NEET PG काउंसलिंग पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, इन-सर्विस डॉक्टरों का 30 प्रतिशत से अधिक सीटों पर दाखिला नहीं, 5 नवंबर को फिर होगी सुनवाई

NEET PG काउंसलिंग पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, इन-सर्विस डॉक्टरों का 30 प्रतिशत से अधिक सीटों पर दाखिला नहीं, 5 नवंबर को फिर होगी सुनवाई

प्रेषित समय :20:10:31 PM / Tue, Nov 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्यप्रदेश में NEET PG-2026 की काउंसलिंग और मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट सीटों के आवंटन को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों में MD और MS पाठ्यक्रमों की प्रत्येक विशेषज्ञता में इन-सर्विस यानी पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों को 30 प्रतिशत से अधिक सीटें आवंटित नहीं की जाएंगी. इसके साथ ही ओपन कैटेगरी और इन-सर्विस उम्मीदवारों की मेरिट सूची को आपस में मिलाने पर भी रोक लगाई गई है. इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय  को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगी. ऐसे में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच होने वाली यह सुनवाई फ्रेश उम्मीदवारों और सेवारत चिकित्सकों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए 30 प्रतिशत सीटों की सीमा तय

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने NEET PG काउंसलिंग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया. अदालत ने निर्देश दिया कि इन-सर्विस उम्मीदवारों को प्रत्येक विषय और विशेषज्ञता में कुल उपलब्ध सीटों के निर्धारित 30 प्रतिशत कोटे के भीतर ही प्रवेश दिया जाए.

पीठ ने कहा कि वर्तमान काउंसलिंग प्रक्रिया को देखते हुए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सेवारत उम्मीदवारों को निर्धारित आरक्षण सीमा से अधिक सीटों का आवंटन न हो. यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के सरकारी और स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों में PG डिग्री पाठ्यक्रमों की सीटों पर लागू होगी. अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 प्रतिशत की निर्धारित सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए.

ओपन और इन-सर्विस उम्मीदवारों की मेरिट सूची अलग रखने का निर्देश

अदालत के आदेश का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ओपन कैटेगरी और इन-सर्विस उम्मीदवारों की मेरिट सूची से जुड़ा है. हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दोनों श्रेणियों की मेरिट सूची को आपस में मिलाकर सीटों का आवंटन नहीं किया जाए. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में दोनों श्रेणियों की सूचियां आपस में ओवरलैप हो रही थीं. इससे सामान्य यानी फ्रेश उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो रहे थे.

याचिका में कहा गया कि ओपन कैटेगरी के ऐसे उम्मीदवार, जिनके NEET PG में अधिक अंक हैं, वे भी सीट आवंटन की प्रक्रिया में पीछे छूट रहे हैं. इसकी वजह इन-सर्विस उम्मीदवारों को मिलने वाला अतिरिक्त सेवा आधारित वेटेज बताया गया है. इसी आधार पर मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है.

सेवा के अतिरिक्त अंकों से मेरिट प्रभावित होने का आरोप

याचिका दायर करने वाले उम्मीदवार फ्रेश यानी गैर-सेवारत अभ्यर्थी हैं. उनका कहना है कि इन-सर्विस उम्मीदवारों को NEET PG परीक्षा के स्कोर में सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं. इससे उनकी मेरिट रैंक में बड़ा बदलाव हो जाता है और वे ओपन कैटेगरी के अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों से आगे निकल जाते हैं.

याचिका के अनुसार, मध्यप्रदेश चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम, 2018 के नियम 14 के तहत इन-सर्विस उम्मीदवारों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर इंसेंटिव वेटेज देने का प्रावधान है. याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था के औचित्य पर नहीं, बल्कि इसके साथ 30 प्रतिशत आरक्षण कोटे के इस्तेमाल और मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.

उनका तर्क है कि सेवा आधारित अतिरिक्त अंकों का लाभ मिलने के बाद इन-सर्विस उम्मीदवारों को निर्धारित कोटे के अतिरिक्त भी फायदा मिल रहा है. इससे उन फ्रेश उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्पर्धा में असमानता पैदा होती है, जिन्होंने NEET PG परीक्षा में उनसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं.

AIR 13865 वाला उदाहरण देकर बताई गई विसंगति

याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील के समर्थन में एक उदाहरण भी अदालत के सामने रखा. बताया गया कि एक इन-सर्विस उम्मीदवार की ऑल इंडिया रैंक (AIR) 13865 थी, लेकिन सेवा आधारित अतिरिक्त अंक मिलने के बाद उसकी मेरिट स्थिति 333वें स्थान तक पहुंच गई.

याचिका में कहा गया कि इस तरह रैंक में बड़ा बदलाव होने से इन-सर्विस उम्मीदवार अपनी पसंद की पोस्टग्रेजुएट विशेषज्ञता हासिल करने की बेहतर स्थिति में आ जाते हैं. दूसरी ओर, अधिक अंक प्राप्त करने वाले फ्रेश उम्मीदवारों को मनचाही सीट मिलने की संभावना प्रभावित होती है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सेवा आधारित इंसेंटिव और आरक्षण का लाभ एक साथ मिलने से दोहरा फायदा पैदा हो रहा है. इससे मेडिकल PG प्रवेश की प्रतिस्पर्धा में समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है.

हाई कोर्ट ने दोहरे लाभ पर उठाए सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सिंघी ने ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों की ओर से अदालत में पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि PG मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए मेरिट सर्वोपरि होनी चाहिए. लेकिन वर्तमान व्यवस्था में दोनों श्रेणियों की मेरिट सूची के आपस में मिल जाने से अधिक अंक प्राप्त करने वाले ओपन कैटेगरी उम्मीदवारों को नुकसान हो रहा है.

दलीलों पर विचार करते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा अपनाई गई प्रवेश प्रक्रिया से इन-सर्विस उम्मीदवारों को दोहरा लाभ मिलता दिखाई दे रहा है. उन्हें एक ओर 30 प्रतिशत आरक्षित सीटों का लाभ मिल रहा है और दूसरी ओर सेवा अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक भी दिए जा रहे हैं.

अदालत ने इस स्थिति को उन नए उम्मीदवारों के लिए नुकसानदायक बताया, जिनका NEET PG स्कोर अधिक है. हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय सभी पक्षों के जवाब और आगे होने वाली सुनवाई के बाद लिया जाएगा.

राज्य सरकार और DME को नोटिस, 5 नवंबर तक जवाब

हाई कोर्ट ने इस मामले में मध्यप्रदेश शासन और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को नोटिस जारी किए हैं. अदालत ने संबंधित पक्षों को अपने जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादियों तक नोटिस पहुंचाने के लिए ईमेल के माध्यम से भी सूचना देने की अनुमति दी गई है.

अदालत ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें और जवाबी पक्ष की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई है. यानी 3 नवंबर की सुनवाई और अंतरिम निर्देशों के बाद अब गुरुवार को हाई कोर्ट में इस मामले पर फिर सुनवाई होगी.

10 नवंबर तक पूरी होनी है पहले चरण की काउंसलिंग

NEET PG की काउंसलिंग के बीच हाई कोर्ट का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्यप्रदेश में पहले चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है. सीट आवंटन और प्रवेश की प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 तक पूरी होनी है. ऐसे में 5 नवंबर को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार और DME का पक्ष सामने आने के बाद आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है.

फिलहाल अदालत ने अंतरिम स्तर पर इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए 30 प्रतिशत सीटों की सीमा निर्धारित करते हुए दोनों श्रेणियों की मेरिट सूची अलग रखने का निर्देश दिया है. अब सभी की निगाहें 5 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं. इस दिन राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा. इसके बाद अदालत आगे की सुनवाई में काउंसलिंग प्रक्रिया, सेवा आधारित अतिरिक्त अंकों और मेरिट सूची से जुड़े विवाद पर विचार करेगी.

सर्वजीत सिंह विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के इस मामले में अगली सुनवाई इसलिए निर्णायक महत्व रखती है कि PG मेडिकल सीटों के आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. फ्रेश उम्मीदवारों को उम्मीद है कि मेरिट के आधार पर उन्हें न्याय मिलेगा, जबकि इन-सर्विस उम्मीदवारों की नजर भी अदालत के अगले आदेश पर रहेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-