जबलपुर. बच्चों की शिक्षा से जुड़े संस्थान के आसपास सुरक्षित और अनुकूल वातावरण बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है. लेकिन जब एक ही भवन में स्कूल और शराब दुकान संचालित होने की शिकायत सामने आए तो यह व्यवस्था और निगरानी दोनों पर सवाल खड़े करती है. जबलपुर के संजीवनी नगर में ऐसा ही मामला हाईकोर्ट पहुंचा है. यहां एक भवन में संस्कार भारती नाम से स्कूल और उसी परिसर के दूसरे हिस्से में शराब दुकान संचालित होने का आरोप लगाया गया है. मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही जिला कलेक्टर को शिकायत पर समयबद्ध निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.
बच्चों के शैक्षणिक वातावरण को लेकर उठाया सवाल
संजीवनी नगर निवासी अजय पटेल ने जनहित याचिका दायर कर इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है. याचिका में कहा गया है कि क्षेत्र के मुख्य मार्ग पर स्थित एक ही भवन में स्कूल और शराब दुकान संचालित हो रहे हैं. भवन के एक हिस्से में शराब का व्यवसाय किया जा रहा है, जबकि दूसरे हिस्से में संस्कार भारती नाम से स्कूल चल रहा है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था बच्चों के शैक्षणिक वातावरण और सार्वजनिक हित से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है. स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों, अभिभावकों और आसपास के लोगों पर इसके संभावित प्रभावों की जांच जरूरी है. याचिका में प्रशासन से इस स्थिति पर कार्रवाई की मांग की गई है.
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
अजय पटेल ने इस संबंध में जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ता ने 23 मार्च 2026 को जिला कलेक्टर के समक्ष आवेदन भी दिया था.
याचिका में प्रशासनिक निष्क्रियता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है. सवाल यह है कि जब किसी शैक्षणिक संस्थान के साथ शराब दुकान के संचालन को लेकर शिकायत की गई थी, तो संबंधित विभागों ने उस पर क्या जांच की और अब तक क्या कार्रवाई की गई.
हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों को जारी किया नोटिस
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने पक्ष रखा. राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह उपस्थित हुए.
सुनवाई के दौरान कलेक्टर के समक्ष लंबित आवेदन का मुद्दा भी सामने आया. इस पर युगलपीठ ने जिला कलेक्टर को अगली सुनवाई से पहले आवेदन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए.
छह नवंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि कलेक्टर द्वारा लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ता को दी जाए और आदेश की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की जाए. मामले की अगली सुनवाई छह नवंबर को निर्धारित की गई है.
इस सुनवाई में प्रशासनिक निर्णय और संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे. न्यायालय के सामने यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित भवन में शराब दुकान का संचालन किन अनुमतियों और नियमों के तहत किया जा रहा है.
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू केवल एक भवन में दो अलग-अलग गतिविधियों का संचालन नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी है. आबकारी विभाग को शराब दुकान के लाइसेंस और निर्धारित शर्तों की जांच करनी होगी, जबकि जिला प्रशासन को शिकायत में उठाए गए तथ्यों पर निर्णय लेना है.
फिलहाल हाईकोर्ट ने शराब दुकान के संचालन को अवैध घोषित नहीं किया है. इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, प्रशासनिक जांच और न्यायालय के आगामी निर्णय से स्पष्ट होगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

