दीया मिर्जा के पटाखों पर संदेश को लेकर BJP नेताओं को हाई कोर्ट की फटकार, BMC को वीडियो दोबारा अपलोड करने का आदेश

दीया मिर्जा के पटाखों पर संदेश को लेकर BJP नेताओं को हाई कोर्ट की फटकार, BMC को वीडियो दोबारा अपलोड करने का आदेश

प्रेषित समय :20:03:48 PM / Tue, Nov 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा के दिवाली पर पटाखे नहीं जलाने और सार्वजनिक सड़कों को आतिशबाजी से मुक्त रखने की अपील वाले वीडियो को लेकर उठे विवाद पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने वीडियो पर कुछ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं की आपत्तियों और टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां किसी व्यक्ति को उसके धर्म के आधार पर किसी त्योहार में शामिल होने या उसके संबंध में जागरूकता फैलाने से नहीं रोका जा सकता. कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को अभिनेत्री का वीडियो दोबारा अपलोड करने और जनता का भरोसा बहाल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण और नागरिकों का स्वास्थ्य किसी एक धर्म या समुदाय का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता है.

राजनीतिक टिप्पणियों पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियों पर गंभीर असहमति जताई. अदालत ने मौखिक टिप्पणी में सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म से संबंध रखता है, तो उसे किसी त्योहार के आयोजन या जागरूकता अभियान में भाग लेने से कैसे रोका जा सकता है? क्या भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश नहीं है?

पीठ ने कहा कि त्योहार सभी के लिए होते हैं और देश में किसी भी व्यक्ति को धार्मिक पहचान के आधार पर किसी उत्सव से अलग नहीं किया जा सकता. अदालत की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि धार्मिक विविधता भारत की सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान उसके नागरिक अधिकारों और सामाजिक भागीदारी के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए.

BMC के अनुरोध पर दीया मिर्जा ने बनाया था वीडियो

दरअसल, दिवाली से पहले सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे जलाने के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से BMC ने अभिनेत्री दीया मिर्जा से एक वीडियो बनवाया था. इसमें उन्होंने नागरिकों से सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे नहीं जलाने और पर्यावरण तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की थी.

यह पहल अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुरूप जागरूकता अभियान का हिस्सा थी. इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है. विशेष रूप से घनी आबादी वाले महानगर मुंबई में सार्वजनिक सड़कों पर आतिशबाजी से आम नागरिकों को परेशानी हो सकती है. ऐसे में नागरिकों से जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की गई थी.

हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद कुछ BJP नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने दीया मिर्जा को हिंदू विरोधी तक करार दिया. राजनीतिक विरोध और विवाद बढ़ने के बाद BMC ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से वीडियो हटा दिया. इसी घटनाक्रम ने मामले को नया मोड़ दे दिया और अब हाई कोर्ट ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है.

अदालत ने कहा अभिनेत्री ने दिया था अच्छा संदेश

सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश कुलकर्णी ने कहा कि राजनीतिक नेताओं ने अदालत के पहले के आदेश पर ध्यान दिए बिना टिप्पणियां कीं. जबकि अदालत के पूर्व निर्देश में जागरूकता अभियान में सभी को भाग लेने की अनुमति दी गई थी. पीठ ने कहा कि दीया मिर्जा ने वायु प्रदूषण के संबंध में अदालत के निर्देशों के अनुरूप वास्तव में अच्छा संदेश दिया था.

अदालत ने वीडियो को लेकर उठाई गई आपत्तियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. न्यायाधीशों का कहना था कि जब किसी व्यक्ति ने पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में संदेश दिया है, तो उसके प्रयास को धार्मिक या राजनीतिक विवाद में बदलना उचित नहीं है. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक हित के अभियान में भाग लेने वाले व्यक्ति को अनावश्यक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए.

दिवाली किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि दिवाली जाति और धर्म की परवाह किए बिना सभी लोग मनाते हैं. अदालत ने सवाल उठाया कि जब त्योहार की खुशियां साझा करने में किसी तरह का धार्मिक भेदभाव नहीं है, तो दीया मिर्जा की भागीदारी पर आपत्ति किस आधार पर की गई?

पीठ के अनुसार, भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते रहे हैं. ऐसे में किसी व्यक्ति को उसके धर्म के आधार पर किसी त्योहार से जुड़े सकारात्मक संदेश देने से रोकना धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुरूप नहीं है.

अदालत ने कुछ पार्षदों और राजनीतिक नेताओं के रवैये को भी उचित नहीं माना. न्यायाधीशों ने कहा कि इस मुद्दे को कोई दूसरा रंग देने की जरूरत नहीं थी. मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना था, लेकिन अनावश्यक टिप्पणियों से इसे धार्मिक विवाद का रूप दे दिया गया.

हर व्यक्ति एक ही हवा में सांस लेता है

सुनवाई के दौरान जस्टिस डॉ. नीला गोखले ने मामले के पर्यावरणीय पहलू पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला पर्यावरण से जुड़ा है और हर व्यक्ति एक ही हवा में सांस लेता है, चाहे उसका धर्म या समुदाय कुछ भी हो.

अदालत ने स्पष्ट किया कि पटाखे जलाने पर नियंत्रण या सार्वजनिक स्थानों पर आतिशबाजी से बचने की अपील का अर्थ यह नहीं है कि लोगों से त्योहार मनाने का अधिकार छीना जा रहा है. त्योहार मनाने और पर्यावरण की सुरक्षा करने के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.

पीठ की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक पहचान के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. प्रदूषण का प्रभाव किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहता. खराब हवा में सांस लेने का असर बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और आम नागरिकों पर पड़ता है. इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग जरूरी है.

BMC को वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश

मामले में सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC को दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि नगर निगम को इस कदम के माध्यम से लोगों का भरोसा बहाल करना चाहिए. पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि इस पूरे मामले में जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं थी.

अदालत के अनुसार, कुछ लोगों की आपत्तियां पूरे समाज की सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं. इसलिए सीमित लोगों की टिप्पणियों के आधार पर किसी सार्वजनिक हित के अभियान को रोकना उचित नहीं है. पीठ ने जिम्मेदार सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से भी ऐसी टिप्पणियों से बचने की अपेक्षा जताई.

मुंबई की एकजुटता और सामाजिक सौहार्द का दिया संदेश

हाई कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य, प्रदूषण और पर्यावरण जैसे विषयों पर गुटबाजी की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. इन मुद्दों पर राजनीतिक या धार्मिक विभाजन पैदा करने के बजाय सभी को मिलकर काम करना चाहिए. अदालत ने उम्मीद जताई कि इस विवाद का अंत सौहार्द और अपनेपन की भावना के साथ होना चाहिए.

विशेष रूप से मुंबई जैसे महानगर में सामाजिक एकजुटता का महत्व बताते हुए पीठ ने कहा कि शहर की पहचान आपसी सहयोग और अपनेपन की भावना से बनी है. किसी व्यक्ति की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से इस संतुलन को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

इस मामले में हाई कोर्ट का रुख केवल एक अभिनेत्री के वीडियो को दोबारा सोशल मीडिया पर डालने तक सीमित नहीं है. अदालत की टिप्पणियां धार्मिक सहिष्णुता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के व्यापक महत्व को भी सामने लाती हैं. अदालत ने अपने निर्देश से यह संदेश दिया है कि नागरिकों की भलाई से जुड़े अभियानों को अनावश्यक धार्मिक और राजनीतिक विवादों में उलझाने के बजाय उनका समर्थन किया जाना चाहिए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-