प्रदीप द्विवेदी. किसान आंदोलन शुरू हुए लंबा समय गुजर गया है और किसी ने सोचा नहीं होगा कि केंद्र सरकार तमाम अत्याचारों, कोशिशों के बावजूद इसे तोड़ नहीं पाएगी, अलबत्ता किसानों ने कई जगह बीजेपी के सियासी सपनेे जरूर तोड़ दिए हैं!
किसान आंदोलन कब तक चलेगा? यह कोई नहीं जानता, लेकिन इस दौरान कुछ खास बातें जरूर सामने आई हैं....
एक- किसानों को दिल्ली आने से पूरी सख्ती से रोका गया, किसान आंदोलन को बदनाम किया गया, उकसाया गया, लेकिन किसान संयम के साथ मैदान में डटे रहे हैं.
दो- प्रदर्शन स्थल पर भले ही किसान कम-ज्यादा होते रहते हैं, लेकिन किसान आंदोलन की भावना गांव-गांव तक पहुंच गई है, मतलब.... किसान आंदोलन अपने मकसद में कामयाब हो गया है.
तीन- किसान आंदोलन के कारण बंगाल जैसे राज्य में बीजेपी को खासा नुकसान हुआ है और आगे भी कई राज्यों के चुनावों में इसका असर दिखाई देगा, पंजाब में बीजेपी के लिए कोई सियासी संभावना बची नहीं है, तो यूपी के विधानसभा चुनाव में भी इसका असर नजर आएगा.
चार- लेकिन, क्योंकि लोकसभा चुनाव 2024 में हैं, लिहाजा केंद्र सरकार को कोई खास परवाह नहीं है कि विधानसभा चुनाव में क्या होता है.
पांच- यदि 2024 तक किसान आंदोलन चलता रहा, तो केंद्र सरकार का दोहरा नुकसान होगा, कृषि कानून बगैर उपयोग के वैसे ही पड़े रह जाएंगे और चुनाव के बाद सत्ता भी बीजेपी के हाथ से निकल सकती है, क्योंकि किसान आंदोलन वहीं पर ज्यादा असरदार है, जहां बीजेपी का विशेष प्रभाव है.
खबर है कि लखनऊ प्रवास के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत @RakeshTikaitBKU ने साफ-साफ कहा है कि जब तक तीनों केंद्रीय कृषि कानून पूरी तरह से वापस नहीं हो जाते हैं, तब तक दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का धरना प्रदर्शन खत्म नहीं होगा.
याद रहे, संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्र सरकार के बीच बातचीत कई महीनों से बंद है, लेकिन भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की सक्रियता बढ़ गई है.
यही नहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान भी किया है कि वह लोगों से, खासतौर से किसानों से भारतीय जनता पार्टी का बहिष्कार करने की अपील करेगा, जिसके लिए मिशन यूपी और उत्तराखंड भी शुरू होगा और जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होते तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा.
पिछले माह लखनऊ को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने चेतावनी दी थी कि- अब लखनऊ को भी दिल्ली की तरह बनाया जाएगा, जिस तरह दिल्ली में चारों तरफ के रास्ते सील किए गए, वैसे ही लखनऊ को भी चारों तरफ से घेरा जाएगा, इसकी तैयारी में हैं.
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का साफ कहना है कि- जब तक केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी, तब तक घर वापसी नहीं करेंगे. सियासी सयानों का मानना है कि जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं, तो ऐसा लगता नहीं है कि किसान आंदोलन खत्म होगा, इसका नुकसान केंद्र सरकार को तो तत्काल नहीं होगा, किन्तु बीजेपी की प्रादेशिक सरकारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी!
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Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-किसान महापंचायत जेवर गौतमबुद्धनगर#FarmersProtest pic.twitter.com/HXwM1rEyU9
— Rakesh Tikait (@RakeshTikaitBKU) August 8, 2021
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