घर के अंदर का वास्तु कैसा हो यह जानना जरूरी है. यदि वास्तु खराब है तो प्रगति रुक जाएगी, गृहकलह बढ़ जाएगा, बीमारी पीछे लग जाएगी या शांति और खुशहाली नष्ट हो जाएगी.
दिशा सही नहीं तो दशा भी सही नहीं : वैसे दिशाएं 10 होती हैं, लेकिन एक 11वीं दिशा भी होती है जिसे मध्य में माना जा सकता है अर्थात आप जहां खड़े हैं. ये 11 दिशाएं : ईशान, पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य और उत्तर. इसके अलावा 3 दिशाएं ऊपर, नीचे और मध्य में.
यदि आपके घर की दिशा पूर्व, आग्नेय, दक्षिण और नैऋत्य में से कोई एक है तो आपको इसके उपाय करने होंगे. पूर्व और अग्नेय मुखी मकान के वास्तुदोष को थोड़े बहुत उपाय करके मिटाया जा सकता है लेकिन यदि दक्षिण और नैऋत्यमुखी मकान है तो उसे त्यागने में ही भलाई है. दक्षिण भाग सीड़ी, ओवरहेड टंकी, अलमारी आदि से वजनदार बनाए.
यदि आपका मकान पूर्व या आग्नेय में है तो पूर्व-आग्नेय कोण में पूजाघर, पानी का स्थान नहीं होना चाहिए. सीढ़ियों का निर्माण, टॉयलेट, ड्राईंगरूम, स्टोर का निर्माण यहां किया जा सकता है. इसके अलावा इस दिशा में जनरेटर, बिजली का खम्भा या बिजली के मीटर इत्यादि लगाए जा सकते हैं.
जिस घर का खराब है मध्य भाग : घर की दिशाओं में सबसे आखिरी और बेहद महत्वपूर्ण दिशा है घर की मध्य दिशा. यह दिशा घर के बिलकुल बीचोबीच होने के कारण घर की हर दिशा से जुड़ी होती है इसीलिए किसी भी दिशा का नकारात्मक प्रभाव इस दिशा पर होना आम बात है. मध्य भाग खराब है तो ब्रह्मा का यह स्थान केतु का स्थान बन जाता है.
बहुत से घरों में देखा गया है कि बीच में गड्ढा होता है. हो सकता है कि घर के बीचोबीच कोई खंभा गड़ा हो, टॉयलेट या वॉशरूम बना हो या किसी भी प्रकार का भारी सामान रखा हो. अक्सर लोग यदि 15 बाई 50 या 20 बाई 60 का मकान है, तो उसके बीचोबीच लेट-बाथ बना लेते हैं. इस स्थान पर भारी सामान रखना या निर्माण कार्य करना भी गलत है. यह स्थान ईशान की तरह खाली होना चाहिए.
ऐसे घरों में कुछ न कुछ घटनाक्रम चलते ही रहते हैं. बीमारी, दुख पीछे लगे ही रहते हैं या घर के सदस्यों के दिमाग में शांति नहीं रहती है. परेशानियों से घिरे रहने वाले इस घर के मध्यभाग को ठीक कर देने से सभी ठीक होने लगता है. इससे घर-परिवार में सहजता और सृजनात्मक गतिविधियों का ह्रास होता है. घर में ऐसा हो तो परिवार में सुख-शांति घटती है. रहने वालों के बीच दूरियां बढ़ती हैं. संबंधों में गरमाहट कम होती है.
घर की छत : घर की छत पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते हैं. घर की छत कैसी हो यह जानना जरूरी है. घर की छत साफ-सुधरी होना जरूरी है.
* घर की छत में किसी भी प्रकार का उजालदान न हो. जैसे आजकल घर की छत में लोग दो-बाइ-दो का एक हिस्सा खाली छोड़ देते हैं उजाले के लिए. इससे घर में हमेशा हवा का दबाव बना रहेगा, जो सेहत और मन-मस्तिष्क पर बुरा असर डालेगा.
*तिरछी छत बनाने से बचें- छत के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि वह तिरछी डिजाइन वाली न हों. इससे डिप्रेशन और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं.
* घर की छत की ऊंचाई भी वास्तु अनुसार होना चाहिए.. यदि ऊंचाई 8.5 फुट से कम होती है तो यह आपके लिए कई तरह की समस्याएं लेकर आती है और जीवन में आगे बढ़ना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा है. घर यदि छोटा है तो छत की ऊंचाई कम से कम 10 से 12 फुट तक होनी चाहिए. इससे ज्यादा ऊंची रखने के लिए वास्तुशास्त्री से संपर्क करना चाहिए.
* घर की छत पर किसी भी प्रकार की गंदगी न करें. यहां किसी भी प्रकार के बांस या फालतू सामान भी न रखें. जिन लोगों के घरों की छत पर अनुपयोगी सामान रखा होता है, वहां नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं. उस घर में रहने वाले लोगों के विचार नकारात्मक होते हैं. परिवार में भी मनमुटाव की स्थितियां निर्मित होती हैं.
* घर की छत पर रखा पानी का टैंक किस दिशा में हो, यह जानना जरूरी है. उत्तर-पूर्व दिशा पानी का टैंक रखने के लिए उचित नहीं है, इससे तनाव बढ़ता है और पढ़ने-लिखने में बच्चों का मन नहीं लगता है. दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि की दिशा है इसलिए भी इसे पानी का टैंक लगाने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है. अग्नि और पानी का मेल होने से गंभीर वास्तुदोष उत्पन्न होता है. वास्तु विज्ञान के अनुसार दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण अन्य दिशा से ऊंचा और भारी होना शुभ फलदायी होता है.