जबलपुर. एमपी के जबलपुर में सनसनीखेज मामला सामने आया है, यहां पर रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना के कार्यपालन यंत्री अजय कुमार सूरे पर फर्जी और जाली जाति दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने और विभागीय जांच के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं.
खबर है कि शास्त्री नगर त्रिपुरी वार्ड निवासी स्वर्गीय गंगाराम सूरे के पुत्र अजय कुमार सूरे पर आरोप है कि उन्होंने मन्नेवार अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर इस उच्च पद पर सेंध लगाई थी. जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ा, इस खेल की परतें उधड़ती चली गईं. राज्य स्तरीय अनुसूचित जनजाति छानबीन समिति, भोपाल द्वारा की गई लंबी और सूक्ष्म पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि आरोपी अधिकारी ने अपनी कुर्सी और नौकरी को बचाने के लिए एक नहीं बल्कि दो-दो जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था.
प्रशासन के इस पत्र में साफ शब्दों में निर्देश दिए गए हैं कि आरोपी लोक सेवक के खिलाफ बिना किसी देरी के तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए. साथ ही, की गई संपूर्ण वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट फौरन जिला प्रशासन को भेजने के सख्त आदेश दिए गए हैं. इस कार्रवाई के बाद से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.
आरोपी द्वारा पेश किए गए दस्तावेज-
पहला प्रमाण पत्र, कार्यालय जिलाध्यक्ष आदिम जाति कल्याण, जबलपुर द्वारा 1 जनवरी 1983 को जारी दिखाया गया था.
दूसरा दस्तावेज-
कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तहसील जबलपुर द्वारा 18 अगस्त 2023 को मन्नेवार अनुसूचित जनजाति के नाम पर जारी किया गया था.
उच्च स्तरीय समिति ने गहन समीक्षा के बाद इन दोनों कागजों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह अवैध और फर्जी घोषित कर दिया. नियमों के मुताबिक, सरकारी पद पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने वाले ऐसे भ्रष्ट लोक सेवकों पर सीधा आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान है.
17 मार्च 2026 की उच्च स्तरीय बैठक में मुहर-
इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े पर मुहर तब लगी जब जनजाति कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में 17 मार्च 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई. बैठक में तमाम साक्ष्यों और रिपोर्ट्स की जांच की गई, जिसमें यह साफ हो गया कि अजय कुमार सूरे ने पूरी तरह अनैतिक और गैर-कानूनी तरीके से पद हथियाया था.
चार बड़े विभागों को भेजा गया अल्टीमेटम-
मामले के खुलासे के बाद कलेक्टर कार्यालय के जनजातीय कार्य विभाग ने ताबड़तोड़ एक्शन लेते हुए राज्य और जिले के चार शीर्ष विभागों को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है. जिन विभागों और अधिकारियों को कड़े निर्देश भेजे गए हैं, उनमें शामिल हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

