कबीरधाम. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में बीमा राशि के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. पंडरिया विकासखंड की ग्राम पंचायत भेलकी के आश्रित वनांचल गांव बदनाचुआ के तीन ग्रामीणों को दस्तावेजों में मृत दर्शाकर उनके नाम पर बीमा राशि के दावे किए जाने का आरोप है. मामला केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जुड़ा बताया जा रहा है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
जिंदा ग्रामीणों को मृत दिखाने का मामला उजागर
प्रारंभिक जांच के अनुसार, बाबूलाल मरावी और गंगाराम मरावी को दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया था, जबकि दोनों अपने गांव में जीवित मिले. तीसरे ग्रामीण रामकुमार के परिजनों ने बताया कि वह रोजगार के लिए रायपुर गया हुआ है.
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपने नाम पर बीमा पॉलिसी होने या कथित मृत्यु के आधार पर बीमा राशि का दावा किए जाने की जानकारी नहीं थी. पुलिस थाने से बुलावा आने के बाद उन्हें इस मामले का पता चला.
आरोप है कि तीनों ग्रामीणों के नाम पर दो-दो लाख रुपये के मृत्यु दावे प्रस्तुत किए गए. हालांकि, इन दावों के संबंध में पूरी जानकारी और राशि के वास्तविक भुगतान की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
मध्य प्रदेश में सामने आए मामले से जुड़ रहे तार
बताया जा रहा है कि यह मामला मध्य प्रदेश में उजागर हुए कथित बीमा घोटाले की जांच से जुड़ा है. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, करीब 482 बैंक खातों के माध्यम से लगभग 9 करोड़ 60 लाख रुपये के संदिग्ध बीमा दावों की पड़ताल की जा रही है.
इस मामले में भोपाल के अजाक थाने में कथित धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों से संबंधित अपराध दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. इंदौर के पिपल्याहाना स्थित बैंक शाखा के 59 खातों से जुड़े केवाईसी दस्तावेज और बेंगलुरु की एक बैंक शाखा के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं.
दो-दो लाख रुपये के बीमा कवर पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत पात्र बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर नामांकित व्यक्ति को दो लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है. ऐसे में इस मामले में कई अहम सवाल उठ रहे हैं. यदि ग्रामीण जीवित हैं, तो उनके नाम पर मृत्यु संबंधी दस्तावेज किसने तैयार कराए? इन दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ? बीमा दावे किसने प्रस्तुत किए और कथित राशि किन बैंक खातों में पहुंची?
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
कबीरधाम जिले के ग्रामीणों के नाम सामने आने के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है. पुलिस और संबंधित एजेंसियों की पड़ताल में दस्तावेज तैयार करने वालों, दावे प्रस्तुत करने वालों और बैंक खातों में राशि के लेनदेन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
फिलहाल, मामले में सामने आए आरोपों की जांच जारी है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल था और बीमा राशि वास्तव में किसे मिली.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

