10 नवंबर 2026 का पंचांग: मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का विशेष संयोग, जानें शुभ मुहूर्त

10 नवंबर 2026 का पंचांग: मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का विशेष संयोग, जानें शुभ मुहूर्त

प्रेषित समय :19:26:15 PM / Sat, Oct 31st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है. इस दिन देशभर में गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा का पर्व मनाया जाएगा. दीपावली के बाद आने वाला यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला की स्मृति में मनाया जाता है. नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि दोपहर 2 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी. इस दिन सुबह भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौमाता की पूजा का विशेष महत्व है.

इस वर्ष तिथियों के क्रम को समझना जरूरी है. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू हो गई थी, लेकिन 10 नवंबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी. इसी कारण सूर्योदय की तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को मनाई जाएगी. नई दिल्ली में पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक रहेगा.

पंचांग विवरण

दिन: मंगलवार
तारीख: 10 नवंबर 2026
मास: कार्तिक
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: प्रतिपदा दोपहर 2:00 बजे तक, इसके बाद द्वितीया
नक्षत्र: विशाखा सुबह 9:19 बजे तक, इसके बाद अनुराधा
योग: शोभन योग अगले दिन 11 नवंबर की सुबह 3:10 बजे तक, इसके बाद अतिगंड योग
करण: बव दोपहर 2:00 बजे तक, इसके बाद बालव
विक्रम संवत: 2083 सिद्धार्थी
शक संवत: 1948 पराभव
सूर्योदय: सुबह 6:40 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:30 बजे
चंद्रोदय: सुबह 7:38 बजे
चंद्रास्त: शाम 5:52 बजे
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: वृश्चिक

शुभ और अशुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 से 5:47 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:21 से 6:40 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:53 से 2:37 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:30 से 5:56 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से अगले दिन 12:32 बजे तक
अमृत काल: रात 12:14 से 1:59 बजे तक (11 नवंबर)

राहुकाल: दोपहर 2:47 से शाम 4:09 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 9:22 से 10:44 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 12:05 से 1:26 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 8:50 से 9:33 बजे तक
वर्ज्य काल: दोपहर 1:42 से 3:27 बजे तक

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त

तारीख: मंगलवार, 10 नवंबर 2026
प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त: सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 10 मिनट

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महत्व

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ब्रजवासियों और उनके पशुधन की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति, पर्वत और गौवंश के महत्व का संदेश दिया था. इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी. तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर सभी को उसके नीचे आश्रय दिया. अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ.

इसी प्रसंग की स्मृति में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है. श्रद्धालु घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाते हैं और फूल, दीपक, रोली, अक्षत तथा विभिन्न पकवानों से पूजा करते हैं. मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. इसमें अनेक प्रकार के व्यंजन, अनाज, सब्जियां और मिठाइयां शामिल होती हैं.

इस पर्व का एक महत्वपूर्ण संदेश प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान भी है. गोवर्धन पर्वत, जल, वनस्पति और पशुधन को जीवन का आधार मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण की भावना को दर्शाती है.

बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को बलि प्रतिपदा या बलि पड़वा के रूप में भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी. इस प्रसंग में राजा बलि के दान और भगवान विष्णु की लीला का स्मरण किया जाता है. महाराष्ट्र सहित कुछ क्षेत्रों में इस दिन बलि पड़वा का विशेष महत्व है.

इसी दिन कई परंपराओं में गुजराती नववर्ष भी मनाया जाता है. व्यापारी वर्ग नए बही-खाते शुरू करता है और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना करता है.

पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

गोवर्धन पूजा के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें. गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर रोली, अक्षत, पुष्प और दीप अर्पित करें. गौमाता की पूजा और सेवा को भी इस पर्व का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है. अन्नकूट का प्रसाद श्रद्धापूर्वक अर्पित कर परिवार और जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है.

ध्यान दें: कार्तिक शुक्ल द्वितीया 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे शुरू होगी. भाई दूज का पर्व द्वितीया तिथि के अनुसार 11 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा. इसलिए गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीख को लेकर भ्रम न रखें.

विशेष सूचना: पंचांग के सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय समय (भारतीय मानक समय) के अनुसार हैं. अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.

पंचांग के तिथि, नक्षत्र, योग, करण और मुहूर्त का मिलान नई दिल्ली के दैनिक पंचांग तथा गोवर्धन पूजा के विशेष मुहूर्त से किया गया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-