ग्वालियर. विजयादशमी के अवसर पर ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की पुरानी परंपराओं की झलक देखने को मिली. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने मंगलवार को गोरखी स्थित देवघर में पूजा-अर्चना कर शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई. पारंपरिक शाही परिधान में पहुंचे पिता-पुत्र ने इसके बाद शहर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए और पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की.
देवघर से अम्मा महाराज की छत्री तक पहुंचे सिंधिया
विजयादशमी के कार्यक्रम की शुरुआत गोरखी स्थित देवघर में पूजा-अर्चना के साथ हुई. इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया अम्मा महाराज की छत्री पहुंचे. यहां उन्होंने भगवान चक्रधर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन किए.
इस दौरान उन्होंने अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया और माता माधवी राजे सिंधिया को श्रद्धासुमन अर्पित किए. इसके बाद वे कुलदेवी मांढरे की माता मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की.
दशहरा मैदान में शमी पूजन, लोगों को दी शुभकामनाएं
धार्मिक कार्यक्रमों के क्रम में सिंधिया ने दशहरा मैदान में शमी पूजन की परंपरा भी निभाई. पूजा के बाद उन्होंने शहरवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं.
उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व लोगों को अच्छाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. इस मौके पर पूजा स्थल पर सरदार परिवारों के बैठने के लिए अलग व्यवस्था की गई थी. शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ भाजपा कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे.
जयविलास पैलेस में राजपरिवार के प्रतीक चिह्नों का पूजन
विजयादशमी पर गोरखी स्थित देवघर में पूजा के साथ जयविलास पैलेस में राजपरिवार के प्रतीक चिह्नों का पूजन भी किया गया. सिंधिया परिवार की परंपरा के अनुसार शाम को महल में शाही दरबार आयोजित हुआ.
दरबार में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरदार परिवारों और शहर के प्रबुद्धजनों से मुलाकात की. इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को शमी की पत्तियां भेंट कर विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं. आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ राजपरिवार की ऐतिहासिक परंपराओं की झलक दिखाई दी.
हैरिटेज कार से पहुंचे, याद आई रियासतकालीन परंपरा
पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया हैरिटेज कार में पहुंचे. कार पर सिंधिया स्टेट का नंबर तीन अंकित था, जिसने रियासतकालीन इतिहास की यादें ताजा कर दीं.
बताया जाता है कि रियासत के समय सिंधिया राजपरिवार के मुखिया हाथी पर रखे चांदी के औहदे में बैठकर पूजन के लिए जाया करते थे. समय के साथ आयोजन के स्वरूप में बदलाव आया है, लेकिन विजयादशमी पर पूजा, शमी पूजन और शाही दरबार जैसी परंपराएं आज भी राजपरिवार की विरासत से जुड़ी हुई हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

