छात्राओं ने सुई-धागे से दिखाई हुनर की ताकत, फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षण के बाद सजाई परिधान प्रदर्शनी

छात्राओं ने सुई-धागे से दिखाई हुनर की ताकत, फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षण के बाद सजाई परिधान प्रदर्शनी

प्रेषित समय :19:41:18 PM / Sat, Oct 31st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. हुनर को अवसर मिले तो साधारण हाथ भी अपनी प्रतिभा से नई पहचान बना सकते हैं. इसी सोच को साकार करते हुए प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत विशेष फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया. दीपोत्सव के अवसर पर आयोजित परिधान उत्सव में छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण के दौरान स्वयं तैयार किए गए वस्त्रों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई. इस आयोजन में सुई-धागे से तैयार परिधानों के माध्यम से विद्यार्थियों की रचनात्मकता, मेहनत और व्यावहारिक कौशल देखने को मिला.

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के संभागीय अतिरिक्त संचालक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी, संभागीय सलाहकार प्रो. अरुण शुक्ल, प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. महेन्द्र कुशवाहा और फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षक जीनत खानम सहित महाविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे.

विद्यार्थियों ने खुद तैयार किए आकर्षक परिधान
प्रशिक्षण के बाद आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार किए गए कपड़ों को प्रस्तुत किया. द्रोपती कुशराम, वर्षा टांडिया, बिमलेश आदिवासी और सोना चौधरी ने स्वयं निर्मित परिधान पहनकर अपनी डिजाइनिंग कला और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया. उनके बनाए परिधानों में रंगों के चयन, सिलाई और डिजाइन की समझ दिखाई दी. आयोजन में मौजूद अतिथियों और शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की.

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए. इससे विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और उन्हें अपने कौशल को आगे विकसित करने की प्रेरणा मिली.

कटिंग-सिलाई से लेकर आधुनिक फिनिशिंग तक सीखी तकनीक
फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि वस्त्र निर्माण की व्यावहारिक बारीकियों से भी परिचित कराया गया. प्रशिक्षक जीनत खानम ने विद्यार्थियों को परिधान रेखांकन, कपड़ों की कटिंग, सिलाई, रंग संयोजन और आधुनिक फिनिशिंग की तकनीकें सिखाईं.

प्रशिक्षण में विद्यार्थियों ने कपड़े की प्रकृति और डिजाइन के अनुरूप उसकी कटिंग करने, नाप लेने, सिलाई में सावधानी बरतने तथा तैयार परिधान को आकर्षक रूप देने का अभ्यास किया. पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन के मेल से त्योहार के अनुरूप परिधान तैयार करने पर भी जोर दिया गया.

पढ़ाई के साथ रोजगार और स्वरोजगार का अवसर
महाविद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक डिग्री ही पर्याप्त नहीं है. विद्यार्थियों के पास व्यावहारिक कौशल होना भी जरूरी है. फैशन डिजाइनिंग जैसे प्रशिक्षण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देते हैं. विद्यार्थी भविष्य में सिलाई-कढ़ाई, बुटीक, परिधान निर्माण और डिजाइनिंग से जुड़े काम शुरू कर सकते हैं.

कार्यक्रम में डॉ. ए.सी. तिवारी, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. विभा निगम, डॉ. तृप्ति उकास, डॉ. संघप्रिया तिवारी तथा डॉ. तरुणेन्द्र साकेत सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे. आयोजन ने यह संदेश दिया कि कॉलेजों में पढ़ाई के साथ कौशल आधारित प्रशिक्षण युवाओं को रोजगार के नए विकल्पों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-