हिसार. हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल का असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता दिखाई दिया. हिसार सर्कल के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. बिजली नहीं होने के कारण पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई. हालात से नाराज स्थानीय लोगों ने सब-स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया और मुख्य मार्ग जाम करने की चेतावनी दी.
यह हड़ताल गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में की जा रही है. कर्मचारियों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है. उधर, बिजली आपूर्ति बाधित होने से उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ गईं और विभागीय व्यवस्था पर भी दबाव देखने को मिला.
355 क्षेत्रों में बिजली संकट, शिकायतों का समाधान धीमा
रिपोर्ट के मुताबिक, हिसार सर्कल के करीब 355 क्षेत्रों में बिजली संकट का असर देखने को मिला. कुछ इलाकों में 24 घंटे तक आपूर्ति प्रभावित रहने की जानकारी सामने आई. इस दौरान कंट्रोल रूम में लगभग 2,100 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से रिपोर्ट के अनुसार केवल पांच का समाधान हो सका.
बिजली निगम के कर्मचारियों की बड़ी संख्या में अनुपस्थिति के कारण शिकायतों के निपटारे और आपूर्ति बहाल करने में मुश्किलें आईं. बिजली कटौती का असर घरों, दुकानों और दूसरी जरूरी सेवाओं पर भी पड़ा.
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन
गुरुवार सुबह करीब 8 बजे हिसार के विद्युत सदन स्थित अधीक्षण अभियंता (SE) कार्यालय में 450 से अधिक कर्मचारी और इंजीनियर एकत्र हुए. प्रदर्शन में एसई, एक्सईएन, एसडीओ और जेई समेत विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल बताए गए.
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स साझा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध किया. उनकी मांग है कि गुरुग्राम और नूंह से जुड़ा यह फैसला वापस लिया जाए.
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक करीब 97 प्रतिशत स्टाफ हड़ताल पर रहा. मोर्चा ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन आगे बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए 24 अक्टूबर को बैठक कर अगली रणनीति तय करने की बात कही गई.
कई घंटे बिजली गुल रहने से लोग सड़क पर उतरे
बिजली आपूर्ति बंद रहने से हिसार के सेक्टर-13 और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा बढ़ गया. स्थानीय निवासी जगदीश के मुताबिक, दोपहर करीब 12 बजे से रात 8:30 बजे तक बिजली नहीं आई.
इसका असर सेक्टर-13, सेक्टर-13 पार्ट-2 और सेक्टर-16-17 के निवासियों पर पड़ा. लोगों ने शिकायत की कि बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन पर जवाब नहीं मिला.
इसके बाद स्थानीय लोग सब-स्टेशन के बाहर जमा हो गए और बिजली निगम तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. स्थिति को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और सब-स्टेशन की सुरक्षा बढ़ाई गई. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि आपूर्ति बहाल नहीं होने पर मुख्य सड़क जाम की जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद बिजली बहाल कर दी गई.
कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी हुई प्रभावित
बिजली संकट का असर विभागीय कार्यालयों और कंट्रोल रूम पर भी पड़ा. रिपोर्ट के अनुसार, कंट्रोल रूम में बिजली नहीं होने से कामकाज प्रभावित हुआ. अस्थायी व्यवस्था तैयार करने में कर्मचारियों को करीब दो घंटे लगे, जिसके बाद कंप्यूटर कनेक्शन जोड़कर रिपोर्ट भेजने का काम शुरू किया जा सका.
विद्युत सदन में कुछ कार्यालयों के लिए जनरेटर भी मंगवाया गया, लेकिन उसे चलाने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका इस्तेमाल नहीं हो सका. इस स्थिति ने बिजली व्यवस्था के साथ-साथ शिकायतों के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों को भी सामने रखा.
बिजली कटौती से पानी की सप्लाई पर भी असर
लंबे समय तक बिजली नहीं रहने के कारण पानी की मोटरें नहीं चल सकीं. इससे शहरी और ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई. लोगों को घरेलू जरूरतों के लिए भी परेशान होना पड़ा.
प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में गैबीपुर, अग्रोहा-नंगथला, मंगाली, चौधरीवास, आर्य नगर, जमालपुर, मिर्चपुर, खरड़, अलीपुर, उमरा, बास, राजली और सदलपुर समेत कई स्थानों के नाम सामने आए.
शहर में नागोरी गेट, राजगुरु मार्केट, पुरानी सब्जी मंडी, सूर्य नगर, इंद्रा कॉलोनी, शांति नगर, आजाद नगर, पटेल नगर, जवाहर नगर, ऑटो मार्केट, पड़ाव चौक, मिल गेट, कैमरी रोड और सेक्टर-1 से 4 के आसपास बिजली संकट की शिकायतें मिलीं. नागरिक अस्पताल के आसपास के क्षेत्र में भी आपूर्ति प्रभावित होने की सूचना दी गई.
24 अक्टूबर की बैठक पर टिकी आंदोलन की अगली रणनीति
निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के मुद्दे पर सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है. कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं. दूसरी ओर, हड़ताल के कारण आम उपभोक्ताओं को बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है.
अब 24 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में आंदोलन की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है. बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखना, लंबित शिकायतों का निपटारा करना और कर्मचारियों के साथ गतिरोध दूर करना प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

