MP ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में समलैंगिक विवाह का विरोध

MP ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में समलैंगिक विवाह का विरोध

प्रेषित समय :20:13:52 PM / Mon, Jun 5th, 2023

पलपल संवाददाता, इंदौर. एमपी के इंदौर में आयोजित ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में समलैंगिक विवाह का कड़ा विरोध किया गया. बोर्ड द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की बैठक समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के हर प्रयास का कड़ा विरोध करती है.  इसे देश व मानवता के लिए एक बड़ा खतरनाक, घातक  व हानिकारक मानती है. बैठक में इस बात को लेकर भी खेद व्यक्त किया गया है कि समलैंगिक विवाह व पश्चिमी देशों में एलजीबीटी का अनैतिक व अश्लील आंदोलन अब हमारे देश को प्रभावित कर रहा है

मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड की बैठक में कहा गया कि हमारा देश एक धार्मिक देश है, हर धर्म में इन अप्राकृतिक व अनैतिक संबंधों का का विरोध किया है. इस मुद्दे पर इस्लाम का दृष्टिकोण बहुत साफ व स्पष्ट है. इस्लाम इसे अप्राकृतिक, अनैतिक व निषिद्ध मानता है. साथ ही इसे प्रजनन की प्राकृतिक प्रक्रिया के विपरीत और परिवारिक व्यवस्था को प्यस्त करने वाला समझता है. बोर्ड देश के सभी धर्म गुरुओं, समाज सुधारक, सामाजिक कार्यकर्तार्, बुद्धिजीवियों व राजनीतिक नेताओं से आह्वान करता है कि इसका कड़ा विरोध करें और इसे कानूनी औचित्य हासिल न करने दें. बैठक में इस बात को लेकर भी चर्चा हुई है कि देश में नफरत का जहर फैलाया जा रहा है. इसे राजनीतिक संघर्ष के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. जो देश के लिए बहुत हानिकारक है.  स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों, संविधान के संकलित कर्ताओं व इस देश के प्रथम निर्माताओं ने देश के लिए जो रास्ता चुना था यह उसके बिल्कुल विपरीत है. विभिन्न धर्मों, जनजातियों, भाषाओं व संस्कृतियों के लोगों ने सदियों से देश की सेवा की है. देश के विकास में समान भूमिका निभाई है. यदि ये सद्भाव व भाईचारा खो गया तो देश की एकता चकनाचूर हो जाएगी.  इसलिए ये सम्मेलन सरकार, देश से प्रेम करने वाले नागरिकों, धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों, न्यायविदों, राजनीतिक नेताओं व पत्रकारों से अपील करता है कि वे नफरत की इस आग को पूरी ताकत से बुझाने की कोशिश करें. नहीं तो ये आग एक ज्वालामुखी बन जाएगी और देश की सभ्यताए इसकी लोकप्रियता, इसके विकास व इसके नैतिक औचित्य सब कुछ जलकर राख हो जाएगा.

कानूनहीनता समाज को अराजक बना देती है-

बैठक में पास किए गए प्रस्ताव में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कानून मानव समाज को सभ्य बनाता है. अत्याचारियों को न्याय के कठघरे में खड़ा करता है, उत्पीडि़तों को न्याय दिलाता है. उसके लिए न्याय-प्राप्ति की आशा होती है. कानूनहीनता समाज को अराजक बना देती है, इसलिए सरकार हो या जनता, बहुसंख्यक हों या अल्पसंख्यकए सत्तापक्ष हो या विपक्ष, पूंजीपति हों या गरीब मजदूर सबके लिए जरूरी है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें. लेकिन दुर्भाग्य से इस समय देश में कानूनहीनता का माहौल बन रहा है.

समान नागरिक संहिता को लागू करना असंवैधानिक-

बैठक में कहा गया है कि देश के संविधान ने हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी है. ये उसका मौलिक अधिकार है. जिसमें पर्सनल लॉ भी शामिल है. ये सम्मेलन सरकार से अनुरोध करता है कि वह सभी नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करे. पर्सनल लॉ के तहत विभिन्न समूहों की जो पहचान है, उन्हें समाप्त करके समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात असंवैधानिक होगी. ये इतने विभिन्न, विविध धर्मों और संस्कृतियों वाले देश के लिए न तो उपयुक्त है और न ही उपयोगी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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