 बजे तक
परंपरागत ज्योतिष में इन अवधियों के दौरान नए शुभ कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है. यह धार्मिक मान्यता है; इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए.
आज के दिन का आध्यात्मिक संदेश
विजयादशमी का संदेश बुराई पर अच्छाई की विजय तक सीमित नहीं है. यह जीवन में अनुशासन, सत्य, संयम और जिम्मेदारी को अपनाने की प्रेरणा भी देता है. इसके बाद आने वाली पापांकुशा एकादशी की तैयारी आत्मचिंतन, संयम और सेवा के महत्व को याद दिलाती है.
इस दिन हम संकल्प ले सकते हैं कि अपने व्यवहार में विनम्रता रखें, जरूरतमंदों की सहायता करें और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएं. धार्मिक पर्वों का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होता है, जब उनके आदर्श हमारे रोजमर्रा के जीवन में भी दिखाई दें.
डिस्क्लेमर: पंचांग के समय जबलपुर की उपलब्ध गणना पर आधारित हैं. सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकते हैं. एकादशी व्रत और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग तथा अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें. ज्योतिषीय मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

