झारखंड: 290 करोड़ के बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, कोहिनूर ग्रुप के CA और सहयोगियों के ठिकानों पर छापे

झारखंड: 290 करोड़ के बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, कोहिनूर ग्रुप के CA और सहयोगियों के ठिकानों पर छापे

प्रेषित समय :16:54:14 PM / Fri, Oct 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जमशेदपुर. झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार सुबह पश्चिम बंगाल के कई शहरों में कोहिनूर ग्रुप से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और अन्य सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान जांच टीम ने वित्तीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं. एजेंसी अब कथित मनी लॉन्ड्रिंग और पैसों के लेन-देन की कड़ियां खंगाल रही है.

66 मेगावाट का पावर प्लांट लगाने के नाम पर लिया था 290 करोड़ का कर्ज

यह मामला चांडिल थाना क्षेत्र के कुचिडीह गांव में स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है. कंपनी ने 66 मेगावाट क्षमता का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए बैंकों से लगभग 290 करोड़ रुपये का ऋण लिया था.

आरोप है कि कर्ज के रूप में प्राप्त रकम का इस्तेमाल प्रस्तावित बिजली परियोजना में करने के बजाय कोहिनूर ग्रुप से जुड़ी 100 से अधिक कथित शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि इस पैसे से प्रमोटरों और उनसे जुड़े लोगों ने निजी संपत्तियां खरीदीं और व्यक्तिगत खर्च किए.

2005 में झारखंड सरकार के साथ हुआ था समझौता

कोहिनूर ग्रुप ने वर्ष 2005 में झारखंड सरकार के साथ एक एमओयू किया था. इसके तहत स्पंज आयरन, टीएमटी बार और पावर प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई थी.

कंपनी ने चांडिल के कुचिडीह क्षेत्र में जमीन लेकर परियोजना की तैयारी शुरू की. आरोप है कि प्लांट के लिए पर्याप्त निर्माण कार्य किए बिना ही परियोजना से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर बैंक से वित्तीय सुविधाएं हासिल की गईं.

वर्ष 2008 से 2013 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह ने कंपनी को करीब 290 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराई. हालांकि, समय सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो सकी.

2015 में बैंक खाते को घोषित किया गया NPA

बैंक से मिली वित्तीय सहायता के बावजूद पावर प्लांट निर्धारित समय में तैयार नहीं हुआ. इसके बाद वर्ष 2015 में बैंकों ने कंपनी के ऋण खाते को एनपीए घोषित कर दिया.

मामले में आगे दिवाला प्रक्रिया भी शुरू हुई. वर्ष 2018 में कंपनी के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में प्रक्रिया शुरू की गई और 2019 में परिसमापन की कार्रवाई के दौरान बैंकों को कथित तौर पर केवल सात करोड़ रुपये ही वापस मिल सके.

इससे बैंकिंग कंसोर्टियम को कुल ऋण का बड़ा हिस्सा डूबने का नुकसान हुआ.

प्रमोटरों की संपत्तियों और किराये की कमाई की भी जांच

जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार, कंपनी के प्रमोटर विजय बोथरा, प्रशांत बोथरा और उनके परिजनों के नाम पर कोलकाता तथा आसपास के इलाकों में कई संपत्तियां खरीदी गई थीं. इन संपत्तियों से करीब 26 लाख रुपये प्रतिमाह किराया मिलने की बात भी सामने आई है.

ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक से प्राप्त ऋण की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और कथित तौर पर उससे खरीदी गई संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है.

पश्चिम बंगाल के कई शहरों में ED की छापेमारी

शुक्रवार को जांच एजेंसी ने हावड़ा, हुगली के उत्तरपाड़ा, लेक टाउन और आसनसोल में अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. इन स्थानों पर कोहिनूर ग्रुप के CA और सहयोगियों से जुड़े परिसरों की जांच की गई.

कार्रवाई में मिले दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों का विश्लेषण कर वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाई जाएगी.

वर्षों से बंद पड़े हैं कंपनी के कार्यालय और प्लांट

मामले से जुड़ी कंपनी का आदित्यपुर स्थित आशियाना ट्रेड सेंटर का कार्यालय और चांडिल का प्रस्तावित प्लांट लंबे समय से बंद बताए जा रहे हैं. अब ईडी की जांच का मुख्य फोकस कथित बैंक ऋण घोटाले से जुड़े पैसों के प्रवाह, शेल कंपनियों के नेटवर्क और संपत्तियों की खरीद पर है.

आने वाले दिनों में जब्त दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई हो सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-