सोमवार, 9 नवंबर 2026 को कार्तिक मास की अमावस्या तिथि रहेगी. इस दिन सोमवार होने के कारण सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है. अमावस्या तिथि दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. इसके बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू हो जाएगी. इस दिन स्नान, दान, पितरों के निमित्त तर्पण, भगवान शिव की पूजा और पीपल वृक्ष की परिक्रमा का विशेष महत्व माना गया है.
इस बार दीपावली और अमावस्या की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति इसलिए बन रही है, क्योंकि दीपावली रविवार, 8 नवंबर को मनाई गई, जबकि अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर तक जारी रहेगी. इसका कारण तिथि और पर्व निर्धारण की अलग-अलग परंपराएं हैं. दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में अमावस्या तिथि के दौरान की जाती है. 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या उपलब्ध होने के कारण लक्ष्मी पूजन और दीपावली का पर्व उसी दिन मनाया गया. वहीं 9 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या रहने से यह दिन कार्तिक अमावस्या और सोमवती अमावस्या के रूप में मान्य होगा.
पंचांग विवरण
दिन: सोमवार
तारीख: 9 नवंबर 2026
मास: कार्तिक
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: अमावस्या दोपहर 12:31 बजे तक, इसके बाद शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र: स्वाती सुबह 7:24 बजे तक, इसके बाद विशाखा
योग: सौभाग्य योग अगले दिन 10 नवंबर की सुबह 2:57 बजे तक, इसके बाद शोभन योग
करण: नाग करण दोपहर 12:31 बजे तक, इसके बाद किंस्तुघ्न करण
विक्रम संवत: 2083 सिद्धार्थी
शक संवत: 1948 पराभव
सूर्योदय: सुबह 6:39 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:31 बजे
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: तुला
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 से 5:47 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:21 से 6:39 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:53 से 2:37 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:31 से 5:57 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से 12:31 बजे तक
राहुकाल: सुबह 8:00 से 9:22 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 10:43 से दोपहर 12:05 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 1:26 से 2:48 बजे तक
दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:26 से 1:10 बजे तक
सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की आराधना, पवित्र नदियों में स्नान, पितरों के लिए तर्पण और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या पर श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कर्मों से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है. श्रद्धालु पीपल के वृक्ष के पास दीपक जलाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की कामना करते हैं. सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर पूजा करना भी शुभ माना जाता है.
अमावस्या पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए भी महत्वपूर्ण तिथि है. इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है. धार्मिक परंपराओं में जरूरतमंदों की सहायता को भी पुण्यदायी माना गया है.
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को क्यों?
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होने की सामान्य परंपरा के कारण इस वर्ष तारीख को लेकर सवाल उठ रहे हैं. पंचांग के अनुसार 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे प्रतिपदा शुरू होगी, लेकिन 10 नवंबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी. इसी कारण नई दिल्ली में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मंगलवार, 10 नवंबर को मनाया जाएगा.
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक रहेगा. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौमाता की पूजा की जाती है. घरों और मंदिरों में अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था. इसी प्रसंग की स्मृति में गोवर्धन पूजा मनाई जाती है.
विशेष सूचना: इस पंचांग में दिए गए सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय समय के अनुसार हैं. तिथि और नक्षत्र का निर्धारण सूर्योदय तथा उनके वास्तविक परिवर्तन समय के आधार पर किया गया है. स्थानीय स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव है.
तिथि संबंधी पुष्टि: 9 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या है, इसलिए इसे सोमवती अमावस्या कहना उचित है. प्रतिपदा दोपहर 12:31 बजे से शुरू होगी. गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

