डाॅ. आरके मालोत: कोरोना का संदेश- सतर्कता बने दिनचर्या का हिस्सा!

डाॅ. आरके मालोत: कोरोना का संदेश- सतर्कता बने दिनचर्या का हिस्सा!

प्रेषित समय :06:54:33 AM / Wed, Jun 30th, 2021

जयपुर ((पल-पल इंडिया). देश में चिकित्सा विषयों के अग्रणी लेखक और समाजसेवी डाॅ. आरके मालोत का कहना है कि पिछले लंबे समय से चल रहे कोरोनाकाल का मुख्य संदेश यही है कि सतर्कता और सुरक्षा को दिनचर्या का हिस्सा बनाये तथा जीवन में नैतिक मूल्यों के अनुरूप आचरण को अपनाएं, ताकि स्वस्थ व सुखी रहें.

एक विशेष बातचीत में डॉ. मालोत ने कहा कि कोरोनाकाल इस सदी की सबसे बड़ी घटना है, जिसने दुनिया की रफ्तार को रोक कर सारी व्यवस्थाओं को ठप्प कर दिया और प्रकृति के महत्व को समझने व प्रकृति की व्यवस्थाओं में दखलंदाजी से बचने का संकेत दिया है.

डाॅ. मालोत ने कहा कि कोरोना वायरस कहां से आया व कैसे आया यह अलग विषय है, इस वक्त तो, कोरोना के बदलते स्वरूप और उससे बचाव के तरीके पर ध्यान केंद्रित किया जाना आवश्यक है. हालात यह है कि लगातार और तेजी से परिवर्तित हो रहे इस वायरस के स्वरूप ने मानव की सुरक्षा में लगे अनुसंधानकर्ताओं को भी परेशानी में डाल दिया है.

हालात ऐसे हैं कि दुनिया में वैक्सीन लगने के बावजूद पूर्णतः सुरक्षा के लिये कोई भी आश्वस्त नहीं हो पा रहा है. कोरोना से बच जाने का भ्रम पालने वाले लोगों के समक्ष नए वेरिएंट ने आकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवा दी है.

अंतिम सत्य यही है कि सुरक्षा करें और इससे बचाव का एकमात्र उपाय मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना और सुरक्षा के लिये सैनिटाइजर का उपयोग या हाथों को धोकर सुरक्षित करते रहना है.

स्वच्छन्द जीवन शैली के अभ्यस्त हो चुके लोगों के लिये कोरोना एक चेतावनी के रूप में उभरा है, जिसने लोगों को परिवार के साथ रहने, सुरक्षा पर ध्यान देने व सकारात्मक सोच के साथ काम करने के लिये प्रेरित किया है.

मूल बात यह है कि सावधानी व सुरक्षा के साथ पौष्टिक भोजन, योग, ध्यान और शारीरिक व्यायाम आदि को दिनचर्या का हिस्सा बनाने के साथ सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आदत डालना है. दुनिया जैविक युद्ध के दौर में प्रवेश कर रही है, ऐसा माना जा रहा है अतः कोरोना की तरह अन्य वायरस व इसके बदलते स्वरूप वाले वायरस के आने की आशंकाएं तो अब बनी रहेंगी अतः हमारी जीवन शैली में बदलाव कर हम अपनी सुरक्षा को पुख्ता करें.

दुनिया तरक्की के सबसे प्रभावी दौर तक पहुंच गई है और तकनीकी व वैज्ञानिक प्रगति के चलते सुख सुविधाओं का विस्तार भी हुआ है परन्तु इसके विभिन्न दुष्प्रभावों को भी इसके साथ झेलना होगा. प्रकृति से खिलवाड़ की प्रवृत्ति से होने वाले नुकसानों को भी हमें उठाना पड़ेगा, इससे हम बच नहीं सकते हैं.

कोरोना के चलते आर्थिक, सामाजिक और हर तरह की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है, लोगों की जीवनशैली बदल गई हैं, कामकाज के तौर तरीके बदल गये हैं, जीवनयापन की सोच में बदलाव आया है. कोरोना के चलते हर व्यक्ति में बदलाव आया है, ऐसा भी नही है. कई लोग आज भी अपने परंपरागत अंदाज और आदतों के अनुरूप चल रहे हैं और अब तक सुरक्षित हैं, यह सिर्फ उनकी प्रतिरोध क्षमता और भाग्य है अन्यथा कोरोना के कहर से प्रभावित होने वालों की तादाद लाखों में पहुंच गई है. कई सुरक्षा के अनुरूप आचरण व काम करने वाले इसकी चपेट में आ गये, तो कई बेपरवाह भी आराम से काम कर रहे हैं. यह स्थितियां कई लोगों को लापरवाही की और बढ़ाने का काम कर सकती हैं, ऐसी स्थिति में अपनी सोच को सुरक्षात्मक बनाकर रहने में ही भलाई है!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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