6 नवंबर 2026, शुक्रवार: हिंदू पंचांग के अनुसार आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी. इसी कारण आज धनतेरस यानी धनत्रयोदशी का पर्व मनाया जाएगा. शुक्रवार होने के कारण माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना की जाती है. आज हस्त नक्षत्र रहेगा, जो अगले दिन सुबह लगभग 4:43 बजे तक प्रभावी रहेगा. विष्कंभ योग भी अगले दिन सुबह तक रहेगा. आज रमा एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा. आइए जानते हैं नई दिल्ली के स्थानीय समय के अनुसार आज का पंचांग, धनतेरस पूजा मुहूर्त, राहुकाल और दिनभर की धार्मिक जानकारी.
आज का पंचांग 6 नवंबर 2026
-
दिन: शुक्रवार
-
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
-
शक संवत: 1948 (पराभव)
-
मास: कार्तिक (पूर्णिमांत), आश्विन (अमांत)
-
पक्ष: कृष्ण पक्ष
-
तिथि: द्वादशी सुबह लगभग 10:30 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी
-
नक्षत्र: हस्त अगले दिन सुबह 4:43 बजे तक, इसके बाद चित्रा
-
योग: विष्कंभ योग अगले दिन सुबह लगभग 4:10 बजे तक, इसके बाद प्रीति योग
-
करण: तैतिल सुबह 10:30 बजे तक, इसके बाद गर करण रात 10:36 बजे तक, फिर वणिज
-
सूर्योदय: सुबह 6:37 बजे
-
सूर्यास्त: शाम 5:33 बजे
-
चंद्रोदय: अगले दिन सुबह लगभग 4:43 बजे
-
चंद्रास्त: दोपहर लगभग 3:31 बजे
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व
धनतेरस को धन और आरोग्य का पर्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है.
धनतेरस पर माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विधान है. शाम को घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं. श्रद्धालु चांदी, सोने, बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी को शुभ मानते हैं.
इस दिन घर की साफ-सफाई, दीपदान और जरूरतमंदों की सहायता करने की भी परंपरा है. धनतेरस का संदेश केवल धन संचय तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और संतुलित जीवन से भी जुड़ा है.
आज धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
-
प्रदोष काल: शाम लगभग 5:33 से 8:11 बजे तक
-
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 से 7:58 बजे तक
-
वृषभ काल: शाम लगभग 6:02 से 7:58 बजे तक
-
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक
-
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:38 बजे तक
-
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक
-
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:33 से 5:59 बजे तक
धनतेरस पर शाम के प्रदोष काल में दीपदान और लक्ष्मी-कुबेर पूजा का विशेष महत्व है. खरीदारी और पूजा के लिए स्थानीय परंपरा के अनुसार मुहूर्त का ध्यान रखें.
आज का राहुकाल और अशुभ समय
-
राहुकाल: सुबह 10:43 से दोपहर 12:05 बजे तक
-
यमगंड: दोपहर 2:49 से शाम 4:11 बजे तक
-
गुलिक काल: सुबह 7:59 से 9:21 बजे तक
-
दुर्मुहूर्त: सुबह 8:48 से 9:31 बजे तक
-
दूसरा दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:26 से 1:10 बजे तक
-
वर्ज्य काल: दोपहर 12:36 से 2:15 बजे तक
परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है. यह धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं.
रमा एकादशी व्रत का पारण
5 नवंबर को रखे गए रमा एकादशी व्रत का पारण आज द्वादशी तिथि में किया जाएगा.
-
पारण का समय: सुबह 6:36 से 8:47 बजे तक
-
पारण तिथि: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करना चाहिए. पारण के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान करना शुभ माना जाता है.
आज क्या करें?
-
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करें और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें.
-
माता लक्ष्मी और कुबेर देव के सामने दीपक जलाएं.
-
घर के मुख्य द्वार पर दीपदान करें.
-
अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन या उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करें.
-
यमदीपदान की परंपरा के अनुसार शाम को दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं.
-
जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करें.
-
घर में स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें.
आज का आध्यात्मिक संदेश
"सच्ची समृद्धि वही है, जहां धन के साथ अच्छा स्वास्थ्य, संतोष और परिवार की खुशहाली भी हो."
धनतेरस का पर्व हमें धन के महत्व के साथ स्वास्थ्य और जीवन की वास्तविक संपदा का मूल्य समझाता है. भगवान धन्वंतरि से आरोग्य, माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि और कुबेर देव से आर्थिक संपन्नता की कामना करें. दीपों की रोशनी के साथ अपने जीवन में सेवा, सद्भाव और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाएं.
नोट: पंचांग में दिए गए सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय समय (IST) के अनुसार हैं. अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण सूर्योदय, सूर्यास्त, पूजा मुहूर्त और अन्य समय में अंतर हो सकता है. धनतेरस की पूजा, यमदीपदान और एकादशी पारण के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

