रादुवि का बड़ा प्रशासनिक फेलियर, 170 अभ्यर्थियों के डीडी एक्सपायर, दो साल से प्रशासनिक अस्थिरता का असर

रादुवि का बड़ा प्रशासनिक फेलियर, 170 अभ्यर्थियों के डीडी एक्सपायर, दो साल से प्रशासनिक अस्थिरता का असर

प्रेषित समय :18:53:55 PM / Wed, Nov 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नगर प्रतिनिधि,  जबलपुर. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा अब सहायक प्राध्यापक पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है. विश्वविद्यालय में 28 पदों पर प्रस्तावित सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया गंभीर संकट में फंस गई है. अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क के रूप में लिए गए करीब 170 डिमांड ड्राफ्ट निर्धारित समय पर बैंक में जमा नहीं कराए गए. नतीजतन उनकी वैधता समाप्त हो गई और बैंक ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया. इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब अभ्यर्थियों को नए सिरे से डिमांड ड्राफ्ट बनवाने की नौबत आ सकती है.

28 पदों पर भर्ती के लिए जारी हुआ था विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन ने 23 मई 2026 को सहायक प्राध्यापक के 28 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 25 जून 2026 निर्धारित की गई थी. भर्ती के लिए अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से 1000 रुपये और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से 500 रुपये आवेदन शुल्क डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से मांगा गया था. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय के स्थापना विभाग की जिम्मेदारी थी कि प्राप्त डिमांड ड्राफ्ट को समय पर बैंक में जमा कराकर शुल्क की प्रक्रिया पूरी की जाए.

स्थापना विभाग की लापरवाही से एक्सपायर हुए डीडी

आरोप है कि स्थापना विभाग के अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से प्राप्त डिमांड ड्राफ्ट को निर्धारित समय सीमा में बैंक में जमा नहीं कराया. करीब 170 अभ्यर्थियों के डीडी लंबे समय तक विश्वविद्यालय में ही पड़े रहे. समय बीतने के साथ इनकी वैधता समाप्त हो गई. विश्वविद्यालय प्रशासन की इस चूक का पता तब चला, जब अक्टूबर में संबंधित डिमांड ड्राफ्ट बैंक शाखा में जमा कराने के लिए ले जाए गए.

बैंक ने डीडी स्वीकार करने से किया इनकार

अक्टूबर माह में विश्वविद्यालय का अमला सभी डिमांड ड्राफ्ट लेकर बैंक पहुंचा, लेकिन जांच के बाद बैंक प्रबंधन ने उनकी समय सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए उन्हें भुनाने से इनकार कर दिया. बैंक की ओर से स्पष्ट किया गया कि अब इन डिमांड ड्राफ्ट को संबंधित अभ्यर्थियों को वापस करना होगा. उम्मीदवारों को अपने स्तर पर संबंधित बैंकों से नए डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर लाने होंगे. इसके बाद ही शुल्क जमा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.

दो साल से कुलसचिव का पद भी बना प्रशासनिक चुनौती

विश्वविद्यालय की प्रशासनिक अव्यवस्था के पीछे पिछले दो वर्षों से कुलसचिव पद पर स्थायित्व नहीं होना भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस अवधि में कोई अधिकारी लंबे समय तक कुलसचिव पद पर नहीं टिक सका. इसका असर विश्वविद्यालय के नियमित प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ रहा है. सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया पहले ही विभिन्न कारणों से प्रभावित है और परीक्षा आयोजन में छह महीने से अधिक का विलंब बताया जा रहा है.

अभ्यर्थियों के सामने दोबारा शुल्क जमा करने की परेशानी

डिमांड ड्राफ्ट की वैधता समाप्त होने से अभ्यर्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है. अब उन्हें दोबारा बैंक जाकर डिमांड ड्राफ्ट बनवाने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है. इससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ेंगे. सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय के स्तर पर हुई प्रशासनिक चूक का खामियाजा अभ्यर्थी क्यों भुगतें.

अब विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि करीब 170 डिमांड ड्राफ्ट समय पर बैंक में जमा क्यों नहीं कराए गए और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है. साथ ही यह भी देखना होगा कि अभ्यर्थियों को दोबारा शुल्क जमा करने की परेशानी से कैसे बचाया जाए और भर्ती प्रक्रिया को बिना अनावश्यक विलंब के आगे कैसे बढ़ाया जाए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-