वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा, संस्कृति के स्वामी शनि और देवता वरुण

वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा, संस्कृति के स्वामी शनि और देवता वरुण

प्रेषित समय :19:44:47 PM / Wed, Apr 2nd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

वास्तु के अनुसार हर दिशा का स्वामी एक ग्रह होता है तथा उस दिशा का स्वामी  ही एक देवता होता है तत्संबंधी देवता की कृपा से संबंधित दिशा से लाभ और उन्नति का योग बनता है.
वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा का स्वामी शनि महाराज होते है, कलयुग के देवता शनि महाराज ही है, इस युग में पश्चिम सभ्यता ने बहुत उन्नति पाई है, पश्चिम दिशा में ही सबसे ज्यादा उन्नति और तरक्की हासिल की है, इस दिशा के स्वामी वरुण अर्थात समुद्र देवता है, पश्चिम दिशा में तरक्की पाने वाले सभी देश, जैसे इंग्लैंड, पुर्तगाल, स्पेन, जर्मनी आदि देशों ने समुद्र मार्ग द्वारा ही पूरे विश्व के अन्य देशों की खोज की सुदूर देशों में जाकर वहा व्यापारिक संबंध के द्वारा उन देशों पर कब्जा किया और आर्थिक उन्नति की .
एक तरह से इन देशों पर समुद्र देवता की कृपा ही रही, जिस कारण ये देश समुद्री मार्ग द्वारा पूरे विश्व में राज्य कर सके.
*वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा में घर का मुख्य द्वारा नहीं होना चाहिए, पश्चिम दिशा में शयन और भोजन नहीं बनाना चाहिए.
इस दिशा में कारखना आदि का निर्माण कर सकते है, इस दिशा में भारी सामना रखना चाहिए .
जिन कुंडली में शनि ग्रह अच्छा होता है, उनको पश्चिमी देश जैसे अमेरिका यूरोप आदि जाने का मौका मिलता है, ऐसे लोग विदेश जाकर सफलता प्राप्त करते है तथा, विदेश में अच्छा पैसा कमाते है.
*पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु*(9893280184)
मां कामख्या साधक, जन्मकुंडली विशेषज्ञ, वास्तु शास्त्री

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-