EOW का बड़ा एक्शन, सतना में सहकारी समिति प्रबंधक के ठिकानों पर छापा, 92 लाख की संपत्ति और खाद घोटाले में दो FIR दर्ज

EOW का बड़ा एक्शन, सतना में सहकारी समिति प्रबंधक के ठिकानों पर छापा, 92 लाख की संपत्ति और खाद घोटाले में दो FIR दर्ज

प्रेषित समय :18:06:12 PM / Sat, Oct 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल. मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की रीवा इकाई ने सतना जिले की सेवा सहकारी समिति अमुआई में पदस्थ रहे तत्कालीन प्रभारी समिति प्रबंधक सुरेश प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज की है. इनमें आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और खाद वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले शामिल हैं. जांच के दौरान आरोपी की संपत्ति, महंगे वाहनों, सोने, बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों से संबंधित जानकारियां सामने आई हैं. वहीं, खाद वितरण में किसानों के नाम पर फर्जी प्रविष्टियां दर्ज करने और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया बेचने के आरोप भी लगाए गए हैं. EOW ने दोनों मामलों में अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की है.

आय से 426 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप

EOW की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सेवा सहकारी समिति अमुआई, जिला सतना के तत्कालीन प्रभारी समिति प्रबंधक सुरेश प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत का विस्तृत सत्यापन किया गया. जांच में उनकी वैध आय और उपलब्ध संपत्तियों के बीच अंतर पाए जाने का दावा किया गया है. इसी आधार पर FIR क्रमांक 110/2026 दर्ज की गई है.

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी की नियुक्ति वर्ष 2006 में विक्रेता पद पर हुई थी. इसके बाद वर्ष 2020 में वह प्रभारी प्रबंधक बने. प्रारंभिक जांच में आरोपी की कुल वैध आय 57,68,622 रुपये पाई गई, जबकि संपत्ति और अन्य आर्थिक पहलुओं के सत्यापन में लगभग 92,16,174 रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ. एजेंसी के मुताबिक, यह संपत्ति ज्ञात वैध आय से करीब 426 प्रतिशत अधिक बताई गई है.

जमीन, सोने और महंगे वाहनों का खुलासा

EOW की जांच में करीब 22.50 लाख रुपये की जमीन से संबंधित दस्तावेज और लगभग 11.97 लाख रुपये का सोना मिलने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा आरोपी के छह बैंक खाते और छह बीमा पॉलिसियां भी जांच के दायरे में आई हैं. एजेंसी ने संपत्ति के स्वरूप और उसके स्रोत का सत्यापन किया है.

जांच के दौरान हुंडई क्रेटा, मारुति सुजुकी विटारा ब्रेजा, महिंद्रा ट्रैक्टर, बुलेट और पैशन प्रो सहित कई वाहनों की खरीद से संबंधित जानकारी भी सामने आई. इसके साथ ही नागौद क्षेत्र में लगभग 2200 वर्गफीट में बने आलीशान पक्के मकान का भी उल्लेख किया गया है. आरोपी के बच्चों की दिल्ली में पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च किए जाने से संबंधित जानकारी भी जांच में सामने आई है.

EOW अब इन संपत्तियों और खर्चों का आरोपी की ज्ञात आय से मिलान कर रही है. जांच एजेंसी के अनुसार, संपत्ति के स्रोत और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

खाद वितरण में कथित गड़बड़ी पर दूसरी FIR

EOW ने खाद वितरण में कथित अनियमितताओं और कालाबाजारी के मामले में भी FIR क्रमांक 111/2026 दर्ज की है. जांच के अनुसार, सेवा सहकारी समिति में खाद वितरण के दौरान किसानों से निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने और रिकॉर्ड में गड़बड़ी किए जाने के आरोप हैं.

जांच एजेंसी की ओर से जारी जानकारी में बताया गया है कि यूरिया की निर्धारित कीमत 593 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर 600 रुपये प्रति क्विंटल वसूलने का मामला सामने आया. इस तरह निर्धारित दर से अधिक राशि लेकर किसानों और शासन के साथ धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है. मामले में खाद वितरण के रिकॉर्ड, बिक्री और किसानों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई है.

POS मशीन में 122 किसानों की फर्जी प्रविष्टियां

खाद वितरण में अनियमितताओं की जांच के दौरान POS मशीन के रिकॉर्ड में कुल 194 किसानों का विवरण दर्ज पाया गया. इनमें से 122 किसानों के नाम पर फर्जी प्रविष्टियां दर्ज होने का आरोप है. जांच एजेंसी के अनुसार, वास्तविक किसानों के परमिट और खाद वितरण से संबंधित रिकॉर्ड में भी कथित हेरफेर किया गया.

परमिट बुक की कार्बन प्रतियों में काट-छांट किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. जांच में परमिट बुक क्रमांक 12432, 12652 और 12653 सहित अन्य दस्तावेजों में गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि कुछ प्रविष्टियों में 10 से 20 बोरी तक यूरिया या डीएपी की अतिरिक्त मात्रा दर्शाकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया. इसके साथ ही फर्जी स्टॉक रजिस्टर तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है.

दोनों मामलों में अलग-अलग धाराओं में अपराध दर्ज

EOW ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में FIR क्रमांक 110/2026 भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(b) के तहत दर्ज की है. वहीं, खाद वितरण में कथित धोखाधड़ी के मामले में FIR क्रमांक 111/2026 भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 318(4), 338 और 336(3) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है.

दोनों मामलों में जांच जारी है. एजेंसी संपत्ति के स्रोत, खाद वितरण के दस्तावेजों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है. आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-