छत्तीसगढ़ में RSS के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तैयारी, दो संभागों में बंट सकता है प्रदेश

छत्तीसगढ़ में RSS के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तैयारी, दो संभागों में बंट सकता है प्रदेश

प्रेषित समय :16:09:19 PM / Wed, Oct 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) छत्तीसगढ़ में अपने संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी में है. संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 22 अक्टूबर से प्रदेश के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे. इस दौरान बिलासपुर में संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है. माना जा रहा है कि इस दौरे में प्रदेश को दो संगठनात्मक संभागों में विभाजित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है.

भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर पुनर्गठन की योजना

अब तक छत्तीसगढ़ में संघ का संगठन एक ही प्रांतीय इकाई के अंतर्गत संचालित होता रहा है. हालांकि, संगठनात्मक व्यवस्था में बदलाव और प्रदेश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए नई संरचना पर विचार किया जा रहा है. मैदानी इलाकों के साथ बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक संगठन की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है.

चर्चाओं के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में बिलासपुर और सरगुजा संभाग को एक इकाई में शामिल किया जा सकता है, जबकि रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग को दूसरी इकाई के अंतर्गत रखा जा सकता है. हालांकि, इस संभावित विभाजन को लेकर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है.

शाखाओं के विस्तार और संपर्क अभियान पर जोर

संघ की प्रस्तावित नई व्यवस्था में दूरस्थ क्षेत्रों तक संगठन की पहुंच मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है. खासकर बस्तर और सरगुजा के ग्रामीण तथा आदिवासी बहुल इलाकों में शाखाओं का विस्तार और स्थानीय स्तर पर संपर्क बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है.

संगठनात्मक जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण से क्षेत्रीय पदाधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार काम करने में सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे विभिन्न क्षेत्रों में चलने वाली गतिविधियों के समन्वय को भी बेहतर बनाया जा सकेगा.

युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर भी चर्चा

बिलासपुर में होने वाली बैठकों में संगठन के विस्तार के साथ युवाओं के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किए जाने की संभावना है. विशेष रूप से 40 वर्ष से कम आयु के लोगों को संगठन की गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है.

इसके अलावा, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने, आदिवासी क्षेत्रों में जनसंपर्क गतिविधियों को मजबूत करने और घर-घर तक वैचारिक साहित्य पहुंचाने जैसे अभियानों की समीक्षा भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है.

संगठन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर नजर

संघ के इस प्रस्तावित पुनर्गठन को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों के बेहतर संचालन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. हालांकि, संभागों के गठन, जिम्मेदारियों के बंटवारे और नई व्यवस्था को लागू करने से जुड़े अंतिम निर्णयों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.

डॉ. मोहन भागवत के प्रस्तावित प्रवास के दौरान होने वाली चर्चाओं के बाद संगठन की आगामी कार्ययोजना को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-