मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है जिसमें आगामी फिल्म जॉली एलएलबी 3 की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता का आरोप था कि फिल्म न्यायपालिका का मज़ाक उड़ाती है और अदालतों की गरिमा को ठेस पहुंचाती है. अदालत ने हालांकि इन दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि न्यायाधीश इस तरह के चित्रण से प्रभावित नहीं होते.
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फिल्म के ट्रेलर में न्यायाधीशों को "मामू" कहकर संबोधित किया गया है, जो कि न्याय और न्यायपालिका का मज़ाक उड़ाने जैसा है. उन्होंने दलील दी कि इस तरह के संवाद समाज में गलत संदेश भेजेंगे और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचेगी.
बेंच ने इन दलीलों पर विचार करने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हम तो अपने न्यायाधीश बनने के पहले दिन से ही ऐसे मखौल का सामना करते आ रहे हैं. इसलिए चिंता मत कीजिए, हम इस तरह से प्रभावित नहीं होते.” अदालत ने स्पष्ट किया कि फिल्म की रिलीज़ को लेकर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने का आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है.
यह फिल्म 19 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट भी इसी तरह की याचिका खारिज कर चुका है. वहां की अदालत ने कहा था कि फिल्म के ट्रेलर या टीज़र में ऐसा कुछ नहीं है जिसे आपत्तिजनक माना जाए या जो विधिक बिरादरी की छवि खराब करता हो.
गौरतलब है कि जॉली एलएलबी 3 को लेकर केवल बॉम्बे और इलाहाबाद ही नहीं, बल्कि अन्य हाईकोर्टों में भी याचिकाएँ दायर की गई हैं. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में इस फिल्म पर याचिका दाखिल करने वाले वकील को फटकार लगाई थी क्योंकि उन्होंने याचिका दाखिल करते समय फिल्म के निर्देशक या निर्माता को पक्षकार नहीं बनाया था. उस मामले की अगली सुनवाई आज होनी है. वहीं गुजरात हाईकोर्ट में भी एक याचिका लंबित है, जहां अदालत ने याचिकाकर्ता से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश देखने को कहा है.
सभी याचिकाओं का मूल आरोप यही है कि यह फिल्म न्यायपालिका और वकालत पेशे का मज़ाक उड़ाती है. हालांकि अदालतों का रुख अब तक एक जैसा रहा है—फिल्म की सामग्री को ‘आपत्तिजनक’ नहीं माना गया है.
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालतें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सिनेमाई प्रस्तुति को लेकर अपेक्षाकृत उदार दृष्टिकोण अपना रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फिल्म में कोई ऐसा तत्व न हो जो सीधे तौर पर अदालत की अवमानना या घृणा फैलाने के दायरे में आता हो, तब तक केवल संवाद या काल्पनिक चित्रण के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती.
इस बीच, फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है. उनका कहना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और दर्शकों पर यह छोड़ देना चाहिए कि वे किस तरह की सामग्री को स्वीकार करते हैं.
स्पष्ट है कि जॉली एलएलबी 3 पर उठी कानूनी आपत्तियों को लेकर अदालतों का रुख एकसमान है. अब जबकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, फिल्म 19 सितंबर को तय समय पर रिलीज़ होने की राह में कोई बड़ी कानूनी बाधा नहीं दिखती.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




