राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, बोले- वोटर लिस्ट से तय होंगे गरीबों के अधिकार तो यह हक की चोरी है

राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, बोले- वोटर लिस्ट से तय होंगे गरीबों के अधिकार तो यह हक की चोरी है

प्रेषित समय :18:43:06 PM / Fri, Nov 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी को पहचान का प्रमुख आधार बनाने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और योजनाओं को वोटर आईडी से जोड़ने का फैसला आम नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है.

राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने मंत्रालय की योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार की जगह मतदाता पहचान पत्र (EPIC नंबर) और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को आधार बनाने की बात कही थी.

SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. उनका कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ भी मतदाता पहचान पत्र के आधार पर तय किया गया तो जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटेंगे, उनके सामने सरकारी सहायता पाने का संकट खड़ा हो सकता है.

उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. राहुल गांधी ने दावा किया कि वोटर लिस्ट और सरकारी योजनाओं को आपस में जोड़ना भविष्य में आम लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है.

राशन, पेंशन और मनरेगा को लेकर जताई आशंका

कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि यदि यह व्यवस्था आगे दूसरे सरकारी कार्यक्रमों तक पहुंची तो राशन वितरण, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन, मनरेगा मजदूरी, प्रधानमंत्री आवास योजना और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि मतदान करना नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, इसे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अनिवार्य शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने गरीबों की पेंशन और राशन को वोटर कार्ड से जोड़ने की संभावित व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे केवल वोट चोरी नहीं, बल्कि लोगों के अधिकारों की चोरी बताया.

ललन सिंह के बयान से शुरू हुआ विवाद

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 30 अक्टूबर को पंचायती राज मंत्रालय के एक कार्यक्रम में लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार के स्थान पर EPIC नंबर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण इस्तेमाल करने की बात कही थी. इसके बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस व्यवस्था के दायरे और इसके आधिकारिक स्वरूप को लेकर सवाल पूछे.

हालांकि, फिलहाल मंत्री का बयान पंचायती राज मंत्रालय की योजनाओं के संदर्भ में सामने आया है. किन योजनाओं में यह व्यवस्था लागू होगी, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.

राहुल गांधी ने अपने बयान में केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी गरीब नागरिक के बुनियादी अधिकारों को उसके मतदाता पहचान पत्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-