नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के एक मामले में चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी. कुमारस्वामी, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) प्रमुख हैं. इससे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी कुमारस्वामी की याचिका खारिज कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और राजेश बिंदल की पीठ ने हाई कोर्ट के चार साल पुराने आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया.
यह केस बेंगलुरु के हलगेवडेराहल्ली गांव में भूमि डीनोटीफिकेशन से जुड़ा है. आरोप है कि जब कुमारस्वामी कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने वित्तीय लाभ के उद्देश्य से दो प्लॉट डीनोटिफाई किए थे. 2007 में कुमारस्वामी ने बीडीए की आपत्तियों के बावजूद इस जमीन को डीनोटिफाई किया. इसके बाद 2010 में इसे निजी पार्टियों को 4.14 करोड़ रुपये में बेच दिया गया.
एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ याचिका दायर हुई थी
एचडी कुमारस्वामी के वकील ने दलील दी कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में हुए संशोधन के अनुसार, उन्हें मुकदमे का सामना करने से पहले अभियोजन की स्वीकृति की आवश्यकता थी, जो नहीं ली गई थी. उन्होंने तर्क दिया कि बिना स्वीकृति लिए कोर्ट को इस मामले में संज्ञान नहीं लेना चाहिए था और हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर गलती की.
सुको ने क्यों खारिज की कुमारस्वामी की याचिका?
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मामले में सुनवाई जारी रहेगी और कुमारस्वामी को ट्रायल कोर्ट में खुद को निर्दोष साबित करना होगा. केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी, कर्नाटक की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं. कुमारस्वामी, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के बेटे हैं. देवेगौड़ा परिवार राज्य की राजनीति में खासी दखल रखता है.
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