जबलपुर. एमपी के रायसेन में यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ दर्ज एफआईआर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है. सिलवानी थाना पुलिस ने सितंबर 2025 में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा की रिपोर्टिंग करने पर उनके खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे के आरोप में केस दर्ज किया था.
जस्टिस हिमांशु जोशी की कोर्ट ने आज एफआईआर खारिज करते हुए कहा कि किसी वास्तविक घटना या हिंसा की निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना अपराध नहीं है. मामला 6 सितंबर 2025 का है. रायसेन जिले के सिलवानी में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हिंसक घटना हुई थी, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे. उवेश खान यूट्यूब न्यूज चैनल चलाते हैं. उन्होंने इस घटना की रिपोर्टिंग कर वीडियो अपने चैनल पर प्रसारित किया था. रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उवेश खान की खबर भ्रामक थी. इससे हिंदू समुदाय के बीच डर और भ्रम का माहौल पैदा हुआ और सांप्रदायिक सौहार्द बिगडऩे की आशंका थी. शिकायत के आधार पर सिलवानी थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत एफआईआर दर्ज की थी. यह धारा विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने से संबंधित है. उवेश खान ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
कोर्ट ने कहा- तथ्यात्मक रिपोर्टिंग अपराध नहीं-
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वास्तविक घटना या हिंसा की निष्पक्ष रिपोर्टिंग को सांप्रदायिक दुश्मनी बढ़ाने वाला कृत्य नहीं माना जा सकता. पत्रकार ने ऐसी घटना की रिपोर्टिंग की थी, जिसके संबंध में पुलिस पहले ही अलग एफआईआर दर्ज कर चुकी थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता के तहत वास्तविक घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग को अपराध नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि, यह संरक्षण केवल तथ्यात्मक रिपोर्टिंग तक सीमित है और पत्रकारों को हर तरह की कानूनी कार्रवाई से पूर्ण छूट नहीं देता
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