नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 21 अक्टूबर को चुनाव को लेकर अहम बात कही है. आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को निर्देश दिया कि वह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोपों की जांच करे और गुरुवार तक फैसला करे कि प्रभावित नगरपालिकाओं में नामांकन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं.
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्वाचन आयोग के फैसले तक चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी नहीं करने का आदेश दिया. पीठ ने कहा कि जहां भी नामांकन की समयसीमा बढ़ाई जाती है, वहां उम्मीदवारों को निर्वाचन आयोग के फैसले के प्रकाशन के बाद नामांकन दाखिल करने के लिए कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए. इसके लिए चुनाव अधिसूचना में आवश्यक संशोधन भी करना होगा. शिकायत मिलने और सबूत पेश करने के बाद अदालतें चुप नहीं रह सकती हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इसमें पुलिसकर्मियों की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था शामिल है. डीजीपी को इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी. अदालत ने संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को सुरक्षा मुहैया कराने तथा जरूरत पडऩे पर जिला मुख्यालयों में कलेक्टरों के माध्यम से नामांकन पत्र स्वीकार करने के निर्देश भी दिए.
अदालतें चुप नहीं रह सकतीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं. चुनाव लडऩे के लिए नामांकन दाखिल करने का अधिकार चुनावी प्रक्रिया का अभिन्न अंग है. अदालत ने कहा कि जब किसी प्रमुख विपक्षी दल की ओर से नामांकन दाखिल करने में बाधा डालने के आरोप लगाए जाते हैं और चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इस संबंध में शिकायतों के साथ साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो संवैधानिक अदालतें पूरी तरह चुप नहीं रह सकतीं.
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास पैदा करना संवैधानिक लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. अदालत ने निर्वाचन आयोग से वाईएसआरसीपी और अन्य उम्मीदवारों की शिकायतों का दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर गुण-दोष के अनुसार आकलन करने और पात्र उम्मीदवारों को चुनाव लडऩे का अवसर सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने को कहा. यह निर्देश वाईएसआरसीपी की उस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर दिए गए, जिसमें पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नामांकन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था.
ये है आरोप
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया था कि 16 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पुंगनूर, रायचोटी, कडपा और तिरुपति समेत कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया. याचिका के अनुसार, कडपा में एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति में कई उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के कक्षों में प्रवेश नहीं करने दिया गया. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन दाखिल करने जा रहे उसके कार्यकर्ताओं और सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी पर हमला किया गया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-


