नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पहले गुजरात में और अब राष्ट्रीय स्तर पर अपने 20 वर्षों के कार्यकाल के दौरान पर्यावरण और सतत विकास मेरे लिए प्रमुख फोकस क्षेत्र रहे हैं. उन्होंने कहा कि सफल जलवायु कार्यों के लिए भी पर्याप्त फाइनेंसिंग की जरूरत होती है. इसके लिए विकसित देशों को वित्त और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की जरूरत है. पीएम ने अपने संबोधन में कहा, रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल, रिकवर, री-डिजाइन और री-मैन्युफैक्चरिंग भारत के सांस्कृतिक लोकाचार का हिस्सा रहा है.
विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन TERI का प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है. इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का विषय ‘टूवर्ड्स अ रेजीलियंट प्लैनेटः एनश्योरिंग अ सस्टेनेबल एंड इक्वीटेबल फ्यूचर’ (परिस्थिति अनुकूल ग्रह की ओरः सतत और समतावादी भविष्य को सुनिश्चित करना) है. शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, सतत उत्पादन, ऊर्जा संक्रांति, वैश्विक साझा संसाधन और उनकी सुरक्षा जैसे वृहद विषयों पर पर चर्चा है. इस सम्मेलन में डोमिनिकन गणराज्य के राष्ट्रपति लुइस एबिनादेर, गयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान अली, संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे मोहम्मद, विभिन्न अंतर सरकारी संगठनों के प्रमुख, एक दर्जन से अधिक देशों के मंत्री एवं राजदूत और 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है.
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि 21वें विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन में आपके साथ जुड़कर मुझे खुशी हो रही है. पहले गुजरात में और अब राष्ट्रीय स्तर पर, मेरे 20 वर्षों के कार्यकाल के दौरान पर्यावरण और सतत विकास मेरे लिए प्रमुख फोकस क्षेत्र रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमने सुना है कि लोग हमारे ग्रह को नाजुक कहते हैं. लेकिन, यह नाजुक ग्रह नहीं है. नाजुक हम हैं. ग्रह और प्रकृति के प्रति हमारी प्रतिबद्धताएं भी नाजुक रही हैं. गरीबों तक समान ऊर्जा पहुंच हमारी पर्यावरण नीति की आधारशिला रही है. उज्ज्वला योजना के माध्यम से, 9 करोड़ से अधिक घरों को स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच प्रदान की गई है.
पीएम मोदी ने कहा कि मुझे इस बात की भी खुशी है कि भारत के दो और आर्द्रभूमियों को हाल ही में रामसर स्थलों के रूप में मान्यता मिली है. भारत में अब 49 रामसर स्थल हैं जो 10 लाख हेक्टेयर से अधिक में फैले हुए हैं. उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता केवल जलवायु न्याय के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है. भारत के लोगों की ऊर्जा आवश्यकता अगले 20 वर्षों में लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है. इस ऊर्जा को नकारना स्वयं लाखों लोगों के जीवन को नकारना होगा. सफल जलवायु कार्यों के लिए भी पर्याप्त वित्त पोषण की आवश्यकता होती है. इसके लिए विकसित देशों को वित्त और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की आवश्यकता है.
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से हमारा उद्देश्य है: एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड. हमें हर समय हर जगह विश्वव्यापी ग्रिड से स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना चाहिए. यह संपूर्ण विश्व दृष्टिकोण है, जिसके लिए भारत के मूल्य खड़े हैं. उन्होंने कहा कि LIFE- पर्यावरण के लिए जीवन शैली है. LIFE हमारे ग्रह को बेहतर बनाने के लिए जीवन शैली विकल्प बनाने के बारे में है. LIFE दुनियाभर में समान विचारधारा वाले लोगों का एक गठबंधन होगा जो स्थायी जीवन शैली को बढ़ावा देगा. मैं उन्हें 3पी कहता हूं – प्रो प्लैनेट पीपल.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-हमेशा पंजाब और देश की शान के खिलाफ गई कांग्रेस, सेना के शौर्य पर भी उठाए सवाल: पीएम मोदी
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