जबलपुर. जबलपुर रेल मंडल के स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन पर आज उस वक्त सनसनी फैल गई, जब अचानक एक टावर वैगन के पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) और कई रेलकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली. पलक झपकते ही रेलवे का आपातकालीन सायरन गूंज उठा और देखते ही देखते कटनी, कछपुरा और जबलपुर से दुर्घटना राहत ट्रेन व मेडिकल वैन सायरन की चीख के साथ घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ीं.
घटनास्थल पर अफरा-तफरी के बीच अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और राहत-बचाव कार्यों की रफ्तार देख हर कोई हैरान रह गया. हालाँकि, राहत की साँस तब आई जब पता चला कि यह कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि रेलवे की आपातकालीन तैयारियों को परखने के लिए किया गया एक विशाल आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल था. दोपहर 1.10 बजे बुलाई गई इस आपातकालीन स्थिति में रेलवे के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और त्वरित कार्रवाई का ऐसा नजारा देखने को मिला.
जिसने अधिकारियों की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी—मात्र कुछ ही मिनटों में राहत दल मौके पर पहुंच गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए 1.50 बजे इस मॉक ड्रिल के सफल समापन की घोषणा की. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कड़े अभ्यासों का मकसद किसी भी अनहोनी या भीषण खतरे से निपटने के लिए रेलवे तंत्र को पूरी तरह से लोहा-मजबूत बनाना है, ताकि आपातकाल में यात्रियों और कर्मचारियों की जान की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके.

