लखनऊ. उत्तर प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक पार्टियां ताबड़तोड़ रैलियां कर रही हैं, वहीं बसपा अभी तक पूरी ताकत के साथ चुनावी समर में नहीं उतर पाई है. अन्य नेताओं की तुलना में मायावती इस बार कम एक्टिव नजर आ रही हैं. पीएम मोदी, सीएम योगी से लेकर अखिलेश यादव की तरह मायावती क्यों चुनावी रैलियां नहीं कर रही हैं, इस सस्पेंस से पर्दा उठ गया है. खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ताबड़तोड़ रैली न करने की वजह बताई है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी गरीबों की पार्टी है, उनके पास अन्य पार्टियों की तरह धन नहीं है और अगर वह रैलियां करेंगी तो आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा. इसलिए बसपा अन्य पार्टियों की नकल नहीं कर रही और ताबड़तोड़ रैलियां नहीं कर रही.
नए साल के मौके पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने देशवासियों और पार्टी के लोगों को नव वर्ष की बधाई दी. उन्होंने कहा कि करोड़ों गरीबों और छोटे व्यापारियों को वर्तमान में फिर से शुरू हो रही कोरोना की बीमारी से हिम्मत नहीं हारनी है. सभी वर्गों की हो रही कठिनाइयों से भी हिम्मत नहीं हारना है. हमें और आपको अपना उज्ज्वल भविष्य खुद बनाना है. मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य जिलों में होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा को जीताकर आप अपने बुरे दिन से मुक्ति पाने का सार्थक प्रयास कर सकते हैं.
केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले हवा-वाई घोषणाएं, वादें और शिलान्यास करती हैं, जिससे हमारी जनता का पैसा पानी की तरह बहा दिया जाता है. यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में यही देखने को मिल रहा है. ठंड में जो गर्मी चढ़ी है, वो गरीब के पैसे की ही गर्मी चढ़ी है. वो सरकारी खजाने की ही गर्मी चढ़ी है. सत्ता में पार्टी में नहीं होती तब ये ताबड़तोड़ जनसभा नहीं कर पाती. रिश्ते नाते पर कटाक्ष करने की याद नहीं आती.
मायावती ने चुनावी अभियान में न कूदने को लेकर हो रही आलोचनाओं पर कहा कि अगर मैं अन्य पार्टियों की नकल कर जनसभा करती हूं तो हम आर्थिक बोझ नहीं उठा पाएंगे. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी मूवमेंट वाली है, गरीबों की पार्टी है. दूसरी पार्टी की तरह धन की पार्टी नहीं है. चुनाव की तैयारी को लेकर हमारी अलग कार्यशैली है, जिसे हम बदलना नहीं चाहते हैं चाहे विरोधी कितना भी कटाक्ष करे. दूसरी पार्टी को हमारी चिंता नहीं करनी चाहिए हमें अपनी पार्टी की चिंता है. बता दें कि मायावती अन्य नेताओं की तुलना में इस बार कम एक्टिव नजर आ रही हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-यूपी में कहासुनी के बाद आपे से बाहर हुआ आबकारी विभाग का निलंबित सिपाही, चार को मारी गोली
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