अर्जुन सिंह ने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा और सामाजिक समरसता का माध्यम बनाया : डॉ. अंजू सिंह बघेल

अर्जुन सिंह ने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा और सामाजिक समरसता का माध्यम बनाया : डॉ. अंजू सिंह बघेल

प्रेषित समय :21:32:20 PM / Wed, Nov 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. कांग्रेस नेत्री डॉ. अंजू सिंह बघेल ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय कुंवर अर्जुन सिंह को उनकी जन्मतिथि पर श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि दाऊ साहब का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में गरिमा, वैचारिक प्रतिबद्धता, सामाजिक समरसता और जनसेवा का ऐसा उदाहरण है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है. उन्होंने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह ने प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक अपनी विशिष्ट पहचान बनाई. उनका राजनीतिक जीवन केवल पद और प्रतिष्ठा की यात्रा नहीं था, बल्कि जनहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों का महत्वपूर्ण अध्याय था.

डॉ. अंजू सिंह बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह का व्यक्तित्व जितना प्रभावशाली था, उनकी विचारधारा और राजनीतिक दृष्टि भी उतनी ही व्यापक थी. उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और अवसर पहुंचाने का जरिया समझा. उनके जीवन में सेवा की सार्थकता का प्रबल भाव था. वे हित और अहित के बीच अंतर को गहराई से समझते थे और सार्वजनिक जीवन में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते थे.

विधानसभा में दिया संदेश आज भी लोकतंत्र के लिए प्रासंगिक
डॉ. बघेल ने कुंवर अर्जुन सिंह के राजनीतिक जीवन के एक महत्वपूर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि 5 सितंबर 1957 को मध्य प्रदेश विधानसभा में उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और सार्वजनिक जिम्मेदारी को लेकर जो विचार रखे थे, वे आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए मार्गदर्शक हैं. उन्होंने सदन में कहा था कि आज हम सब एक स्वतंत्र भारत की इमारत खड़ी कर रहे हैं. इस समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि नींव डालते वक्त ऐसा कोई काम न किया जाए, जिससे एक धक्का लगने पर पूरी इमारत ढह जाए.

डॉ. बघेल के अनुसार, यह विचार केवल उस समय की राजनीतिक परिस्थिति तक सीमित नहीं था, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती, संस्थाओं की विश्वसनीयता और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी का स्थायी संदेश था. किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव विश्वास, जवाबदेही, संवैधानिक मर्यादा और जनहित से मजबूत होती है. यदि इन मूल्यों से समझौता किया जाता है तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद कमजोर होती है. दाऊ साहब ने अपने विचारों के माध्यम से राजनीति में दूरदर्शिता और जिम्मेदारी का महत्व समझाया था.

कबीर के विचारों से प्रभावित था उनका व्यक्तित्व
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह को राजनीति का कबीर कहा जाना उनके व्यक्तित्व की विशेषता को दर्शाता है. कबीर का दर्शन एकता, सद्भाव और सामाजिक समरसता का दर्शन है. इसमें जाति, पंथ और बाहरी आडंबरों से ऊपर उठकर मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखने की प्रेरणा मिलती है. दाऊ साहब के विचारों और व्यवहार में भी यही व्यापक दृष्टिकोण दिखाई देता था.

उन्होंने कहा कि कबीर के दोहे केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले विचार हैं.

“यह संसार सकल है मेला, राम कहे ते सूचा.
कहैं कबीर नांउ नहीं छोड़ो, गिरत परत चढ़ि ऊंचा.”

डॉ. बघेल ने कहा कि कबीर की यह विचारधारा जीवन में कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य और सिद्धांतों पर कायम रहने की प्रेरणा देती है. कुंवर अर्जुन सिंह के सार्वजनिक जीवन में भी यही दृढ़ता और वैचारिक स्पष्टता दिखाई देती थी. वे परिस्थितियों के दबाव में अपने मूल सिद्धांतों से समझौता करने के पक्षधर नहीं थे.

जाति-पांति और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने की सोच
डॉ. अंजू सिंह बघेल ने कहा कि दाऊ साहब की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी सहजता, सरलता, दृढ़ता और निर्दोष चित्त शामिल था. वे जाति-पांति और सामाजिक भेदभाव से मुक्त एक सच्चे इंसान के रूप में पहचाने जाते थे. मध्य प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी बात पूरी मुखरता और साहस के साथ रखी.

उन्होंने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह का मानना था कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिले. राजनीति का उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत करना होना चाहिए. उनके विचारों में सामाजिक न्याय और समरसता का विशेष स्थान था.

डॉ. बघेल के मुताबिक, दाऊ साहब ने अपने राजनीतिक जीवन में किसानों, गरीबों, कमजोर वर्गों, हरिजन, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया. वे मानते थे कि शासन की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है. उनका प्रयास रहता था कि कमजोर और वंचित तबकों को मुख्यधारा में आगे बढ़ने के अवसर मिलें.

लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति थी गहरी प्रतिबद्धता
डॉ. बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह परंपराओं के पोषक थे और लोकतांत्रिक मूल्यों को विशेष महत्व देते थे. वे शासन में रहते हुए भी लोगों के दिलों पर राज करने की क्षमता रखते थे. उनका सार्वजनिक जीवन यह संदेश देता है कि जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसके व्यवहार, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से होती है.

उन्होंने कहा कि आज जब लोकतांत्रिक संस्थाओं, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक मर्यादाओं को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता है, तब दाऊ साहब के विचारों का पुनर्पाठ और भी जरूरी हो जाता है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उनके आदर्शों और जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारना चाहिए. लोकतांत्रिक देश में कांग्रेस की मजबूत जड़ों को किसी भी तानाशाही ताकत के सामने कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए.

जन्मदिवस पर आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेने की अपील
डॉ. अंजू सिंह बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह के जन्मदिवस पर केवल पुष्पांजलि अर्पित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों को जीवन और राजनीतिक व्यवहार में अपनाना भी जरूरी है. देशहित में आपसी सामंजस्य, एकता और सद्भाव को मजबूत करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

उन्होंने कहा कि दाऊ साहब का जीवन संघर्ष, निर्माण और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. विपरीत परिस्थितियों में भी निराश होने के बजाय नए निर्माण का संकल्प लेना चाहिए. उनके विचारों की भावना को इन पंक्तियों में व्यक्त किया जा सकता है—

“नाश के दुख से कभी दबता, नहीं निर्माण का सुख.
प्रलय की निस्तब्धता में सृष्टि का, नव गान फिर फिर.
नीड़ का निर्माण फिर फिर, नेह का आह्वान फिर फिर.”

डॉ. बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह जैसे महान राजनेता और सामाजिक मूल्यों के धनी व्यक्तित्व को शत-शत नमन करते हुए सभी कांग्रेसजनों को संकल्प लेना चाहिए कि वे लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, एकता और सद्भाव की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे. यही दाऊ साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और उनके विचारों को जीवित रखने का सार्थक प्रयास होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-