जबलपुर.साइबर ठग अब कारोबारियों को निशाना बनाने के लिए सेना और सरकारी संस्थानों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. जबलपुर में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां खुद को सेना का अधिकारी बताने वाले लोगों ने नैनो यूरिया खरीदने का ऑर्डर देकर एक उर्वरक-बीज व्यापारी से 54 हजार रुपये ठग लिए. आरोपितों ने पहले भुगतान होने का भरोसा दिलाया, फिर खाते में ज्यादा रकम आने का हवाला देकर पैसे लौटाने को कहा. व्यापारी ने भरोसा करके QR कोड के जरिए रकम ट्रांसफर कर दी, लेकिन बाद में पता चला कि उसके खाते में कोई भुगतान आया ही नहीं था.
विजयनगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. घटना कारोबारियों के लिए एक बार फिर चेतावनी है कि किसी ग्राहक की पहचान, भुगतान के संदेश और बैंक बैलेंस की पुष्टि किए बिना रकम वापस करना भारी पड़ सकता है.
सेना के नाम पर बनाया भरोसा
विकास नगर निवासी 30 वर्षीय प्रांशु अग्रवाल उर्वरक और बीज की दुकान चलाते हैं. उनकी शिकायत के मुताबिक, 8 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:37 बजे प्रदीप कांबले नाम के व्यक्ति ने फोन किया. उसने खुद को सेना से जुड़ा बताते हुए नैनो यूरिया के 96 नग का ऑर्डर दिया, जिसकी कीमत 21,600 रुपये बताई गई.
डिलीवरी 506 आर्मी बेस वर्कशॉप, खमरिया में देने को कहा गया. सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठान का नाम सामने आने से कारोबारी को ऑर्डर वास्तविक लगा. शाम करीब सात बजे जब वह सामग्री लेकर निर्धारित स्थान पर पहुंचा, तब भुगतान को लेकर आगे की बातचीत शुरू हुई.
फर्जी भुगतान संदेश से रचा गया पूरा खेल
शिकायत के अनुसार, इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन किया और खुद को कर्नल संजीव अरोड़ा बताया. उसने खाते का विवरण लेने के बाद भुगतान से जुड़े संदेश भेजे. व्यापारी को पहले 15,600 रुपये जमा होने का मैसेज मिला. इसके बाद 60 हजार रुपये आने का संदेश दिखाया गया.
फिर आरोपित ने दावा किया कि गलती से ज्यादा रकम ट्रांसफर हो गई है और अतिरिक्त 54 हजार रुपये तुरंत वापस करने होंगे. सेना के अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति पर भरोसा करके व्यापारी ने दिए गए QR कोड के माध्यम से दो बार में कुल 54 हजार रुपये भेज दिए.
खाते में रकम नहीं आई, वापस भेजे पैसे भी नहीं मिले
कुछ समय बाद व्यापारी ने अपना बैंक बैलेंस जांचा तो उसे न तो 60 हजार रुपये मिले और न ही 15,600 रुपये जमा होने का कोई वास्तविक रिकॉर्ड दिखाई दिया. शिकायत के मुताबिक, भुगतान से जुड़े संदेश भी गायब हो गए. जब उसने संबंधित मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो वे बंद मिले.
इसके बाद व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है. आरोपितों की पहचान और रकम के लेन-देन से संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है.
कारोबारियों को निशाना बनाने का नया तरीका
इस मामले में ठगी का तरीका गौर करने लायक है. आरोपितों ने सीधे पैसे मांगने के बजाय पहले एक व्यावसायिक ऑर्डर दिया, फिर सेना से जुड़ी पहचान का दावा करके भरोसा बनाया. इसके बाद फर्जी भुगतान संदेश के जरिए यह विश्वास पैदा किया कि व्यापारी के खाते में रकम आ चुकी है. अंत में अतिरिक्त भुगतान लौटाने का दबाव बनाया गया.
ऐसे मामलों में केवल मोबाइल पर आया मैसेज भुगतान का प्रमाण नहीं होता. ठग नकली संदेशों या भ्रामक स्क्रीनशॉट के जरिए पीड़ित को जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं. इसलिए वास्तविक बैंक खाते में रकम जमा होने की पुष्टि करना बेहद जरूरी है.
यदि किसी के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं. राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है.
जबलपुर का यह मामला बताता है कि साइबर ठग भरोसेमंद दिखने वाली पहचान और जल्दबाजी का इस्तेमाल कर कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं. किसी भी भुगतान को वास्तविक मानने से पहले बैंक खाते में उसकी पुष्टि करना ही सबसे महत्वपूर्ण बचाव है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

