दिल्ली एलजी ने अरुंधति रॉय और शेख शौकत हुसैन पर मुकदमा चलाने की दी मंजूरी, यह है मामला

दिल्ली एलजी ने अरुंधति रॉय और शेख शौकत हुसैन पर मुकदमा चलाने की दी मंजूरी, यह है मामला

प्रेषित समय :19:19:48 PM / Tue, Oct 10th, 2023
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नई दिल्ली. दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने कश्मीर पर टिप्पणी के लिए अरुंधति रॉय, शेख शौकत हुसैन के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है. मामले में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली की अदालत के 27 नवंबर, 2010 के आदेश के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

एलजी ने कहा कि रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्व प्रोफेसर हुसैन के खिलाफ दिल्ली में आयोजित समारोह में सार्वजनिक भाषणों के लिए अपराध करने का प्रथम दृष्टया मामला बनता है. आगे कहा गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 153बी और 505 के तहत मामला बनता है.

हालांकि, राजद्रोह का मामला बनने के बावजूद, आईपीसी (देशद्रोह) की धारा 124 ए के तहत मंजूरी नहीं दी गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई, 2022 को एक अन्य मामले में निर्देश दिया था कि सभी लंबित मुकदमे, अपील और आईपीसी की धारा 124ए (देशद्रोह) के तहत तय किए गए आरोप के संबंध में कार्यवाही को स्थगित रखा जाएगा. उसके बाद सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 12 सितंबर, 2023 को मामले को संविधान पीठ को भेज दिया था.

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कहा था कि आईपीसी की धारा 124ए के तहत अपराध के लिए अभियोजन मंजूरी देने के अनुरोध पर फिलहाल फैसला नहीं लिया जा सकता. इस मामले में दो अन्य आरोपी- कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और दिल्ली विश्वविद्यालय के व्याख्याता सैयद अब्दुल रहमान गिलानी की मामले की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई है.

कश्मीर के सामाजिक कार्यकर्ता सुशील पंडित ने राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिए समिति (सीआरपीपी) के बैनर तले आयोजित सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से भाषण देने में शामिल विभिन्न व्यक्तियों/वक्ताओं के खिलाफ, तिलक मार्ग के पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. 21 अक्टूबर 2010 को एलटीजी ऑडिटोरियम, कोपरनिकस मार्ग पर आजादी- एकमात्र रास्ता, बैनर तले कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जिस मुद्दे पर चर्चा और प्रचार किया गया वह कश्मीर को भारत से अलग करना था. यह भी आरोप लगाया गया कि भाषण उकसाने वाली प्रकृति के थे, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और शांति खतरे में पड़ गई.

इसके बाद शिकायतकर्ता ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, नई दिल्ली की अदालत के समक्ष सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत शिकायत दर्ज की. इन आरोपियों के अलावा इस मौके पर उपस्थित अन्य लोगों में भीमा-कोरेगांव मामले के आरोपी माओवादी समर्थक वरवारा राव भी शामिल थे.

बयान में आगे कहा गया है कि गिलानी और रॉय ने कथित तौर पर प्रचार किया कि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था. साथ ही उस पर भारत के सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा कर लिया था. आगे कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर राज्य की भारत से आजादी के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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