नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं. अब अपराधी केवल फर्जी संदेश या लिंक भेजकर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि परिचितों और परिवार के सदस्यों की आवाज की नकल करके भी पैसे ऐंठने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसी ठगी में किसी व्यक्ति को फोन कर यह बताया जाता है कि उसका बेटा, बेटी, भाई या कोई करीबी मुसीबत में है और उसे तुरंत पैसों की जरूरत है. आवाज परिचित लगने और कॉल में घबराहट भरी बातें सुनाई देने के कारण लोग जल्दबाजी में पैसे भेज सकते हैं.
23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में AI वॉयस क्लोनिंग से होने वाली ठगी के तरीकों और उससे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) ने नागरिकों को इस तरह के धोखाधड़ी वाले कॉल के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है. ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि घबराहट में निर्णय लेने के बजाय कॉल करने वाले की पहचान की पुष्टि की जाए.
क्या है AI वॉयस क्लोनिंग का पूरा खेल
AI वॉयस क्लोनिंग ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की आवाज के नमूनों का इस्तेमाल करके उससे मिलती-जुलती कृत्रिम आवाज तैयार की जा सकती है. साइबर अपराधी इस तकनीक का दुरुपयोग कर किसी परिचित या रिश्तेदार की आवाज जैसी ध्वनि पैदा करने की कोशिश करते हैं.
इसके बाद वे फोन करके कोई आपात स्थिति बताकर सामने वाले व्यक्ति पर तुरंत पैसे भेजने का दबाव बना सकते हैं. मसलन, कॉल पर कहा जा सकता है कि किसी का सड़क हादसा हो गया है, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है या वह पुलिस से जुड़े किसी मामले में फंस गया है. ऐसी परिस्थितियों का हवाला देकर पीड़ित को सोचने और तथ्यों की जांच करने का समय नहीं दिया जाता.
आवाज जानी-पहचानी लगने के कारण व्यक्ति को यह महसूस हो सकता है कि फोन वास्तव में उसके किसी करीबी ने किया है. इसी भरोसे और भावनात्मक दबाव का फायदा उठाकर ठगी करने की कोशिश की जाती है.
सोशल मीडिया से जुटाए जा सकते हैं आवाज के नमूने
रिपोर्ट के मुताबिक, आवाज की नकल तैयार करने के लिए अपराधियों को हमेशा किसी व्यक्ति का निजी डेटा हैक करने की जरूरत नहीं होती. सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो, रील और रिकॉर्डिंग से भी आवाज के नमूने जुटाए जा सकते हैं. इसके अलावा, निजी वॉयस नोट लीक होने या गलत हाथों में पहुंचने पर उनका भी दुरुपयोग किया जा सकता है.
इन ऑडियो नमूनों को AI टूल की मदद से प्रोसेस करके किसी व्यक्ति जैसी आवाज तैयार करने का प्रयास किया जा सकता है. इसके बाद इस आवाज का इस्तेमाल फोन कॉल पर किया जा सकता है. तकनीक की मदद से तैयार आवाज परिचित लग सकती है, लेकिन केवल आवाज सुनकर कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती.
यही कारण है कि सोशल मीडिया पर साझा किए जाने वाले व्यक्तिगत वीडियो और ऑडियो को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है. हालांकि, केवल आवाज का नमूना सार्वजनिक होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति के साथ निश्चित रूप से ठगी होगी. खतरा तब बढ़ता है, जब ऐसी सामग्री का इस्तेमाल धोखाधड़ी या किसी की पहचान की नकल करने के लिए किया जाता है.
फर्जी इमरजेंसी कॉल की पहचान कैसे करें
AI वॉयस क्लोनिंग से जुड़ी ठगी में अपराधी अक्सर जल्दबाजी और डर का माहौल बनाते हैं. इसलिए किसी भी कॉल में कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है.
तुरंत पैसे भेजने का दबाव: यदि फोन करने वाला कहता है कि बिना देर किए पैसे भेजें और किसी से बात न करें, तो सतर्क हो जाएं. जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय पहले जानकारी की पुष्टि करें.
हादसे या गिरफ्तारी की कहानी: सड़क दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने या पुलिस केस में फंसने जैसी आपात स्थितियों का हवाला देकर पैसे मांगे जा सकते हैं. ऐसी जानकारी को दूसरे माध्यम से सत्यापित करना जरूरी है.
पहचान की पुष्टि से बचना: यदि कॉल करने वाला सामान्य सवालों का जवाब देने से बचता है या आपको किसी दूसरे व्यक्ति से बात करने से रोकता है, तो संदेह करना उचित है.
गोपनीय जानकारी मांगना: किसी भी कॉल पर बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य सुरक्षा विवरण साझा नहीं करने चाहिए.
इन संकेतों में से कोई एक दिखने का मतलब यह नहीं कि कॉल निश्चित रूप से फर्जी है, लेकिन पैसे भेजने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है.
पैसे भेजने से पहले ऐसे करें पुष्टि
यदि किसी परिचित की आवाज में अचानक मदद मांगने वाला फोन आए, तो सबसे पहले शांत रहें. कॉल पर बताई गई बात को अंतिम सच न मानें और जल्दबाजी में किसी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें.
जिस व्यक्ति के मुसीबत में होने की बात कही जा रही है, उसके पहले से उपलब्ध और भरोसेमंद फोन नंबर पर अलग से कॉल करें. यदि वह फोन नहीं उठाता, तो परिवार के किसी दूसरे सदस्य या साझा परिचित से संपर्क करके स्थिति की पुष्टि करें.
कॉल करने वाले से ऐसी जानकारी पूछी जा सकती है, जिसे केवल वास्तविक परिचित ही जानता हो. हालांकि, व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर भी पहचान की पूरी गारंटी नहीं मिलती. इसलिए सबसे बेहतर तरीका स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करना है.
यदि कॉल पर किसी अस्पताल, पुलिस थाने या अन्य संस्था का हवाला दिया जाता है, तो उस संस्था के आधिकारिक संपर्क माध्यम से जानकारी सत्यापित करें. कॉल करने वाले द्वारा दिए गए नंबर या लिंक पर ही निर्भर न रहें.
बैंकिंग और निजी जानकारी को रखें सुरक्षित
AI आधारित ठगी से बचने के लिए डिजिटल सुरक्षा के सामान्य नियमों का पालन भी जरूरी है. बैंक खाते का पासवर्ड, ओटीपी और अन्य गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा न करें. सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध निजी सामग्री की समीक्षा करें और अनजान लोगों के साथ व्यक्तिगत ऑडियो या वीडियो साझा करने से बचें.
परिवार के सदस्य आपस में किसी आपात स्थिति में पहचान की पुष्टि करने का तरीका तय कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से सीधे संपर्क करना या पहले से तय किसी निजी सवाल के जरिए स्थिति की जांच करना उपयोगी हो सकता है. हालांकि, ऐसी व्यवस्था को भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के रूप में ही देखना चाहिए.
अगर किसी व्यक्ति को संदेह हो कि वह ठगी का शिकार हो गया है और उसने पैसे भेज दिए हैं, तो उसे तुरंत अपने बैंक से संपर्क कर लेनदेन रोकने या शिकायत दर्ज कराने के उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछना चाहिए. भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in का इस्तेमाल किया जा सकता है.
आवाज पर नहीं, पुष्टि पर करें भरोसा
AI वॉयस क्लोनिंग के जरिए की जाने वाली ठगी में अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों की भावनाओं का भी फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. परिवार के किसी सदस्य की परेशानी की खबर सुनकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है.
इसलिए किसी भी आपात कॉल पर पैसे भेजने से पहले स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करना सबसे अहम सुरक्षा कदम है. परिचित आवाज सुनाई देना इस बात का पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि फोन करने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है, जिसका वह दावा कर रहा है.
साइबर सुरक्षा का सबसे जरूरी नियम यही है कि डर और जल्दबाजी में पैसे न भेजें, पहचान की पुष्टि करें और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

