2040 तक 6G तकनीक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 1.24 ट्रिलियन डॉलर का फायदा, स्पेक्ट्रम की कमी से 520 अरब डॉलर का नुकसान होने का खतरा

2040 तक 6G तकनीक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 1.24 ट्रिलियन डॉलर का फायदा, स्पेक्ट्रम की कमी से 520 अरब डॉलर का नुकसान होने का खतरा

प्रेषित समय :21:15:17 PM / Thu, Nov 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मोबाइल नेटवर्क की छठी पीढ़ी यानी 6G तकनीक आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है. GSMA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 6G नेटवर्क वर्ष 2040 तक दुनिया की अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकते हैं. हालांकि, इसके लिए जरूरी रेडियो स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराया गया तो इस संभावित आर्थिक लाभ का 42 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 520 अरब डॉलर गंवाना पड़ सकता है. रिपोर्ट में सरकारों से 2030 तक अतिरिक्त मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की अपील की गई है.

वैश्विक GDP में 0.7 प्रतिशत योगदान का अनुमान

GSMA के आकलन के अनुसार, 6G तकनीक वर्ष 2040 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 0.7 प्रतिशत के बराबर योगदान दे सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), औद्योगिक ऑटोमेशन, इमर्सिव डिजिटल सेवाओं और अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी से इस आर्थिक वृद्धि को गति मिलने की उम्मीद है.

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं होने पर 6G नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार प्रभावित हो सकता है. इससे अनुमानित 1.24 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक लाभ में से 520 अरब डॉलर तक का नुकसान होने की आशंका है.

GSMA के चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर जॉन गिउस्टी के मुताबिक, आने वाले कुछ वर्षों में स्पेक्ट्रम नीति को लेकर लिए जाने वाले फैसले यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि 6G तकनीक की आर्थिक क्षमता का कितना लाभ हासिल किया जा सकेगा.

मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज को सबसे ज्यादा फायदा

रिपोर्ट के अनुसार, 6G तकनीक से सबसे अधिक लाभ मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र को मिलने की संभावना है. 6G के अनुमानित आर्थिक योगदान में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और फाइनेंशियल सर्विसेज की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

इसके अलावा निर्माण क्षेत्र का योगदान 13 प्रतिशत और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र का योगदान 12 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. औद्योगिक रोबोटिक्स, AI आधारित कनेक्टिविटी और आधुनिक डिजिटल सेवाएं इन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

AI और सैटेलाइट कनेक्टिविटी से बदलेगा नेटवर्क का स्वरूप

GSMA के मुताबिक, 6G तकनीक पिछली मोबाइल नेटवर्क पीढ़ियों से काफी अलग होगी. इसे शुरुआत से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा. इससे नेटवर्क केवल डेटा ट्रांसफर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जरूरत के मुताबिक निर्णय लेने और इंटेलिजेंट नेटवर्क मैनेजमेंट जैसी क्षमताओं से लैस हो सकेंगे.

6G में इंटीग्रेटेड सेंसिंग तकनीक, औद्योगिक रोबोटिक्स, एडवांस्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं और स्थलीय नेटवर्क के साथ सैटेलाइट कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे जमीन पर मौजूद मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट आधारित सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है.

6G के आर्थिक योगदान में मिड-बैंड स्पेक्ट्रम की अहम भूमिका

रिपोर्ट में मिड-बैंड स्पेक्ट्रम को 6G के आर्थिक लाभ का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया है. अनुमान है कि 6G से होने वाले कुल आर्थिक योगदान में मिड-बैंड स्पेक्ट्रम की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत हो सकती है.

वहीं, लो-बैंड स्पेक्ट्रम का योगदान लगभग 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसकी मदद से ग्रामीण क्षेत्रों, इमारतों के अंदर और उन इलाकों तक नेटवर्क कवरेज पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां अभी कनेक्टिविटी सीमित है.

सरकारों से 2030 तक अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की अपील

6G के संभावित लाभ हासिल करने के लिए GSMA ने सरकारों से वर्ष 2030 तक कम से कम 2 GHz अतिरिक्त मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की अपील की है. इसमें अपर 6 GHz रेंज के कुछ हिस्सों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है. इसके साथ ही 600 MHz बैंड उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि नेटवर्क कवरेज बेहतर हो और कनेक्टेड डिवाइस को सपोर्ट मिल सके.

उद्योग संगठन ने नियामकों से स्पष्ट राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप तैयार करने को भी कहा है. इससे दूरसंचार कंपनियों को भविष्य के नेटवर्क विस्तार के लिए निवेश और योजना बनाने में निश्चितता मिल सकेगी.

2027 में वैश्विक स्तर पर होंगे स्पेक्ट्रम आवंटन पर फैसले

यह रिपोर्ट वर्ष 2027 में होने वाले वर्ल्ड रेडियो कम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस (WRC) से पहले आई है. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उभरती तकनीकों के लिए भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण चर्चा और फैसले होने की उम्मीद है.

कुल मिलाकर, 6G तकनीक को भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम आधार माना जा रहा है. लेकिन इसकी सफलता केवल तकनीकी विकास पर निर्भर नहीं करेगी. पर्याप्त स्पेक्ट्रम, स्पष्ट सरकारी नीतियां और दूरसंचार क्षेत्र में समय पर निवेश भी यह तय करेंगे कि 6G से मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभ को कितनी हद तक वास्तविकता में बदला जा सकेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-