करवा चौथ पर पत्नी ने किडनी देकर बचाई पति की जिंदगी, सात फेरों के वचन को कर दिया साकार

करवा चौथ पर पत्नी ने किडनी देकर बचाई पति की जिंदगी, सात फेरों के वचन को कर दिया साकार

प्रेषित समय :17:37:49 PM / Fri, Oct 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाता है. इस दिन सुहागिनें चांद देखकर पति की सलामती की दुआ मांगती हैं, लेकिन जबलपुर की रश्मि गुप्ता ने अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए इससे भी बड़ा कदम उठाया. उन्होंने अपनी एक किडनी पति दीपक गुप्ता को दान कर दी. उनके इस फैसले ने वैवाहिक रिश्ते के उस अर्थ को जीवंत कर दिया, जिसमें साथ निभाने का वादा केवल सुख के दिनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा में भी कायम रहता है. करवा चौथ के मौके पर सामने आई यह कहानी अब अंगदान, पारिवारिक विश्वास और निस्वार्थ प्रेम की मिसाल बन गई है.

जब जीवन की जंग में पत्नी बनी सबसे बड़ा सहारा

शांतिनगर निवासी दीपक गुप्ता की जिंदगी उस समय मुश्किल दौर में पहुंच गई, जब उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं. बीमारी के कारण उन्हें नियमित डायलिसिस पर निर्भर रहना पड़ रहा था. किडनी की गंभीर बीमारी केवल मरीज के शरीर को ही नहीं तोड़ती, बल्कि पूरे परिवार की दिनचर्या और मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करती है. इलाज की चिंता, भविष्य की अनिश्चितता और लगातार अस्पताल के चक्कर परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं.

ऐसे समय में रश्मि गुप्ता ने अपने पति के लिए किडनी दान करने का निर्णय लिया. यह फैसला केवल भावनात्मक जुड़ाव का परिणाम नहीं था, बल्कि इसके साथ एक बड़ी चिकित्सकीय प्रक्रिया और जोखिम की समझ भी जुड़ी थी. किडनी दान करने से पहले आवश्यक जांच की गई. चिकित्सकीय परीक्षणों में अनुकूल स्थिति सामने आने के बाद प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू हुई.

चांद देखने से आगे बढ़कर पति को दिया जीवन का उपहार

करवा चौथ को आमतौर पर प्रेम, विश्वास और पति की लंबी उम्र की कामना से जोड़कर देखा जाता है. रश्मि की कहानी इस पर्व को एक अलग मानवीय अर्थ देती है. उन्होंने पति की लंबी उम्र के लिए केवल प्रार्थना नहीं की, बल्कि उन्हें जीवन का दूसरा अवसर देने के लिए अपना अंग तक दान कर दिया.

उनका यह कदम उन दंपतियों के लिए भी प्रेरक है, जो बीमारी और कठिन परिस्थितियों के सामने असहाय महसूस करते हैं. हालांकि अंगदान का निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत होता है और इसके लिए चिकित्सकीय जांच, उपयुक्तता तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है.

मेट्रो प्राइम में डॉक्टरों की टीम ने किया प्रत्यारोपण

जबलपुर के बड़ेरिया मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में दीपक का किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया. अस्पताल की नेफ्रोलॉजी एवं ट्रांसप्लांट यूनिट ने इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया. ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश पटेल और कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विशाल वडेरा के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने कई घंटे तक चले ऑपरेशन को सफल बनाया.

फिलहाल दीपक और रश्मि दोनों डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी स्थिति स्वस्थ बताई गई है. अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यहां अब तक 30 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं.

अंगदान के प्रति जागरूकता का भी संदेश

अस्पताल के डायरेक्टर राजीव बड़ेरिया ने बताया कि संस्थान का प्रयास है कि किडनी प्रत्यारोपण जैसी सुविधाओं के लिए मरीजों को भोपाल या नागपुर जैसे शहरों की ओर न जाना पड़े. उन्होंने रश्मि के निर्णय को अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली मिसाल बताया.

इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस रिश्ते में सात फेरों के दौरान जीवनभर साथ निभाने का वादा किया जाता है, रश्मि ने संकट की घड़ी में उस वादे को अपने साहसिक फैसले से निभाया. करवा चौथ पर उनकी यह पहल याद दिलाती है कि प्रेम हमेशा शब्दों, रस्मों और प्रतीकों में ही व्यक्त नहीं होता. कई बार किसी अपने के लिए लिया गया एक निर्णय उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है. रश्मि ने अपने पति को केवल किडनी नहीं दी, बल्कि उनके साथ आगे का जीवन जीने की एक नई उम्मीद भी दी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-