हाईकोर्ट में सरकार ने दिया जबाव, 100 मीटर के दायरे में नहीं आते नर्सरी-प्राइमरी स्कूल, याचिकाकर्ता ने कहा- बच्चों पर पड़ेगा बुरा असर

हाईकोर्ट में सरकार ने दिया जबाव, 100 मीटर के दायरे में नहीं आते नर्सरी-प्राइमरी स्कूल, याचिकाकर्ता ने कहा- बच्चों पर पड़ेगा बुरा असर

प्रेषित समय :17:04:28 PM / Sat, Nov 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट में संजीवनी नगर गढ़ा थाना क्षेत्र स्थित एक ही इमारत में शराब दुकान और स्कूल के संचालन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2023 में आबकारी नियमों (जनरल एप्लीकेशन रूल्स) में किए गए संशोधन के तहत 'प्राइमरीÓ और 'प्री-प्राइमरीÓ कक्षाएं स्कूल या शिक्षण संस्थान (एजुकेशनल इंस्टीट्यूट) की आधिकारिक परिभाषा के दायरे में नहीं आती हैं.

जबलपुर निवासी अजय पटेल ने अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा के माध्यम से यह याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि संजीवनी नगर के मुख्य मार्ग पर स्थित एक ही बहुमंजिला इमारत के एक हिस्से में देशी-विदेशी शराब दुकान और अहाता संचालित हो रहा है, जबकि उसी भवन में संस्कार भारती नाम से निजी स्कूल भी चल रहा है. आबकारी नियमों के अनुसार, शिक्षण संस्थानों से तय दूरी पर ही शराब दुकान की अनुमति दी जा सकती है. ऐसे में एक ही छत के नीचे बच्चों की पढ़ाई और शराब की बिक्री नियमों के विरुद्ध है.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाए. याचिकाकर्ता के वकील का तर्क है कि वर्ष 2018 के जनरल एप्लीकेशन नियमों के तहत 100 मीटर के दायरे में शराब दुकान संचालित नहीं हो सकती थी. हालांकि, 2023 के संशोधन का हवाला देकर प्राइमरी और नर्सरी स्कूलों को शिक्षण संस्थान की परिभाषा से बाहर कर दिया गया. याचिका में चिंता जताई गई है कि प्राइमरी स्कूल के छोटे बच्चों पर शराब दुकान और अहाते का मानसिक व शारीरिक दुष्प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन नियमों में किए गए संशोधन के कारण इस पहलू को नजरअंदाज किया जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-